Pendant Pose: कलाई, कंधों और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाये

लोलासन को अंग्रेजी में पेंडेंट पोज़ कहा जाता है। यदि आप अपनी बाजुओं को मज़बूत और टोन करना चाहते हैं तो लोलासन का अभ्यास बहुत ही फ़ायदेमंद होता है।

लोलासन में शरीर की स्थिति पेंडुलम के सामान होती है। आपको इस आसन के द्वारा झूला झूलते हुए शरीर के निचले भाग को झुलाना पड़ता है।

लोलासन कलाई, कंधों और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है। एकाग्रता में सुधार करने के लिए यह आसन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह दर्द को रोकने और राहत देने के लिए भी अच्छा होता है। यदि किसी को धातु रोग की समस्या होती है। तो वह भी इस आसन से दूर हो जाती है।

शरीर को संतुलित करने के लिए इस आसन को प्रतिदिन करना चाहिए। जिन लोगो का शरीर ढीला होता है उनके लिए यह आसन लाभकारी होता है। जानते है Pendant Pose के बारे में।

Pendant Pose in Hindi: जानिए इसकी विधि तथा इसके लाभ

Pendant Pose

लोलासन को करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक मेट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाए।
  • फिर अपनी हथेलियों को जांघों के साइड में ज़मीन पर रख ले और हांथो के द्वारा अपने संपूर्ण शरीर को ज़मीन से ऊपर उठाने का प्रयास करे।
  • शरीर को ऊपर उठाते समय साँस ले।
  • इतना करने के बाद अपने शरीर को आगे और पीछे की तरफ एक झूले के सामान झुलाये।
  • शरीर को आगे और पीछे हिलाते वक्त अंतर्कुंभक कर सकते है।
  • अब अपनी पहली स्थिति में वापस आ जाइये।
  • जमीन पर वापस आते समय साँस को बाहर की ओर छोड़े।
  • आप अपने मन को अपनी साँस पर भी एकाग्र कर सकते हैं।
  • इस मुद्रा को बार बार करे।
  • इस मुद्रा को आप कम से कम 8 से 9 बार कर सकते है।

लोलासन को करने से लाभ

  • सीने को पुष्ट बनाने में यह मुद्रा फ़ायदेमंद होती है।
  • इस आसन को नियमित करने से हाथों का कांपना दूर हो जाता है।
  • लोलासन शरीर की कठोरता को कम करने में भी मदद करता है।
  • तालमेल की भावना को मजबूत करने के लिए यह आसन उत्तम होता है।
  • लोलासन को नियमित करने से यह पेट की मांसपेशियों को विकसित करने का कार्य करता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से भुजाओं को अत्यधिक बल प्राप्त होता है साथ ही भुजाओं में मसल्स निर्मित होने लगते है।

लोलासन को करते समय ध्यान रखने वाली सावधानियां

  • इस आसन को किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।
  • कलाई की चोट, कंधे के दर्द या गर्दन की समस्याओं से पीड़ित लोगों को इस मुद्रा को नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के रोगियों को भी इस आसन को नहीं करना चाहिए ।

You may also like...