Karna Rogantak Pranayam: कान की बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक

प्राणायाम से मन और दिमाग की सफाई की जाती है। प्राणायाम से हमारी इन्द्रियों द्वारा उत्पन्न दोष दूर हो जाते है। तात्पर्य यह है की इसके अभ्यास से दिमाग और मन में आने वाले बुरे विचारों का अंत हो जाता है और मन मस्तिष्क पूरी तरह से किसी भी प्रकार के राग द्वेष से रहित हो कर स्वच्छ हो जाता है।

प्राणायाम करने से शरीर की असंख्य बीमारियों का नाश होता है और मन को शांति प्राप्त हो जाती है। यह हमारे शरीर के अंदर के प्राण स्टार को बढ़ाने का कार्य करता हैं । इन्हीं प्राणायामों में से एक होता है कर्ण रोगान्तक प्राणायाम । आज हम आपको इसी कर्ण रोगान्तक प्राणायाम के बारे में बताने जा रहे है।

क्या आप जानते है लगभग 37% लोगों को कान से संबंधित समस्याएं होती हैं। लेकिन वे खुद हीं अपनी उन समस्याओं से अवगत नहीं होते है और इसलिए, वे उन्हें ठीक करने के लिए कोई कदम भी नहीं उठाते हैं। कुछ लोगों को पता भी होता है तो इसे छोटी मोटी समस्या मान कर टाल देते हैं । पर ऐसा ना कर के इसे ठीक करने पर काम करना चाहिए और यह हम कर्ण रोगान्तक प्राणायाम के माध्यम से कर सकते हैं I

कान से संबंधित बीमारियाँ आंशिक बहरापन, कान का आंतरिक संक्रमण हो सकती हैंI बहरापन का इलाज करने के लिए वैसे तो बहुत ही प्रभावी तरीके उपलब्ध है। लेकिन आज हम आपको एक सरल तरीके Karna Rogantak Pranayam की जानकारी देने जा रहे है। यह कान की समस्याओं का इलाज करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

Karna Rogantak Pranayam: इसे कैसे करते है और इसके फायदे क्या है

Karna Rogantak Pranayam in Hindi

आज के समय में ध्वनि प्रदूषण बहुत बढ़ता जा रहा है, इस वजह से लोगो में कानों से संबंधित समस्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों के पास इसका इलाज करने के लिए दवाये भी मौजूद है किंतु लंबे समय तक इस तरह की दवाइयों का इस्तेमाल करना सही नहीं है, क्योंकि उसके भी दुष्प्रभाव सामने आ सकते है। इसीलिए इसके उपचार के लिए हमें योग और प्राणायाम का इस्तेमाल करना चाहिए । Yoga for Ear Problems बहुत हीं कारगर उपाय साबित होता है ।  इनके इस्तेमाल से शरीर पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है और समस्या धीरे धीरे खुद हीं खत्म हो जाती है ।

कर्ण रोगान्तक प्राणायाम कैसे करे

  • इस प्राणायाम के अभ्यास के लिए सबसे पहले आप ज़मीन पर एक चटाई या दरी बिछा के उस पर बैठ जाये।
  • इसके बाद अब अपने दोनों हाथों के अंगूठे को अपने हाथों की पहली उंगलियों से स्पर्श करे और इसी अवस्था में अपने हांथो को घुटनो पर रख दें।
  • अब धीरे धीरे अपनी आँखे बंद करे, इस दौरान इस बात का ध्यान रखें की इस पूरी प्रक्रिया को करते समय अपने चेहरे के ऊपर किसी प्रकार का तनाव नहीं आने पाए।
  • इसके बाद अपनी साँस को अंदर की तरफ भरें और दाएं हाथ के अंगूठे से अपनी नाक को बंद कर दें और मुंह को भी बंद रखे।
  • अब इसके बाद अपने बंद मुंह के माध्यम से अंदर भरी गई हवा को धीरे धीरे बाहर की तरफ निकालने का प्रयास करें, ये सब कुछ इस प्रकार करें जैसे कि आप अपने कानों के माध्यम से हवा को धक्का देने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इस प्राणायाम का अभ्यास ईयर ड्रम्पस पर उचित रूप से दबाव डालेगा और कान के अंदर से लंबे समय से एकत्र की गई अशुद्ध मैल को कान के द्वार के माध्यम से बाहर की तरफ निकाल देता है।
  • इस पूरे प्राणायाम के अभ्यास को लगभग 4 से 5 बार तक जरूर दोहराएं।
  • प्राणायाम के अभ्यास के बाद फिर एक सामान्य तरीके से अपने नाक के माध्यम से साँस को बाहर निकाले, लेकिन यह क्रिया बहुत धीरे धीरे करे।
  • हर रोज लगभग 5 से 7 मिनट तक के समय के भीतर इस पूरे प्राणायाम अभ्यास को 2 से 3 गुणा ज्यादा करने का प्रयास करें।

कर्ण रोगान्तक प्राणायाम फायदे

  • कर्ण रोगान्तक प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कान से संबंधित बीमारियों से मुक्ति मिल जाती है।
  • इस प्राणायाम को करने से कान की नसो में रक्त संचार एवं श्रवण इन्द्रीयां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैI
  • इस कर्ण रोगान्तक प्राणायाम का अभ्यास हर रोज करने से यह बहरेपन की समस्या का भी इलाज करने में बहुत हद तक सहायक हो जाती है।
  • कर्ण रोगान्तक प्राणायाम कान के सभी रोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है साथ हीं साथ  इसके ध्यान से मन एकाग्र हो जाता है।
  • जो बच्चे मन लगा कर पढ़ते नहीं हैं उन बच्चों का पढ़ाई में मन लगने लगता है।
  • डिप्रेशन, सिरदर्द, माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी यह बहुत ज्यादा लाभप्रद साबित होता है।

ये सावधानी जरूर बरतें

  • कान से होने वाले रिसाव से पीड़ित लोग, लाल आँखों की परेशानी से पीड़ित लोग, और जो एक वर्ष में कान और आँख के ऑपरेशन से गुज़र चुके हैं उन्हें इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • यह प्राणायाम करने का सबसे सही समय सुबह का समय होता है जब लोगों का पेट आम तौर पर खाली होता है और आंतें साफ़ होती हैं ।
  • अगर सुबह के समय में आप ये प्राणायाम ना कर पायें तो फिर इसे शाम के समय में भी कर सकते हैं, पर सुबह के समय में यह ज्यादा लाभकारी होता है ।
  • कोशिश करें की इस प्राणायाम का अभ्यास दोपहर के वक़्त या फिर रात के वक़्त ना करें । कुछ लोगों में हो सकता है की ऐसा करने से समस्याएं बढ़ जाएँ ।

आज के लेख में आपने कर्ण रोगान्तक प्राणायाम के बारे में पढ़ा और जाना इस प्राणायाम के अभ्यास से आपको किस प्रकार के लाभ मिल सकते हैं साथ हीं आपने इस प्राणायाम को करने की विधि भी जानी । आप भी इस प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास कर के अपनी कान से जुड़ी सारी समस्याओं से निजात पा सकती हैं । तो देर की बात की आज से हीं इस प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से आरम्भ कर दें और इसके लाभों का फायदा उठायें ।

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