पाचन क्रिया और पेट सम्बंधित रोगों में असरकारक अग्निसार प्राणायाम

योग एक ऐसी क्रिया है जिसके माध्यम से अपने आप को आयु के बंधन से मुक्त किया जा सकता है और लम्बी आयु का आनंद लिया जा सकता है| अगर आप कम आयु से ही योगाभ्यास करते रहते है तो यह आपके शरीर को भविष्य में भी ऊर्जावान और स्वस्थ बनाए रखता है|

पुरुषों में एक आयु के बाद मूत्र नियंत्रण संबंधी समस्याएं सामान्य हो जाती हैं। चिकित्सक इसे बढ़ती उम्र का रोग मानते हैं। उम्र के बढ़ने के साथ पुरुषों के अन्त:स्नवी हॉर्मोन्स की बदलते प्रभाव के कारण प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार में परिवर्तन होकर वृद्धि होती है, परन्तु वास्तव में इसका मुख्य कारण उम्र का बढ़ना नहीं, बल्कि अति काम लिप्तता, गलत आहार, मांशपेशियों की कमजोरी तथा रक्त की अशुद्धि है।

योग के नियमित अभ्यास से इस रोग के होने की सम्भावना को समाप्त किया जा सकता है। जो लोग इस समस्या से परेशान हैं, यदि वे योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग का अभ्यास करते है तो सजर्री की स्थिति को टाला जा सकता है। योग की निम्न क्रियाएं काफी उपयोगी हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक आसान के बारे में जानकारी देने वाले है, जिसके नियमित अभ्यास से आप बढ़ती उम्र भी जवान और स्वस्थ बने रहेंगे| आइये जानते है Agnisar Kriya in Hindi.

Agnisar Kriya in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Agnisar Kriya in hindi

हमारा शरीर 13 प्रकार की अग्नियां चलाती है| जिनमे भोजन पचाने में उपयोगी सात धातुओं की अग्नि, पांच भूतों की अग्नि तथा एक भूख लगाने वाली जठराग्नि होती है। जो क्रिया इन 13 प्रकार की अग्नियों को बल दे, उसे अग्निसार कहते हैं। यह क्रिया पेट के रोगों से जीवन भर बचाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्राणायाम को आप खड़े होकर, बैठकर या लेटकर किसी भी तरह से किया जा सकता है| आइये जानते है अग्निसार क्रिया विधि-

पहली विधि

  1. सबसे पहले सिद्धासन या सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं|
  2. इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें तथा रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को सीधा रखें और आँखों को बंद कर लें|
  3. अब मुंह से गहरी साँस को बाहर निकलते हुए उड्डीयान बांध लगाए अर्थात पेट को अंदर की तरह खींचे|
  4. अब जितनी देर हो सके साँस को रोके और पेट की मांसपेशियों को अंदर बाहर की तरफ हिलाएं-डुलाए यानि पेट को नाभि वाले स्थान से बार-बार झटके से अंदर और बाहर की ओर करें|
  5. इस समय अपना ध्यान मणिपुर चक्र यानि नाभि के पीछे रीढ़ पर रखें, यथाशक्ति करने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं|
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दूसरी विधि

  1. इसे करने के लिए सबसे पहले खड़े हो जाये और दोनों पेरो के बिच थोड़ा अंतर बना लें|
  2. अब साँस को अंदर खींचे और उसे बाहर निकालते हुए आगे की तरफ झुके और हाथो को जांघों पर रखें|
  3. अब साँस को बाहर रोके व् हाथो से पैरों पर जोर डालते हुए पेट को अंदर की तरफ खींचे और फिर बाहर की ओर ढीला छोड़े|
  4. अपनी यथाशक्ति साँस को रोककर रखें, तब तक पेट को अंदर बाहर की तरफ हिलते रहें|
  5. फिर जब साँस नहीं रोक पाए तब पेट को ढीला छोड़ दे और साँस भरकर आराम से खड़े हो जाएं|
  6. अब थोड़ा आराम करने के पश्चात पुनः इस क्रिया को दोहराए| 3 से 4 बार इसका अभ्यास करें|

अग्निसार प्राणायाम के लाभ

आइये जानते है Agnisar Kriya Benefits

  1. इस प्राणायाम के अभ्यास से पेट के सभी अंगो में रक्त का संचार ठीक तरह से होने लगता है| जिससे अमाशय, लिवर, आंते, किडनी, मलाशय और मूत्राशय को बल मिलता है और इनसे सम्बंधित रोग नहीं होते है|
  2. यह क्रिया हमारी पाचन प्रक्रिया को गतिशील कर उसे मजबूत बनाती है| यह क्रिया पेट की चर्बी को दूर करता है तथा कब्ज, गैस, डकार, अफारा, भूख न लगना आदि पाचन तंत्र के रोगों से भी रहत दिलाता है| इसलिए प्रतिदिन इसका अभ्यास करने से कभी पेट के रोग परेशान नहीं करते।
  3. डायबटीज़ रोगियों के लिए यह क्रिया राम-बाण की तरह कार्य करती है और बड़ा हुआ शुगर लेवल शीघ्रता से कम हो जाता है।
  4. यह नपुंसकता को दूर कर युवा अवस्था को बनाए रखने में मददगार साबित होती है।

सावधानियां

  1. उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, पेप्टिक अल्सर, कोलाईटिस, हर्निया या पेट का ऑपरेशन हुआ हो तो इसका अभ्यास न करें।
  2. स्त्रियां मासिक धर्म के दिनों में और गर्भावस्था में इसका अभ्यास न करें।

ऊपर आपने जाना Agnisar Kriya in Hindi, यह एक ऐसा आसन है जो आपको स्वस्थ तो रखता है ही साथ आपको बढ़ती उम्र में होने वाली परेशानियों से भी बचाता है|

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