Apana Mudra: शरीर को डिटॉक्स करे और पाचन तंत्र को मजबूत बनाए

अपान मुद्रा शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए विसर्जन तंत्र को उत्तेजित करके शरीर को डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र में मदद करता है। इसलिए इसे पाचन मुद्रा व् डेटोक्सिफिकेशन मुद्रा भी कहा जाता है।

शरीर के विभिन्न अवयवों और स्थानों पर प्राण वायु अलग – अलग कार्य करती है। वायु समुदाय को पांच भागों में विभाजित किया गया है जैसे – अपान, प्राण, उदान, व्यान और समान।

अपान स्वास्थ केन्द्र और शक्ति केन्द्र में होती है। योग की दृष्टि से इसे स्वाधिष्ठान चक्र और मूलाधर चक्र के रूप में जाना जाता है। अपान का कार्य होता है मल – मूत्र, गर्भ और वीर्य को बाहर निकालना। साथ ही यह सोने – बैठने, चलने जैसी गतिमय स्थितियों में सहयोग करने का कार्य भी करता है।

अपान मुद्रा एक प्रकार की हाथ मुद्रा होती है। जहां हाथों की उंगलियां एक विशेष हाथ मुद्रा बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं। जानते है Apana Mudra को कैसे किया जाता है और उसे करने के क्या फायदे होते है साथ ही इसमें क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

Apana Mudra: जानिए इसे करने की विधि, इसके फायदे और सावधानियां

Apana Mudra in Hindi

अपान मुद्रा को करने की विधि

  • इस मुद्रा को करने के लिए सबसे पहले एक आसन पर सुखासन मुद्रा में या फिर किसी अन्य ध्यान मुद्रा में बैठ जाए।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनो पर रखे।
  • ध्यान रहे कि इस मुद्रा में रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और हाथ की हथेलियां ऊपर की ओर हो।
  • फिर हाथ की मध्यमा जिसे मिडिल फिंगर कहते है व् अनामिका अर्थात रिंग फिंगर को आपस में मिला कर मोड़ ले और अंगूठे के अग्रभाग में लगा दें।
  • इसके बाद तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) और कनिष्का (लिटिल फिंगर) को सीधा रखे।
  • अपान मुद्रा को करने का सबसे अच्छा समय सुबह, दोपहर और शाम का माना जाता है।
  • इस मुद्रा को लगभग 48 मिनट के लिए दिन में कर सकते है।
  • आप चाहे तो इस मुद्रा को 16 मिनट तक दिन में तीन बार भी कर सकते है।

अपान मुद्रा को करने के फायदे

  • अपान मुद्रा हृदय को शक्तिशाली बनाता है। साथ ही यह दाँतों के दोष एवं दर्द दूर करने में भी मदद करता है।
  • यह मुद्रा अपच, कब्ज और बवासीर से राहत दिलाने में मदद करता है और मूत्रावरोध एवं गुर्दों का दोष दूर करने में भी सहायक होता है।
  • अपान मुद्रा को नियमित करने से मधुमेह रोग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • यह मुद्रा पेट के विभिन्न भागों के कार्य को सुधारने में सहायक होता है।
  • अपान मुद्रा शरीर को डिटॉक्स और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए एक लाभकारी मुद्रा होती है।
  • मासिक धर्म संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए भी इस मुद्रा का अभ्यास नियमित रूप से कर सकते है।

अपान मुद्रा को करते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां

  • अपान मुद्रा को इसकी निश्चित समय अवधि से ज्यादा नहीं करना चाहिए।
  • इस मुद्रा को करने से यूरीन ज्यादा आ सकता है। इसके लिए भयभीत न हो।

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