कुंडलिनी योग – जाने इससे मिलने वाले लाभ और अभ्यास के तरीके

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कुंडलिनी योग एक बेहद महत्वपूर्ण योग प्रकिया है| इस योग के जरिये व्यक्ति अपने अंदर की कुंडलिनी शक्ति को जगाकर परमशक्ति को प्राप्त कर सकता है। इस योग को लय योग के नाम से भी जाना जाता है| मन का विलीन होना या फिर मन की निरूद्ध अवस्था यह सारी स्तिथि लययोग के अन्तर्गत आती है।

“कुंडलिनी” हमारी प्राण शक्ति का केंद्र है| अगर अंग्रेजी भाषा की बात की जाये तो इसे “सरपेंट पावर” के नाम से भी जाना जाता है| माना जाता है की कुंडलिनी शक्ति सुषुम्ना नाड़ी में नाभि के निचले हिस्से में सोई हुई अवस्था में रहती है। लेकिन साइंस इन् बातो को मानने से इंकार करता है| लेकिन कुंडलिनी योग से मिलने वाले फायदों को देखते हुए लोग इसे करने से पीछे नहीं हटते|

हमारे शरीर में सात चक्र उपस्थित होते हैं| उनके नाम इस अनुसार है:- मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार। कुंडलिनी योग के द्वारा इन् 7 चक्रों को जगाया जाता है, जिसके फलस्वरूप मनुष्य को शक्ति और सिद्धि का ज्ञान प्राप्त होता है।

कुंडलिनी योग को करने से मनुष्य को सुख की प्राप्ति होती है और दुःख और चिंता के विकार उसके अंदर से खत्म होते है| इस लेख में हम आपको Kundalini Yoga in Hindi, इसे करने की विधि और लाभो के बारे में बताएंगे ताकि आप इस योग को अपनाकर अपनी अंदर की चिन्ताओ और दुखो को दूर कर सके|

Kundalini Yoga in Hindi – कुंडलिनी योग अभ्यास कैसे करें

Kundalini Yoga in Hindi

विभिन्न कुंडलिनी योग हमारे अंदर की ऊर्जा को जगाने, और बाहर निकालने के लिए होते है| लेकिन इसके लिए आपको विभिन्न सांस लेने के व्यायाम, शारीरिक व्यायाम, Kundalini Yoga Mantras का जप और ध्यान लगाने की क्रिया को करना पड़ता है, जिसकी मदद से आप अपने अंदर की शक्ति याने की उन् ७ चक्रो को जगा सके|

कुंडलिनी को हम जब ध्यान के द्वारा जागृत करते है तो यह यही शक्ति जागृत होकर हमारे शरीर के सभी चक्रों को क्रियाशील करने का काम करती है| योग अभ्यास से ही सुप्त कुंडलिनी को जाग्रत किया जा सकता है| कुंडलिनी ही जाग्रत होने के बाद हमारे शरीर, यहाँ तक की विचारो को प्रभावित करती है। यह हमारे नकारात्मक विचारो को सकारात्मक करती है|

कुंडलिनी योग अभ्यास करने का तरीका:-

कुंडलिनी योग को करने के लिए सबसे पहले साधक को अपने मन और शरीर को पवित्र करना होगा| मन को पवित्र करने के लिए बुरा न सोचे, सत्य बोले और और सबके प्रति अपना व्यवहार अच्छा करे| शरीर को पवित्र करने के लिए सादा भोजन ग्रहण करे तथा उपवास रखे|

इस योग में अपनी दिनचर्या में सुधार लाना भी जरुरी है| इसके लिए आपको प्रातः काल जल्दी उठना और रात में जल्दी सोने की आदत डालना पड़ेगी। इसके अतिरिक्त रोज सुबह और शाम को नियमित रूप से प्राणायाम, धारणा और ध्यान का अभ्यास करना होगा|

कुंडलिनी को जागृत करने के लिए  कुंडलिनी प्राणायाम बेहद प्रभावशाली माने जाते है| यदि अपने मन और मस्तिष्क को नियंत्रण में रखकर Kundalini Yoga Practice नियमित रूप से किया जाये तो 6 महीने से लेकर 1 साल के अंतगर्त कुंडलिनी जागरण होने लगती है। लेकिन इसका सही तरह से किया जाना जरुरी है, इसलिए यह योग्य गुरु के सानिध्य में ही किया जाना चाहिए| कुंडलिनी योगा का अभ्यास कम से कम एक घंटे करना चाहिए।

Kundalini Yoga Benefits – कुंडलिनी योग के लाभ

कुंडलिनी योग से मिलने वाली सिद्धियों की कोई सीमा नहीं होती। इसमें मनुष्य अपने अंदर की सकारात्मक शक्ति को जगाकर दुख दर्द-दूर करने में सक्षम होता है। इस योग को नियमित रूप से करने पर कई फायदे मिलते है|

  1. इससे रोग प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है|
  2. इससे रक्त शुद्ध होता है|
  3. यह तनाव और अवसाद को दुर करने में मदद करता है|
  4. ये पौरूष और यौन स्वास्थ्य का विकास करता है|
  5. जो लोग वजन घटना चाहते है उनके लिए भी यह फायदेमंद योग है|
  6. यह मन, शरीर और आत्मा को एक रेखा में लाता है|
  7. यह पैर, छाती, हाथ, पेट, कूल्हों और कंधों को टोन करने में मदद करता है|
  8. कुंडलिनी योग धूम्रपान और शराब की लत को छुडाने में प्रभावशाली है|
  9. कुंडलिनी के 7 चक्रों का जागरण होने से मनुष्य को शक्ति और सिद्धि का ज्ञान प्राप्त होता है|
  10. यह योग ज्ञानेन्द्रियों को मजबूत बनाता है, फलस्वरूप देखने, सूंघने, महसूस करने और स्वाद लेने की क्षमता बढ़ती है।
  11. कुंडलिनी योग मनुष्य के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है| इस योग से आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है|

कुंडलिनी योग सबसे शक्तिशाली योग है, और इसे सारे योग शैलियों की मां(मदर) भी कहा जाता है| कुंडलिनी योगा के द्वारा शरीर की कुंडलिनी शक्ति को जगाया जा सकता है। Kundalini Yoga in Hindi वास्तव में आध्यात्मिक योग है। कुण्डलिनी शक्ति को जगाने के लिए इसकी मुद्राएं अपना खास स्थान रखती है। यदि इन् मुद्राओं को सही तरह से नहीं किया जाये तो कुण्डलिनी शक्ति को जगाना मुश्किल है| इसे करके हर कोई इस से लाभ पा सकता है| इसे करने के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है, हर उम्र के व्यक्ति इससे कर सकते है|

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