शरीर के रोगों को नष्ट कर शक्ति प्रदान करे धौति क्रिया

किसी भी प्रकार का योग, प्राणायाम और क्रिया मनुष्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है, क्योकि यह शरीर को आंतरिक और बाह्य दोनों के लिए स्वास्थवर्धक साबित होते है| आज हम आपको षट्कर्म की एक ऐसी ही क्रिया के बारे में बताने वाले है|

हठ योग की साधना में षट्कर्म का प्रमुख स्थान है। साधना के लिए जिस शुद्धि एवं आरोग्यता की आवश्यकता होती है, वह षट्कर्मों के द्वारा ही सम्भव है। षट्कर्म शरीर में स्थित विजातीय तत्वों, दूषित पदार्थों और मल को बाहर निकाल कर शरीर व मन को हल्का व निरोगी बना देते हैं। इनके माध्यम से बीमारियों का जड़ से निवारण किया जाता है। वात, पित्त और कफ की विषमता हो जाए, तो इनके अभ्यास से उन्हें संतुलित किया जा सकता है।

षट्कर्म में शरीर-शोधन के छह साधन बताए गए हैं- धौति, बस्ति, नेति, नौलि, त्राटक और कपालभाति। धौति का अर्थ होता है – धोना, यह क्रिया हठयोग का एक अंग है। यह हठयोग के 6 कर्मों में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण कर्म है। धौति क्रिया कई प्रकार से की जाती है – वस्त्र धौति, दंत धौति, अग्निसार या वाहनीसर धौति, मूल धौति और जिव्हा शोधन धौति। आइये जानते है Dhauti Kriya in Hindi.

Dhauti Kriya in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Dhauti Kriya in Hindi

धौति क्रिया की विधि 

धौति क्रिया में मुंह को कौवे की चोंच की भांति बनाकर अर्थात् दोनों होंठों को सिकोड़कर धीरे-धीरे हवा को पानी की भांति पीकर पेट में ले जाएं, फिर वहां चारों ओर घुमाएं। इसके बाद नासिका छिद्रो से हवा को धीरे-धीरे बाहर निकलें। यही वातसार धौति कहलाती है। यह क्रिया पेट के रोगों को नष्ट करती है और आंतों को ताकत प्रदान करती है। इससे भूख भी बढ़ती है। यह Dhauti Kriya Steps है|

वस्त्र धौति क्रिया करने की विधि

इस क्रिया को करने के लिए 5 से 6 मीटर लम्बा और 2 से 3 इंच चौड़ा साफ व स्वच्छ कपड़ा लें। इसके बाद इसे  अच्छी तरह धोकर 5 मिनट तक पानी में डालकर उबालें और फिर सुखा लें। सूखने के बाद उस कपड़े की चार तह करके गोल लपेट लें। अब एक साफ बर्तन में उबले हुए नमक मिले पानी को डालें। फिर कागासन की स्थिति में बैठ जाएं और कपड़े को उस पानी में भिगो लें। अब कपड़े के ऊपरी सिरे को मध्यमा व अनामिका अंगुली के बीच में दबाकर मुंह के अन्दर डालकर धीरे-धीरे कपड़े को निगलें और साथ ही गर्म पानी का घूंट पीते रहें। इससे कपड़े को निगलने में आसानी होती है। शुरू-शुरू कपड़े को निगलना कठिन होता है, परन्तु प्रतिदिन अभ्यास से यह आसानी से होने लगता है। पहले दिन में 1 फुट कपड़ा निगलें और फिर धीरे-धीरे इसे बाहर निकाल लें। इस तरह से इस क्रिया में कपड़े को निगलने की लम्बाई बढ़ाते हुए 4 फुट तक कपड़े को निगल लें।

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धौति क्रिया के लाभ

  1. इसके अभ्यास से शरीर से सभी रोग नष्ट हो जाते हैं तथा शरीर में बल की वृद्धि होती है।
  2. इस क्रिया के द्वारा शरीर से पित्त व कफ दोनों बाहर निकल जाते हैं।
  3. इससे थायराईड, मलेरिया, ज्वर आदि रोग ठीक होते हैं।
  4. यह तोतलापन को दूर कर आवाज को साफ करता है।
  5. दमे के रोग में भी लाभकारी है। इसके अभ्यास से खांसी, सांस संबन्धी रोग, जुकाम, मुंह के छाले सभी रोग ठीक होते हैं।
  6. इसके अभ्यास से पेट साफ होता है, जिससे कब्ज, बदहजमी, गैस आदि विकार नष्ट होते हैं।
  7. यह पाचनशक्ति को शक्तिशाली बनाता है। इससे श्वासनली, नाक, कान, आंख, पेट व आंतों की अच्छी सफाई हो जाती है।
  8. यह मानसिक बीमारियों को खत्म करता है।
  9. बवासीर आदि रोगों को ठीक करने में भी यह क्रिया  लाभकारी  है।
  10. हठयोग के अनुसार इस क्रिया को करने से कास, श्वास, प्लीहा, कुष्ठ तथा 20 प्रकार के कफ से उत्पन्न होने वाले रोग ठीक हो जाते हैं।

सावधानियां

  • इस क्रिया में कपड़े को निगलना कठिन होता है। इसलिए इस क्रिया को धीरे-धीरे करें।
  • कपड़ा निगलते समय सावधानी रखें, क्योंकि निकालते समय कभी-कभी कपड़ा अटक जाता है, परन्तु घबराएं नहीं कपड़े को पुन: अन्दर निगलें और फिर बाहर निकालें।

आज हमे आपको Dhauti kriya in Hindi के बारे में बहुत सी ऐसी बाटे बताई है, जिसे शायद ही आप जानते होंगे| आप भी इसका अभ्यास कर शरीर को स्वस्थ बनाए रख सकते है| परन्तु इसे पहले आप किसी योग शिक्षक के सानिध्य में अच्छी तरह सीखे और उसके बाद ही इसे घर पर दोहराए|

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