Kurmasana Yoga: मधुमेह और पेट के रोगो को दूर करने में मददगार

कुर्मासन संस्कृत शब्द कुर्म से बना  है जिसका अर्थ होता है कछुआ। इसी कारण इसे कछुआ योग भी कहा जाता है। इस आसन द्वारा मनुष्य स्वयं को मानसिक परेशानियों से ठीक उसी प्रकार दूर करता है जिस प्रकार एक कछुआ संकट आने पर खुद को अपने कवच में छुपा लेता है।

कुर्मासन को नियमित रूप से करने पर पीठ मजबूत बनती है। यदि आपको मधुमेह की बीमारी है और लंबे समय से कंट्रोल नहीं हो रही है तो नियमित रूप से कुर्मासन करने से लाभ मिलता है।

इस आसन को करने से मन शांत होता है साथ ही शरीर में लचीलापन आता है। कुर्मासन से हमारे शरीर का सारा सिस्टम सही ढंग से कार्य करता है।

पेट से जुड़ी हुई बीमारियों को दूर करने के लिए कुर्मासन करना चाहिए। यह आसन कूल्हों की जकड़न को कम करता है और उसकी गतिशीलता को बढ़ाता है। कुर्मासन नाभि को केंद्र में रखने के लिए अहम भूमिका का निवाह करता है। आइये आज के लेख में Kurmasana Yoga के बारे में विस्तारपूर्वक जानते है|

Kurmasana Yoga: जानिए इसे कैसे करते है और इसके फायदेKurmasana Yoga

कुर्मासन योग की विधि:

  • सबसे पहले आप एक आसन पर बैठ जाए।
  • इसके बाद अपने दोनों पैरों को अपने अनुसार फैला ले।
  • फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।
  • इसके बाद हाथों को पैरों के नीचे ले जाते हुए हाथ को पैरों के 90 डिग्री पर रखें या हाथों से पैरों को पकड़ लें।
  • आगे की ओर झुकें अपनी कमर से रीढ़ की हड्डी को खीचने का प्रयास करें और जमीन पर माथा लगाने की कोशिश करें।
  • इस स्थिति में धीरे धीरे सांस लें और फिर धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इसके बाद सांस लेते हुए आरंभिक अवस्था में वापस आएं।
  • इस तरह आपका एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 3 से 5 चक्र को करें।

कुर्मासन से मिलने वाले लाभ

  1. कुर्मासन एकाग्रता बढ़ाने में भी मददगार है|
  2. यह आसन नृत्य कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण योगाभ्यास होता है।
  3. कुर्मासन पेट की चर्बी को कम करने में भी बहुत फायदेमंद होता है।
  4. जिन लोगों के हाथ पैर कमज़ोर हैं या फिर सही से काम नहीं करते उन लोगों को इस आसन को करने से ताकत मिलती है।
  5. यह आसन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट की कब्ज को कम करने में सहायता मिलती है।
  6. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से हर्निया जैसी समस्या हमेशा के लिए ख़त्म हो जाती है।
  7. यदि घुटनों में दर्द हो रहा है तो यह एक उपयुक्त योगाभ्यास है। घुटने के अलावा यह कूल्हों, पीठ एवं टाँगों की मांसपेशियों को फैलाता है और इसको स्वस्थ बनाये रखता है।

सावधानिया

  • जिनको कमरदर्द की परेशानी होती है उनको यह योग नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन को वह लोग न करे जिन्हे रीढ़ की हड्डी में दर्द हो।
  • जिन लोगो को कंधे, कूल्हों और कोहनी की समस्यायें हों वो इस आसन का अभ्यास न करें।

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