शारीरिक दर्द को हमेशा के लिए समाप्त करे नौली क्रिया

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शरीर को शुद्ध और स्वस्थ रखे के लिए छः प्रकार की क्रियाएं विशेष रूप से की जाती है| इन् क्रियो को षट्कर्म कहा जाता है| शारीरिक शुद्धि के बिना आसन और प्राणायाम का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं किया जा सकता है| शरीर हमारी आत्मा का घर है| प्राणों की क्रियाएं संतुलित और समतापूर्ण हो इसके लिए इसकी कभी-कभी सफाई करते रहने की आवश्यकता होती है|

षट्कर्म का अभ्यास नियमित नहीं किया जाना चाहिए । जब व्यक्ति अपने शरीर में कफ, पित्त और वायु की अधिकता अनुभव करे तो इसका प्रयोग करना चाहिए| इन् षट्कर्म क्रियाओं को करने के लिए शारीरिक और मानसिक शुद्धता प्राप्त होती है| द्वेष, अलंकार, काम, क्रोध, लोभ इत्यादि आंतरिक अशुद्धियाँ है| लेकिन केवल वाह्म शुद्धता ही नहीं है|

इस प्रकार ध्यान और क्रियाओं से सम्पूर्ण शारीर में प्राणो का प्रवाह बिना किसी रूकावट के होता है| यह ह्रदय की अनेक बीमारियों को दूर करते है| इससे सर दर्द, स्नायुओं की दुर्बलता समाप्त होती है| मानसिक शांति से शरीर में प्रचुर मात्रा में शक्ति आती है| आज हम आपको षट्कर्म की एक क्रिया Nauli Kriya in Hindi, के बारे में जानकारी देने वाले है|

Nauli Kriya in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ 

Nauli Kriya in Hindi

पेट को हिलाने की क्रिया को न्यौली क्रिया या नौली क्रिया कहा जाता है| यह क्रियाओं में सर्वश्रेष्ठ है और पेट के लिए यह बहुत ही अच्छा व्यायाम है| इसे नौली इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे करते समय पेट में नली जैसा आकर बनता है| यह भूक को बढता है| साथ ही यह यकृत, तिल्ली और पेट से सम्बंधित बीमारियों से मुक्ति मिलती है| इसके अभ्यास से अच्छे स्वास्थ्य  की प्राप्ति होती है|

नौली क्रिया करने की विधि 

इस क्रिया को करने के लिए पद्मासन की स्थिति में बैठकर, दोनों हाथों से दोनों घुटनों को दबाकर रखते हुए शरीर को सीधा रखते है। इसके बाद साँस को   बाहर निकालकर पेट की माँसपेशियों को ढीला रखते हुए अंदर की ओर खींचे। अब स्नायुओं को ढीला रखते हुए पेट में दायीं-बायीं ओर घुमाएँ। इससे पेट में किसी प्रकार की गंदगी नहीं रह पाती और अपानवायु वश में आ जाती है।

नौली क्रिया को अन्य विधि द्वारा भी किया जा सकता है|

उड्डीयान बंध – मुँह से हवा को बल पूर्वक बाहर निकालकर नाभी को अंदर खींचना उड्डीयान बंध कहलाता है।

वामननौली – जब उड्डीयान बंध पूरी तरह लग जाए तो माँसपेशियों को पेट के बीच में छोड़े। पेट की ये माँसपेशियाँ एक लम्बी नली की तरह दिखाई पड़ेगी। इन्हें बायीं तरफ ले जाएँ।

दक्षिण नौली – इसके पश्चात इसे दाहिनी ओर ले जाएँ।

मध्यमा नौली – इसे मध्य में रखें और तेजी से दाहिने से बाएँ और बाएँ से दाहिनी ओर ले जाकर माँसपेशियों का मंथन करें। इसे तब तक करें जब तक आप इसे आसानी से कर सके|

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नौली क्रिया के लाभ

आइये जानते है Nauli Kriya Benefits

  1. इस क्रिया का नियमित अभ्यास करने से गर्मी संबंधी सभी रोग, वायु विकार तथा सभी प्रकार के शारीरिक दर्द आदि से मुक्ति मिल जाती है, जो फिर कभी नहीं होते है।
  2. यह पेट के लिए एक बहुत ही अच्छा व्यायाम है| इसके नियमित अभ्यास से भूख बढ़ती है।
  3. यह यकृत, तिल्ली और पेट से संबंधित अनेक बीमारियों से मुक्ति दिलाता है। इसके अभ्यास से बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

आज हमे आपको Nauli Kriya in Hindi, से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की है| जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी साबित होगी, साथ ही यह आपको शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त और मजबूत बनाएगी| इसके नियमित अभ्यास से आप बड़ी से बड़ी बीमारी से बच तो सकते है ही साथ ही अगर आप किसी शारीरिक दर्द से परेशान है तो यह क्रिया दर्द में आराम दिलाने में आपकी मदद भी करेगा|

जैसा की हम आपको हमेशा ही बताते है, किसी भी योग, प्राणायाम या क्रिया को करने से पहले किसी योग्य योग शिक्षक के सानिध्य में प्रशिक्षण लेकर ही इन्हे करना चाहिए, क्योकि आपकी थोड़ी से गलती आपको बड़ी परेशानी में डाल सकती है| इसलिए आपसे निवेदन है पहले इसका अच्छी तरह प्रशिक्षण ले उसके बाद ही इसे घर पर करने के प्रयास करना चाहिए|

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