गुदाद्वार को रोग रहित रखने के लिए अवश्य करें अश्विनी मुद्रा

मनुष्य शरीर को स्वस्थ और दुरुस्त बनाए रखने के लिए हमारे योग ऋषियों द्वारा कई प्रकार के योगासन, प्राणायाम, ध्यान, क्रियाएं और मुद्राओं का निर्माण किया| यह सभी किसी न किसी रूप में एक दूसरे से जुड़े हुए है|

ऋषि-मुनियों के अनुसार आसन और प्राणायाम की स्थिति को मुद्रा कहा जाता है| बंध, क्रिया और मुद्रा में आसन और प्राणायाम दोनों का ही कार्य होता है| योग में मुद्राओं को आसन और प्राणायाम से भी बढ़कर माना जाता है| जहां आसन से शरीर की हडि्डयाँ लचीली और मजबूत होती है जबकि मुद्राओं से शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास होता है| मुद्राओं का संबंध शरीर के खुद काम करने वाले अंगों और स्नायुओं से है|

मुद्राओं की संख्या को लेकर हमेशा से ही काफी मतभेद पाए जाते हैं| ‘घेरण्ड संहिता‘ मुद्रा और दूसरे योगासनों के बारे में बताने वाला सबसे पुराना ग्रंथ है| हठयोग पर आधारित इस ग्रंथ को महर्षि घेरण्ड ने लिखा था| घेरंड में 25 और हठयोग प्रदीपिका में 10 मुद्राओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन सभी योग के ग्रंथों की मुद्राओं को मिलाकर कुल 50 से 60 हस्त मुद्राएँ हैं| आज हम आपको इन्ही मुद्राओं में से एक अश्विनी मुद्रा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले है आइये जानते है Ashwini Mudra in Hindi.

Ashwini Mudra in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Ashwini Mudra in Hindi

अश्विनी मुद्रा का अर्थ है ” अश्व यानि घोड़े की तरह करना” घोडा अपने गुदाद्वार को खोलता और बंद करता रहता है| यही कारण है यह अन्य सभी प्राणियों से अधिक शक्ति उत्पन्न करता है|

अथ अश्वनीमुद्राकथनम्|

आकुञ्चयेद्गुदद्वारं प्रकाशयेत् पुनः पुनः| सा भवेदश्विनी मुद्रा शक्तिप्रबोधकारिणी ॥

अश्विनीमुद्रायाः फलकथनम्|

अश्विनी परमा मुद्रा गुह्यरोगविनाशिनी| बलपुष्टिकरी चैव अकालमरणं हरेत् ॥

श्रीघेरण्डसंहितायां घेरण्डचण्डसंवादे घटस्थयोगप्रकरणे मुद्राप्रयोगो नाम तृतीयोपदेशः ॥

जिस प्रकार से घोडा अपने गुदाद्वार को बार बार सिकोड़ता ढीला करता है, उसी प्रकार गुदाद्वार को सिकोड़ना और फैलाने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते है| यह एक बहुत ही आसान क्रिया है, जिसे करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है|

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अश्विनी मुद्रा करने की विधि

इसे हम दो तरीकों से कर सकते है| दोनों में कोई खास अंतर नहीं है, बस कुछ सामान्य से परिवर्तन है| आइये जानते है Ashwini Mudra Yoga.

पहली क्रिया

इसे करने के लिए कगासन की स्थिति में बैठना होता है अर्थात जिस तरह टॉयलेट में बैठते है वैसे बैठना होता है| फिर गुदाद्वार को खींचकर मूलबंध की अवस्था में थोड़ी देर रहें और फिर ढीला छोड़ दें| यह प्रक्रिया निरंतर जारी रखें, जब तक आप इसे आसानी से यथशक्ति कर पाएं और फिर कुछ देर आराम पूर्वक बैठ जाएं|

दूसरी क्रिया

  1. इसकी दूसरों प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन किये गए है| इसे करने के लिए जमीन पर कम्बल या चटाई आदि बिछा दें और सिर को पूर्व दिशा में रखें|
  2. अब साँस को बाहर निकाले और पैट को 2-5 बार अंदर बाहर करें और योनि संकुचन विस्तरण 25 बार करें ।
  3. इसके बाद फिर साँस लो फिर इसे बाहर छोड़े और शौच जाने की जगह को अंदर-बाहर करें|
  4. इस क्रिया को अपनी शक्ति अनुसार करें| इसे आप 100 बार तक कर सकते है|

अश्विनी मुद्रा के लाभ

  1. इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से गुदा के सभी रोग ठीक होते है तथा शारीरिक ताकत बढ़ती है|
  2. इस मुद्रा को करने से उम्र लंबी होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि इसके अभ्यास से कुण्डलिनी का जागरण भी होता है।
  3. यह नपुंसकता को दूर करता है तथा शीघ्रपतन की समस्या रोकने में प्रभावी है|
  4. इससे बुद्धि बढ़ती है साथ ही Ashwini Mudra for Piles (बवासीर) और कब्ज की परेशानी से राहत मिलती है|

घोडा में इतनी शक्ति और फुर्ती का रहस्य यही मुद्रा है, इस क्रिया के करने के परिणाम स्वरुप घोड़े में इतनी शक्ति आ जाती है कि आज के मशीनी युग में भी इंजन आदि की शक्ति को अश्व शक्ति (हॉर्स पावर) से मापी जाती है|

आज हमने आपको Ashwini Mudra in Hindi यह मुद्रा बहुत ही अलग है और यह भी हो सकता है की प्रारम्भ में आप इसे करने में संकोच करें या हो सकता है यह आपको कुछ अजीब लगे, लेकिन एक बार जब आप इसे सफलतापूर्वक कर लेंगे तो, आपको इसकी आदत हो जाएगी|

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