शरीर को स्वस्थ और कुंडली को जागृत रखता है प्लाविनी प्राणायाम

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यदि आप हमेशा स्वस्थ और मानसिक शांति से परिपूर्ण रहना चाहते हैं तो प्रतिदिन प्राणायाम करें। प्राणायाम से दिनभर मन प्रसन्न भी रहता है। हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पाचन तंत्र का स्वस्थ और मजबूत रहना बहुत ही महत्वपूर्ण है| अगर पाचन तंत्र सुदृढ़ है तो रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है साथ ही आप अच्छा भी महसूस करते है|

अगर आप स्वस्थ रहना चाहते है और पाचन तंत्र को मजबूत रखना चाहते है तो प्लाविनी प्राणायाम आपको हमेशा निरोगी रखता है। साथ ही यह कुंडलिनी भी जागृत करता है|

प्लाविनी प्राणायाम को कुछ योगाचार्य केवली प्राणायाम भी कहते है हालाँकि केवली करने के ओर भी तरीके है| केवली प्राणायाम को कुम्भक का राजा कहा जाता है| सभी प्राणायामों का अच्छे से अभ्यास होने से केवली प्राणायाम स्वत: ही घटित होने लगता है, लेकिन फिर भी साधक इसे साधना चाहे तो साध सकता है। इस प्राणायाम को योग गुरु के सानिध्य में परामर्श लेकर करना चाहिए| आइये जानते है Plavini Pranayama in Hindi करने की विधि और लाभ|

Plavini Pranayama in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Plavini Pranayama in Hindi

इस प्राणायाम का अभ्यास सुखासन या सिद्धासन में बैठकर किया जाता हैं| इसे स्वच्छ व् एकांत स्थान पर करना चाहिए| इसका अभ्यास बिना रेचक व् पूरक के किया जाता है| इसके अभ्यास में अपनी साँस को इच्छानुसार रोककर रखा जाता है इसलिए इस प्राणायाम को केवली या प्लाविनी प्राणायाम कहा जाता है|

प्लाविनी प्राणायाम की विधि

इस प्राणायाम को कई तरीकों से किया जा सकता है| यहाँ हम दो विधि बता रहे है| आइये जानते है  Plavini Pranayama Steps

पहली विधि

इस प्राणायाम के अभ्यास के लिए ऊपर बताये गए वातावरण को चुने और नीचे चटाई बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं| अब दोनों नाक के छिद्र से वायु को धीरे-धीरे अंदर खींचकर फेफड़े समेत पेट में पूर्ण रूप से भर लें। इसके पश्चात साँस को  अपनी क्षमता के अनुसार रोककर रखें । फिर दोनों नासिका छिद्रो से  धीरे-धीरे श्वास छोड़ें अर्थात वायु को बाहर निकालें। इस क्रिया को अपनी क्षमता अनुसार कितनी भी बार कर सकते हैं।

दूसरी विधि

रेचक और पूरक किए बिना ही सामान्य स्थिति में साँस लेते हुए जिस अवस्था में हो, उसी अवस्था में श्वास को रोक दें। फिर चाहे श्वास अंदर जा रही हो या बाहर निकल रही हो। कुछ देर तक श्वासों को रोककर रखना ही केवली प्राणायाम है।

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प्लाविनी प्राणायाम के लाभ

यह प्राणायाम कब्ज की समस्या दूर कर पाचनशक्ति को बढ़ाता है। इससे प्राणशक्ति शुद्ध होकर आयु बढ़ती है। यह मन को स्थिर व शांत रखने में भी सहायक होता है। इससे स्मरण शक्ति का विकास होता है, साथ ही व्यक्ति अपनी भूख को कंट्रोल कर सकता है और इस प्राणायाम का पूर्ण रूप से अभ्यास कर लेने पर व्यक्ति पानी में घंटों बिना हाथ-पैर हिलाएँ रह सकता है।

इस प्राणायाम के सिद्ध होने से व्यक्ति में संकल्प और संयम जागृत हो जाता है। वह सभी इंद्रियों में संयम रखने वाला बन जाता है। ऐसे व्यक्ति की इच्छाओं की पूर्ति होने लगती हैं। इसके माध्यम से सिद्धियाँ भी प्राप्त की जा सकती है।

प्लाविनी प्राणायाम की विशेषता

इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने के बाद फल रूप में जो प्राप्त होता है, वह है केवल कुम्भक। इस कुम्भक की विशेषता यह है कि यह कुम्भक अपने आप लग जाता है और काफी अधिक देर तक लगा रहता है। इसमें कब पूरक हुआ, कब रेचक हुआ, यह पता नहीं लगता। अपने आप कभी भी कुम्भक लग जाता है। उसका श्वास-प्रश्वास इतना अधिक लंबा और मंद हो जाता है कि यह भी पता नहीं रहता कि योगी कब श्वास-प्रश्वास लेता-छोड़ता है। इसके सिद्ध होने से ही योगी घंटों समाधि में बैठे रहते हैं। यह भूख-प्यास को रोक देता है।

सावधानियां

  1. इसका अभ्यास केवल योग्य शिक्षक की उपस्थिति में ही करें|
  2. इस प्राणायाम को करते समय किसी प्रकार की जबरदस्ती न करें|
  3. यह प्राणायाम भोजन के पहले खाली पेट करें|

आज आपने जाना Plavini Pranayama in Hindi, यह एक ऐसा योग है जो हमे स्वस्थ तो रखता है ही साथ ही कुंडली को जागृत कर हमे परम आनंद की प्राप्ति भी करवाता है|

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