Half Butterfly Pose: आसन जो ध्यान मुद्रा करने को बनाये आसान

हाफ बटरफ्लाई पोज़ इसे अर्ध तितली आसन भी कहा जाता है। यह बैठकर किये जाने वाले आसनो में से एक होता है। साथ ही इस आसन में सांस की स्थिति सामान्य ही रहती है।

इस आसन को करने के लिए हैमस्ट्रिंग के लचीले होने की आवश्यकता नहीं होती है। बिना लचीले हैमस्ट्रिंग के ही पीठ को स्ट्रेच किया जाता है।

यह तितली आसन के समान ही होता है। तितली आसन में दोनों पैरो को मोड़कर अभ्यास किया जाता है जबकि अर्ध तितली आसन में ऐसा नहीं होता है इसमें बारी बारी से एक ही पैर को मोड़कर इसका अभ्यास किया जाता है।

अर्ध तितली आसन उन लोगो के लिए भी लाभकारी होता है जो दोनों पैरों को मोड़कर नहीं बैठ पाते और उनको ऐसा करने में कठिनाई होती है। वह एक पैर को मोड़कर आसानी से अभ्यास कर सकते है। जानते है Half Butterfly Pose कैसे किया जाता है।

Half Butterfly Pose: जानिए इसे करने की विधि और इसके फायदे

Half Butterfly Pose in Hindi

अर्ध तितली आसन को करने की विधि

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक समतल जमीन पर कोई मेट या दरी बिछा ले
  • फिर उस पर बैठ जाए और अपने पैरो को फैला ले।
  • ध्यान रहे की आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए।
  • सांसो को सामान्य तरीके से लेते रहे और कूल्हे के पास वाली बायीं जांघ के ऊपरी हिस्से पर अपने दायें पैर को रखे।
  • ध्यान रहे की इसमें आपके पैर का तलवा ऊपर की ओर होना चाहिए।
  • यदि ऐसा करने में कठिनाई आ रही है तो पैर को शरीर के पास जांघ के भीतरी हिस्से के साथ जमीन पर भी रख सकते है।
  • इसके बाद अपने बायें हाथ से दायें पैर की अंगुलियों को पकड़ ले।
  • फिर थोड़ा से दबाव के साथ ही घुटने को अपने दायें हाथ से ऊपर और नीचे की तरफ करे ऐसा 10 बार करना है।
  • इतना करने के बाद अपनी प्रारम्भिक मुद्रा में वापस आ सकते है।
  • इस तरह एक प्रक्रिया पूरी होती है।
  • इस अभ्यास को बाए पैर से भी करे।

अर्ध तितली आसन को करने के फायदे

  • अर्ध तितली आसन कूल्हों के अभ्यास से रक्त संचार में वृद्धि होती है।
  • ध्यान मुद्रा के लिए अर्ध तितली आसन बहुत ही लाभकारी होता है।
  • अर्ध तितली आसन को नियमित रूप से करने पर अंदरूनी कूल्हे की मांसपेशियों में खिचाव आता है।
  • जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उसमे खिचाव लाने के लिए भी यह आसन प्रतिदिन करना चाहिए।
  • इस आसन को करने से यह जिगर और गुर्दे को उत्तेजित करता है और पाचन में सहायता करता है।

अर्ध तितली आसन को करते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां

  • इस आसन का अभ्यास किसी प्रशिक्षक की उपस्थिति में करना चाहिए।
  • यदि घुटनों या कूल्हों में कोई चोट हो या फिर दर्द हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • टखनों के जोड़ों में यदि कोई परेशानी है तो भी अर्ध तितली आसन को करना नहीं चाहिए।

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