भ्रमचर्य बनाए रखने और कामोत्तेजना को नियंत्रित करने की क्रिया मूल बंध

योगासन के सम्बन्ध में हमने आपको अनेक जानकारिया प्रदान की है तथा कई प्रकार के प्राणायाम और ध्यान क्रियाओं के बारे में भी हमने आपको बताया है| लेकिन आज हम आपको बंध के बारे में नयी और रोचक जानकरी देने वाले है| जिसके बारे में निश्चित ही आपने कभी नहीं सुना होगा और न ही इसकी विधि भी आप जानते होंगे|

जैसा की इसके नाम से ही हमे समझ आता है बंध अर्थात बांधना, कसना या रोक देना| अगर हम योग में बंध की बात करें तो यह शरीर के कुछ हिस्सों को रोककर, उसे अन्य अंगो में प्रवाहित या संचित करने का काम करता है| यह एक सामान्य क्रिया नहीं है| इस क्रिया के अभ्यास से ऋषि-मुनि और साधु-संत अपने प्राणो को नियंत्रित करके सफलता पूर्वं कुंडलिनी को जागृत कर लेते थे|

योग में मूलत: पांच प्रकार के बंध है| आज हम इसके प्रथम बांध मूलबंध के बारे में जानकारी देने वाले है| प्राणायाम करते समय गुदा के छिद्रों को सिकोड़कर ऊपर की ओर खींचे रखना मूल-बंध कहलाता है| योग में मूलबंध के अनेक लाभ बताए गए हैं| इस मुद्रा को करने से शरीर के अंदर जमा कब्ज का रोग समाप्त हो जाता है और भूख भी तेज हो जाती है| शरीर का भारीपन समाप्त होता है और सुस्ती से मुक्ति मिलती है|

Mula bandha in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

mula bandha in hindi

प्रथम विधि

इस क्रिया को करने में कई प्रकार के आसन काम में लाये जा सकते हैं| पालती मारकर एक पैर के ऊपर दूसरा रखना और इसके ऊपर स्वयं बैठकर जननेन्द्रिय मूल पर हलका दबाव डालना|

द्वितीय विधि

दूसरा आसन यह है कि एक पैर को आगे की ओर लम्बा कर दिया जाय और दूसरे पैर को मोड़कर उसकी ऐडी का दबाव मल-मूत्र मार्ग के मध्यवर्ती भाग पर पड़ने दिया जाय| इसमें ध्यान रखने वाली बात यह है कि दबाव हल्का हो, क्योंकि अधिक दबाव डालने पर उस स्थान की नसों को क्षति पहुँच सकती है|

संकल्प शक्ति के सहारे गुदा द्वार को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींचा जाये और फिर धीरे-धीरे ही उसे छोड़ा दिया जाये| गुदा संकोचन के साथ-साथ मूत्र नाड़ियाँ भी स्वभावतः सिकुड़ती और ऊपर खिंचती हैं| उसके साथ ही साँस को भी ऊपर खींचना पड़ता है|

प्रारम्भ में इस क्रिया को 10 बार करना चाहिये| इसके बाद हर सप्ताह एक के क्रम को बढ़ाते हुए 25 तक पहुँचाया जा सकता है| इस क्रिया को अश्विनी मुद्रा या बज्रोली क्रिया के नाम से भी जाना जाता है| इसे करते समय मन में भावना यह रहनी चाहिये कि कामोत्तेजन का केन्द्र मेरुदण्ड मार्ग से खिसक कर मेरुदण्ड मार्ग से ऊपर की तरफ जा रहा है और मस्तिष्क मध्य भाग में स्थित सहस्रार चक्र पर पहुँच रहा है| यह क्रिया कामुकता पर नियन्त्रण करने और कुण्डलिनी उत्थान का प्रयोजन पूरा करने में सहायक होती है| इसे मूल (जड़) इसलिए कहा जाता है, क्योकि यह मानवी काया के मूल बांध देता है|

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Mula Bandha Benefits: मूलबंध के लाभ

योग, ध्यान, प्राणायाम और क्रियाएं सभी मनुष्य शरीर की रक्षा, स्वास्थ्य और अध्यात्म के समावेश से मिलकर बने है, ताकि मनुष्य इन्हे कर हर प्रकार का सुख प्राप्त का सके| आइये जानते है Mula Bandha Benefits

  1. इससे यौन ग्रंथियाँ पुष्ट होकर यौन रोग में लाभ मिलता है|
  2. इस मुद्रा को करने से शरीर के अंदर से कब्ज की समस्या समाप्त हो जाती है और भूख भी अधिक लगती है|
  3. शरीर का भारीपन समाप्त होता है और सुस्ती मिटती है तथा इस बंध को करने से बवासीर रोग भी समाप्त हो जाता है|
  4. पुरुषों के धातुरोग और स्त्रियों के मासिकधर्म सम्बंधी रोगों में भी यह मुद्रा बहुत ही लाभकारी मानी गई है|
  5. जिन लोगों को हर्निया की शिकायत होती है उनके लिए ये क्रिया बहुत लाभकारी होती है|

सावधानी

किसी भी प्रकार का यौन और उदर रोग होने की स्थिति में इस मूलबंध का अभ्यास जानकार योगाचार्य से परामर्श लेकर ही करना चाहिए|

आज हमने आपको Mula Bandha in Hindi, के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी दी है जो सच में आपके लिए नई और लाभकारी सभीत होंगी|

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