आपके शरीर को स्वस्थ और सुडोल बनाता है चक्रासन

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चक्र का अर्थ होता है पहिया, इस आसन को करने पर शरीर की आकृति चक्र के सामान नजर आती है इसलिए इस आसन को चक्रासन कहा जाता है| धनुरासन के विपरीत होने की वजह से इसे उर्ध्व धनुरासन भी कहते है| योग शास्त्र में इस आसान को मणिपूरक चक्र कहा जाता है|

Chakrasana in Hindi को करने से शरीर व् रीड की हड्डी मजबूत और लचीली होती है, साथ साथ अन्य क्रियाओं में भी सहायक होता है| वास्तव में यह आसान धनुरासन, उल्ट्रासन और भुजंगासन के लाभ एक साथ पहुंचाता है| इस आसन का प्रतिदिन अभ्यास करने से न्यूरोग्लिया कोशिकाओं का निर्माण होता है|

न्यूरोग्लिया रक्षात्मक और सहायता कोशिकाएं होती है तथा यह मेरुरज्जु या मष्तिष्क का 40 प्रतिशत हिस्सा होता है| यह कोशिकाएं केंद्रीय तंत्रिकाओं को बिमारियो से बचाती है| यह आसन थोड़ा कठिन होता है। इसलिए इस आसान को करने से पहले अर्धचक्रासन का अभ्यास करना चाहिये| इसके पश्चात चक्रासन का अभ्यास करना चाहिए|

अर्धचक्रासन करने के लिए, दोनों पेरो के बीच 1 फ़ीट का अंतर बनाकर खड़े हो जाये| फिर दोनों हाथो की उंगलियो को एक दूसरे में फसाकर हाथो को सिर के ऊपर रखे| इसके बाद हाथो को ऊपर करते हुए पुरे शरीर में खिंचाव लाएं| अब शरीर को कमर से पीछे की ओर हल्का सा झुकाते हुए ऊपर की और देखें| इस स्थिति में 1 से 2 मिनट तक रहे और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं| इस प्रक्रिया को 5-10 बार करें|

अर्धचक्रासन को करने से आपका शरीर धीरे-धीरे चक्रासन करने की स्थिति में आ जायेगा| जिसे आप आसानी से कर पाएंगे| आइये जानते चक्रासन करने की विधि और उससे होने वाले लाभ|

Chakrasana in Hindi: जाने इसकी विधि लाभ और सावधानियाँ

 Chakrasana in Hindi

Chakrasana Steps: चक्रासन करने की विधि

  1. सबसे पहले स्वस्छ और समतल जमीन पर चटाई या आसन बिछा लें
  2. अब जमीन पर पीठ के बल शवासन की स्थिति में लेट जाये
  3. फिर दोनों पेरो के बीच एक से डेढ़ फ़ीट का अंतर बनाये तथा पेरो के तलवो और एड़ियो को जमीन से लगाएं|
  4. अब दोनों हाथो की कोहनियो को मोड़कर, हाथो को जमीन पर कान के पास इस प्रकार लगाएं कि उंगलियाँ कंधों की ओर तथा हथेलिया समतल जमीन पर टिक जाये|
  5. अब शरीर को हल्का ढीला छोड़े और गहरी साँस लें|
  6. पैरों और हाथो को सीधा करते हुए, कमर, पीठ तथा छाती को ऊपर की ओर उठाएं| सिर को कमर की ओर ले जाने का प्रयास करें तथा शरीर को ऊपर करते समय साँस रोककर रखे|
  7. अंतिम स्थिति में पीठ को सुविधानुसार पहिये का आकर देने की कोशिश करें|
  8. शुरुवात में इस आसन को 15 सेकंड तक करने का प्रयत्न करें। अभ्यास अच्छे से हो जाने पर 2 मिनट तक करे|
  9. कुछ समय पश्चात् शवासन की अवस्था में लोट आएं|

यह आसन समान्य आसनों से थोड़ा कठिन होता है इसलिए इस आसन को योगाचार्य की उपस्थिति में करें| प्रतिदिन धीरे धीरे अभ्यास करते रहेंगे तो आप भी इसे आसानी से कर पाएंगे लेकिन प्रारंभिक दौर में भी शरीर पर अत्यधिक दबाव डालें|

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Chakrasana Benefits in Hindi: चक्रासन के लाभ

यह योग जितना कठिन है उतना ही शरीर के लिए लाभप्रद भी है| आइये जानते है Chakrasana benefits in hindi

  1. यह आसन करने रक्त का प्रवाह तेजी से होता है|
  2. मेरुदंड तथा शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होकर योगिक चक्र जाग्रत होते है|
  3. छाती, कमर और पीठ पतली और लचीली होती है साथ ही रीड़ की हड्डी और फेफड़ों में लचीलापन आता है |
  4. मांसपेशियों मजबूत होती है जिसके कारण हाथ, पैर और कंधे चुस्त दुरुस्त होते है |
  5. इस आसन के करने से लकवा, शारीरिक थकान, सिरदर्द, कमर दर्द तथा आंतरिक अंगों में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है|
  6. पाचन शक्ति बड़ती है। पेट की अनावश्चयक चर्बी काम होती है और शरीर की लम्बाई बढ़ती है|
  7. इस आसन को नियमित करने से वृद्धावस्था में कमर झुकती नहीं है और शारीरिक स्फूर्ति बनी रहती है साथ ही स्वप्नदोष की समस्या से भी मुक्ति मिलती है|

सावधानियाँ

योग करने से लाभ तब होता है जब हम उन्हें सही तरीके और सही अवस्था में करें। थोड़ी सी गलती हमारे शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदेह हो सकती है| आइये जानते है चक्रासन को करते समय किन-किन सावधानियों को रखना चाहिए-

  1. महिलाओ को गर्भावस्था और मासिक धर्म के समय यह आसन नहीं चाहिए|
  2. दिल के मरीज, कमर और गर्दन दर्द के रोगी, हाई ब्लड प्रेशर और किसी भी तरह के ऑपरेशन वाले लोगो को भी यह आसान नहीं करना चाहिए|
  3. योगाचार्य की उपस्थिति में ही इस Chakrasana का अभ्यास करें|

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