Prana Yoga: आपके अन्दर प्राण शक्ति का संचार करेगा प्राण योग

जीवन की शक्ति को “प्राण” के नाम से जाना जाता है । जीवित प्राणियों में प्राण के होने की वज़ह से हीं प्राणी शब्द का निर्माण हुआ । जिस प्राणी में प्राण तत्व की जितनी ज्यादा मात्रा रहती है वो प्राणी उतना ही ज्यादा श्रेष्ठ, पराक्रमी, उन्नत तथा महान बन पाता  है।

वहीं जिस प्राणी में प्राण की मात्रा जितनी ज्यादा कम होती है वो प्राणी उतना ही निर्बल, निकम्मा, आलसी तथा निम्न स्तर का बन जाता है । शरीर के अन्दर प्राणवान की मुख्य अनुभूति उसकी ‘तेजस्विता’ को माना जाता है। गायत्री मन्त्र के अन्दर में इसका इशारा ‘भर्ग’ शब्द से मिल जाता है। भर्ग शब्द का मतलब ‘तेज’ होता है ।

मनुष्यों में प्राण के स्तर को बढाने के लिए ‘प्राणायाम’ के अभ्यास को सबसे श्रेष्ठ मानते है। सात्विक तथा नियमित समय पर आहार, व्यवस्थित दिनचर्या, निश्चिंत तथा शांत मन, प्रसन्न चित्त और ब्रह्मचर्य ये सभी आपके अन्दर प्राण की शक्ति को बढ़ाने का काम करते हैं ।

शरीर में प्राण शक्ति के बढ़ जाने का मतलब यह है की उस अद्भुत तत्व को खुद के अन्दर भर लेना जिसके जरिये मनुष्य की शक्तियाँ और ज्यादा विकसित होती हैं । इसके माध्यम से आयु को भी बढ़ाया जा सकता है। आइये आज के लेख में पढ़ते हैं Prana Yoga.

Prana Yoga: प्राण योग से प्राण शक्तियों को अपने अन्दर बढाए

Prana Yoga in Hindi

प्राण योग का असर सिर्फ हमारे शरीर तक सिमित नहीं रहता बल्कि इसका असर हमारे अन्दर होने वाली सभी कर्मेंद्रियों और ज्ञानेन्द्रियों को शक्तिशाली बना देता है, मन के अन्दर की नकारात्मकता को भगा कर उसके अन्दर सकारात्मकता तथा सृजनात्मकता के भाव को जगा देता है। इसके साथ ही यह साधक को ख़ुशी, सुख तथा आनन्द का अनुभव भी देता है। इससे व्यक्ति की बुद्धि का विकास तेजी से होता है और शरीर हमेशा स्वस्थ बना रहता है।

प्राणायाम करते समय निम्नलिखि तीन क्रियाएँ होती है।

पूरक क्रिया

  • इसमें नियंत्रित गति में साँस को अंदर लेना होता है।
  • जब भी प्राणायाम करने में सांसो को धीरे धीरे और तेज़ी से अंदर लिया जाता है तो उसमे एक लय और अनुपात का होना जरुरी होता है।

कुम्भक क्रिया

  • अंदर खींची हुई साँस को क्षमता अनुसार रोकने को कुम्भक कहा जाता है।
  • साँस को शरीर में रोकने की क्रिया को आंतरिक कुम्भक कहा जाता है।
  • जब की साँस लेकर वापस बहार छोड़ने की क्रिया को बाहरी कुम्भक कहा जाता है।
  • इस क्रिया में भी लय और अनुपात का होना जरुरी होता है।

रेचक क्रिया

  • अंदर ली गई साँस को नियंत्रित गति में बाहर छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते है।
  • साँस किसी भी तरीके से जब छोड़ते है तो इसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक हो जाता है।

