Markatasana (Monkey Pose): कमर दर्द और पेट संबंधी रोगों में लाभकारी

मर्कटासन को अंग्रेजी में मंकी पोज़ कहा जाता है। मर्कटासन, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाने के लिए एक उत्कृष्ट मुद्रा है और यह पाचन तंत्र के अंगों को भी लाभ प्रदान करती है।

मर्कटासन लेट कर किये जाने वाले आसनो में से एक होता है। मर्कटासन शरीर के साथ साथ दिमाग को आराम पहुंचाने के लिए बहुत प्रभावी होता है।

यह विशेष रूप से पीठ दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, कटिस्नायुशूल में उपयोगी होता है। यदि इसे नियमित रूप से किया जाए तो यह पीठ दर्द और पेचिश में भी फ़ायदेमंद होता है। कूल्हों और जोड़ों में दर्द के लिए भी मर्कटासन उत्तम आसन होता है।

मधुमेह रोगियों के लिए भी मर्कटासन बहुत लाभकारी होता है । यदि यह इतना फ़ायदेमंद है तो चलिए जानते है Markatasana को करने की विधि और सावधानियों के बारे में।

Markatasana in Hindi: मर्कटासन कैसे करे व उसके फायदे क्या है?

Markatasana in Hindi

Monkey Pose Steps: मर्कटासन को करने की विधि

  • इस योगासन को करने के लिए एक मेट पर सीधे लेट जाए।
  • इसके बाद दोनों हाथों को कन्धों के समानान्तर फैलाए।
  • ध्यान रहे की आपकी हथेलियाँ आकाश की तरह खुली हों।
  • अब दायें पैर को 10 डिग्री उठाकर धीरे-धीरे बाएं हाथ के पास ले जाये।
  • साथ ही गर्दन को दाई ओर मोड़कर रखे।
  • कुछ समय तक इस स्थिति में रहे उसके बाद पैर को 90 डिग्री पर सीधे उठाकर धीरे-धीरे भूमि पर टिका दें।
  • इसके बाद दोनों पैरों को एक साथ ९० डिग्री पर उठाकर बाई ओर हाथ के पास रखें।
  • गर्दन को विपरीत दिशा में मोड़ते हुए दाए ओर देखें और कुछ समय पैरों को सीधा रखे।
  • इसी तरह दोनों पैरों को उठा कर दाई ओर हाथ के पास रखें।
  • गर्दन को बाई ओर मोड़ते हुए बाई तरफ देखें।
  • इस क्रिया को 3 से 5 बार करें।
  • इसी प्रकार बायीं ओर से भी करे।

Monkey Pose Benefits: मर्कटासन को करने के फायदे

  • इसे करने से रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ जाता है।
  • मर्कटासन, पसलियों और फेफड़ों के लिए अच्छा व्यायाम होता है।
  • यह कब्ज और पेट से संबंधित समस्याओं में सबसे ज्यादा लाभकारी होता है।
  • इस आसन को नियमित रूप से करने पर कब्ज और गैस ठीक हो जाती है।
  • मर्कटासन के द्वारा आत्म-ज्ञान बढ़ता है और रचनात्मकता में भी वृद्धि होती है साथ ही इससे एकाग्रता भी बढ़ती है।

मर्कटासन को करते समय ध्यान रखने योग्य बाते

  • यदि किसी व्यक्ति के पैरो और घुटनों में दर्द है तो इस आसन को न करे।
  • जो लोग गंभीर पीठ दर्द से ग्रस्त हैं वे इस आसन को ना करे
  • जो लोग हर्निया से पीड़ित हैं उन्हें चिकित्सक के निर्देश अनुसार ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

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