कमर, गर्दन और शरीर की जकड़न दूर करने में सहायक कटिचक्रासन

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यह तो सभी जानते है की हमारे देश में लोग अलग-अलग प्रकार के खाने के लिए फेमस है| यहाँ चटपटा, मीठा तीखा, खट्टा कई तरह के भोज्य पदार्थो का लोग सेवन करते है जिस वजह से अनेक प्रकार की बिमारिओ जैसे कब्ज, अजीर्ण, मधुमेह आदि से परेशान भी हो जाते है|

कब्ज़ पेट से जुड़ी एक ऐसी समस्या हैं जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को मल त्याग करने में परेशानी होती है। हमेशा लोग कब्ज के बारे में बात खुलकर नहीं करते हैं। शरीर में पानी की कमी, पोषण की कमी, व्यायाम ना करना और खराब जीवनशैली की वजह से लोगों को यह समस्या झेलनी पड़ जाती है। यह समस्या किसी भी उम्र के इंसान को हो सकती है। कब्ज़ का आपके पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसके लिए आपको अपने आहार में अधिक से अधिक फाइबर शामिल करनी चाहिए।

इसके अलावा वर्तमान समय में हर उम्र वाले लोगों में मधुमेह के रोगी देखे जा सकते हैं। यह एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार इंसान को लग जाए तो उसे जिंदगी भर दवाईयां खानी पड़ती है। अगर आप भी इस प्रकार के किसी भी रोग से पीड़ित है तो घबराये नहीं बल्कि योग का सहारा लें| आज हम आपको इनसे बचने के लिए Kati Chakrasana in Hindi की सम्पूर्ण जानकारी दे रहे है|

Kati Chakrasana in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Kati Chakrasana in Hindi

कटि का अर्थ कमर अर्थात कमर का चक्रासन। उक्त आसन में दोनों भुजाओं, गर्दन तथा कमर का व्यायाम होता है इसीलिए इसे कटि चक्रासन कहा जाता हैं। इस आसन को ओर भी कई नाम से जाना जाता हैं। यह आसन दो प्रकार से किया जा सकता है आज हम आपको इसे करने की दोनों विधिया बता रहे है। आइये जानते है Kati Chakrasana Steps

पहली विधि

कटिचक्रासन का अभ्यास करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं तथा दोनों पैरों के बीच डेढ़ से दो फुट की दूरी रखें। अब कंधों की सीध में दोनों हाथों को फैलाएं। इसके बाद बाएं हाथ को दाएं कंधे पर रखें और दाएं हाथ को पीछे से बाईं ओर लाकर शरीर से चिपका लें। सांस क्रिया सामान्य रूप से करते हुए मुंह को घुमाकर बाएं कंधों की सीध में ले आएं। इस स्थिति में कुछ समय तक खड़े रहें और फिर दाईं तरफ से भी इस क्रिया को इसी प्रकार से करें। इस क्रिया को दोनों हाथों से 5-5 बार करें। इसे करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें| कमर को घुमाते समय घुटने ना मोड़े तथा पैर भी अपने स्थान पर ही रखे हिलाये नहीं |

दूसरी विधि

इसके लिए पैरों के बीच 1 फुट की दूरी रखकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को कंधों की सीध में सामने की ओर करें तथा दोनों हथेलियों को आमने-सामने रखें। अब सांस सामान्य रूप से लेकर हाथों को धीरे-धीरे घुमाकर दाईं बगल में कंधे की सीध में ले आएं। अब शरीर को भी धीरे-धीरे घुमाते हुए मुंह को बाईं ओर कंधे के सामने लाएं। इस स्थिति में दाएं हाथ को कंधे की सीध में रखें तथा बाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर छाती से थोड़े आगे करके रखें। इस तरह इस क्रिया को दूसरी तरफ से भी करें।

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कटिचक्रासन के लाभ

  1. कटिचक्रासन कमर, गर्दन और पीठ की जकड़न दूर करता है. नियमित अभ्यास से रीढ की लचक बढती है| पूरे शरीर में हल्कापन महसूस होता है|
  2. शारीरिक और मानसिक तनाव दूर करने में कटिचक्रासन की महत्वपूर्ण भूमिका है. दिन में किसी भी समय इसका अभ्यास किया जा सकता है. लेकिन पेट खाली होना चाहिए|
  3. कटिचक्रासन रीढ से संबंधित समस्याओं को दूर करता है| यह शरीर की नाड़ियों में प्राणशक्ति को निरंतर प्रवाहित करने में मदद करता है|

सावधानियाँ

  1. कटिचक्रासन करते हुए पैरों के तलवे ज़मीन से उठना नहीं चाहिए| केवल कमर से ऊपर के भाग को बाईं और दाईं ओर मोड़ना है|
  2. बिना रुके तेज़ गति से इसे पाँच से दस बार दोहराएँ| किसी प्रकार का झटका नहीं दें|

योगासन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों को स्वस्थ तथा आकर्षक बनाया जा सकता है| आज हमने आपको Kati Chakrasana in Hindi की विधि और विशेषताओं के बारे में जानकारी दी है अब आप भी इन्हे अपनाये और शरीर के दर्द से मुक्ति पाएं|

 

 

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