इन योगासनों का अभ्यास करे

ओंकार

  • ॐ शब्द को दरअसल ब्रह्म अर्थात ईश्वर माना जाता है । इसे करने से सर्व रोगों का नाश होता है ।
  • इसके नियमित अभ्यास से मन शांत और शुद्ध हो जाता है साथ हीं सारे मानसिक विकार और बुरे ख्याल इससे दूर भाग जाते हैं ।
  • इस प्राणायाम को करने के लिए अपनी आँखे बंद कर के गहरी सांस भरते हुए ओम शब्द का उच्चारण किया जाता है ।

अनुलोम विलोम

  • इस प्राणायाम में को करने के लिए नाक के एक छिद्र को उँगलियों से बंद कर के नाक के दूसरे छिद्र के माध्यम से सांस भरा जाता है।
  • फिर इसी क्रिया को नाक के दूसरे छिद्र से उसी प्रकार दोहराया जाता है ।
  • यह प्राणायाम नाक को साफ़ तो करता हीं है साथ हीं इससे बैचैन मन को शान्ति भी मिल जाती है और मानसिक परेशानियों से निजात दिलाने में यह काफी फायदेमंद साबित होता है।

कपालभाति

  • यह कपालभाति प्राणायाम कपाल तथा भाति शब्द के संधि से निर्मित हुआ है। कपाल का अर्थ होता है सर तथा भाति का अर्थ चमकना होता है।
  • इस प्राणायाम को करने के दौरान आपको सीधे बैठ कर तेजी से अपनी सांस को इस प्रकार बाहर छोड़ा जाता है जिससे आपके पेट में भीतर की तरफ खिंचाव का अनुभव हो ।
  • पर इस बात का ध्यान रखें की इस दौरान आपका ध्यान आपकी पेट पर ना हो कर आपकी साँसों के अन्दर और बाहर जाने पर रहे ।
  • कपालभाति प्राणयाम करने से पाचन क्रिया को मजबूती मिलती है और फेफड़े भी मजबूत होते हैं, साथ हीं यह मधुमेह और नेत्ररोग आदि में भी बहुत लाभकारी होती है ।

उज्जयी

  • उज्जयी का शाब्दिक अर्थ होता है समुद्र होता है और इस प्राणायाम के दौरान सांसो से समुद्र जैसी ध्वनि निकाली जाती है इसी कारण से इस प्राणायाम का नाम उज्जयी प्राणायाम रखा गया है।
  • इस प्राणयाम को करते समय में सांसो को गर्दन में रोका जाता है और इसी दौरान समुद्र की ध्वनि बाहर निकाली जाती है।

शाम्भवी

  • ऐसा माना जाता है की इस प्राणायाम को करके हीं तृतीय नेत्र को जाग्रिक किया जा सकता है ।
  • इस मुद्रा में दोनों आईब्रोज के मध्य मौजूद स्थान जिसे आज्ञा चक्र कहते हैं उसे विकसित किया जाता है ।
  • इसे करने से दिमाग तेज होता है, आँखों में चमक बढ़ जाती है और आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है ।
  • इस प्राणायाम को करने के लिए गर्दन और पीठ सीधी कर के बैठ जाएँ और हाथों को अपने घुटनों पर रख लें, इसी मुद्रा में अपना ध्यान अपने आज्ञाचक्र पर लगायें ।

शीतली

  • शीतली प्राणायाम का नामाकरण शीतल शब्द से किया गया है । शीतल का अर्थ होता है ठंडा ।
  • शीतली प्राणायाम को करने से साधक का मन शांत हो जाता है साथ हीं शरीर में मौजूद अत्यधिक गर्मी भी दूर हो जाती है।
  • इस प्राणायाम को करने से रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है।
  • अगर आप तनाव की स्थिति में है तो सिर्फ 10 मिनट तक शीतली प्राणायाम को कर के आप अपने तनाव को दूर कर सकते हैं।
  • इस प्राणायाम को करने के लिए अपने जीभ को मोड़ कर साँसे ली और छोड़ी जाती है ।

