ध्यान योग से रखें मन, चित्त और शरीर का बेहतरीन ख़याल

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आज के आधुनिक युग में मनुष्य अपने काम और पैसा कमाने में लगा हुआ है उसे बस एक ही चीज नजर आती है और वो है पैसा, पैसा कमाने और अपना स्टेटस बनाये रखने के लिए वह दिन रात भागता रहता है| जिस वजह से मानसिक तनाव होना सामान्य है| अगर ध्यान का नियमित अभ्यास किया जाये तो तनाव जैसी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है| तो आइये इस लेख में जाने Dhyan Yog in Hindi और इसे करने की विधि|

ध्यान, योग का आठवां अंग है जो अत्यधिक महत्वपूर्ण तत्व है| ध्यान एक ऐसी योग क्रिया है जो तन मन और आत्मा के बीच लयात्मक सम्बन्ध स्थापित करता है| ध्यान के द्वारा हमारे शरीर की ऊर्जा को केंद्रित किया जा सकता है| ऊर्जा केंद्रित होने से मन में शांति और शरीर में शक्ति का संचार होता है और आत्मीय बल मिलता है|

ध्यान के द्वारा वर्तमान को देखने उसे समझने में मदद मिलती है| वर्तमान में हमारे सामने जो लक्ष्य है उसे प्राप्त करने के लिए पेरणा और क्षमता भी ध्यान से मिलती है| आज हम आपको ध्यान के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाले है कि ध्यान की शुरुआत कैसे करें| हम आपको ध्यान के सम्बन्ध में कुछ सामान्य जानकारी दे रहे है जो आपको ध्यान योग करने में सहायक होंगे|

Dhyan Yog in Hindi: जानिए ध्यान की परिभाषा और विधि

Dhyan Yog in Hindi

ध्यान की परिभाषा और अर्थ

योगसूत्र अर्थात: जहाँ चित्त को लगाया जाए उसी में वृत्ति का एकतार चलना ध्यान है। धारणा का अर्थ चित्त को एक जगह लाना या ठहराना है लेकिन ध्यान का अर्थ है जहाँ भी चित्त ठहरा हुआ है उसमें वृत्ति का एकतार चलना ध्यान है। उसमें जाग्रत रहना ध्यान है।

ध्यान का मुख्य अर्थ है जागरूकता, होश या अवेयरनेस का भाव होना| ध्यान एक ऐसी कला है सिर्फ एकाग्रता नहीं है| एकाग्रता एक स्पॉट लाइट की तरह है जो केवल एक ही स्थान को फोकस करती है, लेकिन ध्यान एक बल्ब की तरह है जो चारों ओर अपना प्रकाश फैलाता है| सामान्य व्यक्ति में ध्यान कम वॉट का हो सकता है, लेकिन योगियों में यह सूर्य के प्रकाश की तरह होता है| जिसके परिणाम स्वरुप दुनिया की हर चीज पकड़ में आ सकती है|

ध्यान का अर्थ उसके नाम में ही है| ध्यान का अर्थ है ध्यान देना, हर उस बात पर, हर उस चीज पर जो हमारे जीवन से सम्बन्ध रखती है| शरीर पर, मन पर और जो हमारे आसपास घटित हो रहा है उस पर| विचारों पर, क्रिया कलापो पर और भावों पर| इस ध्यान देने के थोड़े से प्रयत्न से ही हम अमृत की और एक एक कदम बढ़ा सकते है|

ध्यान योग की विधि या तरीका

हम आपको कुछ ऐसे सरल उपाय बता रहे है जो उन व्यक्तियों के लिए है जो Dhyan Yog की शुरुआत करना चाहते है| आइये जानते है उन सुझावों और तरीको के बारे में-

सुविधाजनक समय  

ध्यान वास्तव में विश्राम या शरीर को आराम देने का समय है, इसलिए इसे आप अपनी सुविधा के अनुसार करें| ऐसा समय चुने जिस समय आपको कोई परेशान ना कर सकें| सूर्योदय और सूर्यास्त का समय जब दिन और रात परिवर्तित होते है, ध्यान योग के लिए सबसे बेहतर होता है|

शांत या बेहतर स्थान

सुविधानक समय के साथ-साथ सुविधाजनक स्थान भी चुने ताकि जहां बैठकर आप अपने चित्त को एकाग्र कर सके, जहा बैठकर ध्यान करने पर आपका मन इधर उधर न भटके|

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पेट को खाली रखें

भोजन से पहले या भोजन के कुछ घंटे पश्चात ध्यान का अभ्यास करें, क्योंकि पेट खाली होने पर आपका मन खाने की और जायेगा तथा पेट भरा होने पर नींद आने की सम्भावना रहती है|

ध्यान की बैठक

ध्यान करते समय आपके बैठने की मुद्रा का बहुत फर्क पड़ता है| बहुत देर तक बैठे रहने के बाद भी आपको थकान या शरीर में अकड़न महसूस ना हो इसके लिए नर्म या मुलायम चटाई पर बैठे, ताकि आप लम्बे समय तक सुखद और स्थिर अवस्था में ध्यान मग्न हो सकें|

सीधे बैठे, रीड की हड्डी को सीधा रखें, अपने कंधे और गर्दन को विश्रामदेह अवस्था में रखें तथा पूरी प्रक्रिया के दौरान आँखे बंद रखें|

ऊपर आपने जाना Dhyan Yog in Hindi. ध्यान को मन लगाकर करेंगे तभी आपको इसका लाभ मिलेगा| ध्यान करते समय किसी प्रकार की तकलीफ या तनाव होने पर जबरदस्ती अभ्यास न करें| ध्यान करने के अनेको तरीके है यह निर्भर करता है हम किस तरह से उसे अपनाते है|

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