शुगर और अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ पाने के लिए करें अर्धमत्स्येंद्रासन

comment 0

शरीर को स्वस्थ और दीर्घायु बनाये रखने के लिए सबसे अच्छा और बेहतर तरीका है योग का नियमित अभ्यास, यदि आप योग को अपनाते है तो यह आपको मानसिक शांति भी प्रदान करता है|

योगासन की प्रथा हमारे देश में पूर्वजों के समय से चली आ रही है| पहले के समय में यह रोजमर्रा के प्रतिदिन किया जाना वाला एक अभ्यास था, जो समय के साथ-साथ कम होता गया| लेकिन अब मनुष्य किसी न किसी प्रकार की बीमारियों और रोगों से ग्रसित होने की वजह से पुनः योग को अपनाने लगा है|

इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है योग का महत्व और इसकी बढ़ती उपयोगिता है| योग द्वारा हो रहे स्वास्थ्य लाभ और मन की शांति को देखते हुए लोग फिर से इसे अपना रहे है| आज हम आपको एक ऐसे योग आसान के बारे में बताने वाले है जो मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत ही आराम दायक साबित होता है|

इस योगासन का नाम है अर्धमत्स्येंद्रासन, इस योगासन का नाम है अर्धमत्स्येंद्रासन, इस आसान के बारे में कहा जाता है की इस आसान में गुरु गोरखनाथ जी के गुरुदेव मत्स्येंद्रनाथ जी बैठकर ध्यान साधना किया करते थे, इसलिए इस योग आसान का नाम उनके नाम पर रखा गया है| अब हम Ardha Matsyendrasana in Hindi, को करने की विधि और इससे होने वाले लाभों की जानकारी दे रहे है|

Ardha Matsyendrasana in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Ardha Matsyendrasana in hindi

यह एक ध्यानात्मक आसन है जो शारीरिक रूप से भी बहुत अधिक उपयोगी है| मत्स्येंद्रासन की आधी क्रिया को लेकर ही अर्धमत्स्येंद्रासन अधिक प्रचलित हुआ| यह रीढ़ की हड्डियों के साथ उनमे से निकलने वाली नाड़ियो को बहुत ही आसानी से पुष्ट करता है| इस आसान के महत्व को समझते हुए ही इसके लाभ का वर्णन हठयोग प्रदीपिका में किया गया है| घरेण्ड संहिता में भी इस आसन का सम्पूर्ण विवरण दिया गया है|

अर्धमत्स्येंद्रासन करने की विधि

हठयोग प्रदीपिका और घरेण्ड संहिता में वर्णित आसन भिन्न भिन्न है| हठयोग प्रदीपिका वर्णित आसन आसन की साधारण विधि अधिक प्रचलन में है| आइये जानते है इसकी विधि-

पहली विधि

हठयोगप्रदीपिका के अनुसार, इस आसान को करने के लिए, दायें पैर को बायीं पैर की जांघ के मूल में रखकर और बाये पैर को दाहिने घुटने के बाहर निकालते हुए शरीर को ऐंठकर, हाथो को विपरीत दिशा में पकड़कर बैठना ही एक पैर से कर लेने के बाद इसी प्रकार से बाये पैर से भी किया जाता है|

आप यह भी पढ़ सकते है:- योग के अभ्यास से मुहासों से मुक्ति पाएं और चेहरा सुन्दर बनाएं

दूसरी विधि

मत्स्येंद्रासन थोड़ा कठिन आसन है इसलिए आप अर्ध मत्स्येंद्रासन भी कर सकते है| जिसकी विधि कुछ इस प्रकार है-

इसे करने के लिए सबसे पहले समतल जमीन पर पेरो को लम्बा करके बैठ जाएं| इसके बाद बाये पैर को घुटने की ओर से मोड़े तथा एड़ी को गुदाद्वार के नीचे रखें| अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए, बाये पैर की जंघा के पीछे की तरफ ले जाकर जमीन पर रख दें| अब बाये हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करके अर्थात घुटने को बगल में दबाते हुए बायें हाथ से दाहिने पैर का अँगूठा पकड़ें। अब दाहिना हाथ पीठ के पीछे से घुमाकर बाये पैर की जांघ का निम्न भाग पकड़ें। सिर को दाहिनी ओर इतना घुमाएँ की ठोड़ी और बायाँ कंधा एक सीध में आ जाए तथा ध्यान रखें की यह नीचे की ओर ना झुकें। छाती और गर्दन को सीधा और तना हुआ रखें|

यह एक तरफ का आसन हुआ। इस प्रकार पहले दाहिने पैर मोड़कर, एड़ी गुदाद्वार के नीचे दबाकर दूसरी तरफ का आसन भी करें। प्रारंभ में इस आसन को कुछ समय के लिए करें, फिर अच्छी तरह अभ्यासरत हो जाने पर आप इसकी समयावधि को बड़ा सकते है|

अर्ध मत्स्येंद्रासन के लाभ 

आइये जानते है Ardha Matsyendrasana Benefits

  1. इस आसन के अभ्यास से मेरुदण्ड याने रीढ़ हड्डी मजबूत होती है और शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है|
  2. पेट के सभी अंगो के लिए यह फायदेमंद होता है| साथ ही रीढ़ की हड्डियों से निकलने वाली नाड़ियो की भी बहुत अच्छे से कसरत हो जाती है|
  3. इसके अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होती है| इसके तीव्र होने से कब्ज, अपच की समस्या दूर होती है, साथ ही लिवर ठीक तरह से कार्य करता है जिससे पीलिया या अन्य लिवर के रोगो में राहत मिलती है|

ऊपर अपने जाना Ardha Matsyendrasana in Hindi, यह योगासन थोड़ा कठिन है इसलिए इसे किसी योग शिक्षक की मदद से प्रारम्भ करें, अभ्यासरत हो जाने के पश्चात् आप इसे आसानी से घर पर कर सकते है|

Related Post