नाड़ी शोधन

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम का नियमित अभ्यास करते रहने से आपके शरीर का खून साफ़ हो जाता है तथा खून के अन्दर ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ जाती है।
  • इस प्राणायाम को करने से शरीर के नसों से सारो गन्दगी दूर हो जाती है इसीलिए इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन प्राणायाम कहा जाता है ।
  • यह प्राणायाम आपके सम्पूर्ण श्वसन तंत्र को मजबूत बना देता है और साथ हीं इसे करने से बेचैनी तथा सिरदर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।
  • इस प्राणायाम को करने के लिए अपनी अंगुलियों को अपने आंखों के मध्य स्थान पर रख कर सांस को लिया और फिर छोड़ा जाता है।

कुम्भक प्राणायाम

  • कुम्भक प्राणायाम का अभ्यास करने से शरीर में वायु की वृद्धि होती है।
  • इसके नियमित अभ्यास से शरीर में संयम और संकल्प का निश्चय बढ़ता है।
  • इस प्राणायाम से खून साफ़ होता है और फेफड़े शुद्ध व् मजबूत बनते है।
  • इसी के साथ शरीर को कांतिमान बनाया जा सकता है।
  • इसके अलावा इसका अभ्यास आँखों की रौशनी बढ़ाने में भी मददगार होता है।
  • यह विचारो में नकारात्मकता कम करके सकारात्मकता बढ़ाता है।
  • साथ ही चिंता भय को दूर करने में भी सक्षम होता है।

दीर्घ प्राणायाम

  • दीर्घ प्राणायाम मानसिक शांति और चेतना के लिए फायदेमंद साबित होता है।
  • यह बॉडी में ऑक्सीजन के लेवल को बढ़ाता है और साथ ही दूषित पदार्थो को शरीर से बाहर निकालता है।
  • इस प्राणायाम के अभ्यास से व्यक्ति अपनी आयु को बढ़ा सकता है।
  • इस दीर्घ प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास छाती, फेफड़े और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जाता है।
  • इसी के साथ बॉडी तनाव मुक्त हो जाती और फूर्तिवान बनती है।

केवली प्राणायाम

  • केवली प्राणायाम कब्ज की शिकायत दूर करके पाचन शक्ति को बढ़ाने में मददगार होती है।
  • इस प्राणायाम को नियमित रूप से करने पर प्राण शक्ति शुद्ध होती है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी बढ़ती है।
  • केवली प्राणायाम मुख्य रूप से मन को स्थिर और शांत रखता है।
  • इसे करने से याददाश्त भी बढ़ती है साथ ही व्यक्ति अपनी भूख को भी कंट्रोल कर सकता है।
  • इस प्राणायाम के अभ्यास से तैराक पानी में घंटो अपने हाथो और पैरों को बिना हिलाए रह सकता है।
  • इससे व्यक्ति अपनी सभी इन्द्रियों पर संयम रखने में सफल हो जाता है। साथ ही मनुष्य की इच्छाओं की पूर्ति होने लगती है।
  • इसके अलावा इसके अभ्यास से कई सिद्धियाँ भी प्राप्त की जा सकती है।

भ्रामरी प्राणायाम

  • भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से तनाव, गुस्सा और अवसाद की समस्या दूर होती है।
  • इस प्राणायाम को करने से दिमाग शांत रहता है।
  • अगर किसी को माइग्रेन की समस्या है तो यह उसमें भी काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • इसी के साथ यह पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी लाभकारी है क्योंकि इससे दिमाग मजबूत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

आज के इस लेख में आपने प्राण योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ पढ़ी, साथ हीं आपने कुछ उपयोगी प्राण योग भी जाने । इन योग को कर के आप अपने शरीर में प्राण के स्तर को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं । आपके शरीर में प्राण स्तर के बढ़ने से आपको स्वस्थ्य शरीर और लम्बी आयु का वरदान मिल जाएगा, साथ हीं आप हमेशा निरोगी भी रह सकेंगे ।

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