ओंकार प्राणायाम: मानसिक शांति पाने और चैतन्य से परिपूर्ण होने में मदद करे

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ॐ का ध्यान और जाप करने से मानसिक शान्ति मिलती है, मन में एकाग्रता आती है तथा लगातार अभ्यास करने से हम अपनी आत्मा के स्वरूप को पहचान कर खुद को अपने ईष्ट देव के नज़दीक महसूस कर सकते हैंI

योगाभ्यास में ॐ के उच्चारण का बहुत ही महत्व है| हर प्राणायाम के बाद ॐ का उच्चारण करना चाहिए|  इस प्राणायाम का लाभ उनको ही मिलता है जो खुद ही इसका अनुभव कर लेता है। इसे ओमकार साधना, प्रणव साधना और  प्रणवोच्चार भी कहते है।

ॐ शब्द 3½  मात्रा का एकाक्षर है। ओमकार आपकी भावनाओ को कण्ट्रोल करने की कला है ओमकार आपको शारीरिक, मानसिक,भावनात्मक रूप से आराम देता है।

ॐ के उच्चारण से जो सकारात्मक ऊर्जा निकलती है वह आपके आसपास के वातावरण को अच्छा और शांतिपूर्ण तथा आनंदमयी बना देती है। इस प्राणायाम के द्वारा मन के मोह, अहंकार और मल को दूर करने में सहायता मिलती है। इस Omkar Pranayam को साधक जितना चाहे उतना कर सकता है|

Omkar Pranayam: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करे

Omkar Pranayam

ओंकार प्राणायाम कैसे करे

  • इसे करने के लिए एकांत स्थान चुन ले। ध्यान रहे की स्थान का बार बार बदल ना करे|
  • सुखासन और पद्मासन की स्थिति में बैठ जाए। ध्यान रहे की सर, पीठ, गर्दन और कमर सीधी रेखा में रहे।
  • शांति से आँखे बंद करे और ध्यान करे की सारी इन्द्रियां अपने स्थान पर सजग है|
  • 2 से 3 बार लम्बी सांसे ले और सांसो को तेजी से छोड़ दे। इस क्रिया को दीर्घ श्वसन कहते है।
  • ऐसे ही 3 से 4 बार दीर्घ श्वसन करने के उपरान्त जितना हो सके लंबी साँस ले।
  • साँस को बिना रोके, मुँह खोलकर कंठ से स्पंदन हो, इस तरह ओंकार का उच्चारण करे।
  • इस ओंकार के उच्चारण की अनुभूति खुद ही करे।
  • आरम्भ के समय में बराबर और दीर्घ उच्चारण अच्छे से नहीं हो पाता है। परन्तु धीरे धीरे अभ्यास के साथ आप इसका उच्चारण करने लगेंगे।
  • ओंकार का उच्चारण करने से एक प्रकार का दीर्घ कंपन पैदा होता है|
  • जिसका अनुभव मुख, गुहा, नाभि चक्र, कान के पास से होकर पुरे शरीर में होता है|

ओंकार प्राणायाम के लाभ

  1. इस प्राणायाम को करने से शरीर के अंतरीर इन्द्रियों की सफाई होती है जिससे चेतना की जाग्रति होती है।
  2. प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर सुन्दर, स्वस्थ और सुन्दर बनता है|
  3. यदि आप इस प्राणायाम को नियमित रूप से करते है तो साँस सम्बन्धी विकार दूर हो जाते है।
  4. ओंकार प्राणायाम से रक्त की शुद्धि होती है ह्रदय को आराम प्राप्त होता है|
  5. इस प्राणायाम को नियमित करने से पाचन तंत्र और उत्सर्जन तंत्र अच्छा रहता है।
  6. इस प्राणायाम से मन शांत और प्रसन्न रहता है। मन की आकलन शक्ति में बृद्धि होती है।
  7. ओमकार प्राणायाम करने से बुद्धि तीव्र, स्मरण शक्ति में वृद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।
  8. यह प्रतिदिन के दैनिक क्रिया कलाप में आने वाले तनाव, अशांति और उदासी को दूर करता है।

सावधानी

इस प्राणायाम को बहुत ही आराम और शांति पूर्ण तरीके से करना चाहिए, इसे तनाव लेकर और झटके से ना करे।  और यदि आपको फीवर हो तो तबियत ठीक होने के बाद ही इसे करे|

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