Pranayama for Beginners: प्राणायाम की कर रहे हैं शुरुआत? तो करें कुछ सरल प्राणायाम

प्राण एक प्रकार की शक्ति होती है जो मनुष्य के शरीर को जीवित रखती है और साथ हीं मन को शक्ति प्रदान करती है। ‘प्राण’ से मनुष्य के जीवन की शक्ति का उल्लेख किया जाता है और ‘आयाम’ से का अर्थ होता है इस जीवन को नियमित बनाये रखना। इसलिए सम्मलित रूप से देखें तो प्राणायाम का मतलब हुआ स्वयं की जीवन शक्ति को नियमितता प्रदान करना।

योग की विधा में कुल आठ अलग अलग अंग मौजूद हैं और इन्हीं आठो अंगों में अंगों में से चौथे नंबर का अंग होता है प्राणायाम। Pranayama Benefits के माध्यम से मनुष्य के अंदर प्राण शक्ति की मात्रा को और साथ हीं साथ इसकी गुणवत्ता को भी बढ़ाया जाता है।

यह रुकी हुई नाड़ियां और चक्रों को पूरी तरह से खोल देता है। प्राणायाम करने से चंचल मन को स्पष्टता तथा शरीर को अच्छी सेहत का वरदान मिल जाता है। यदि प्राणायाम का आप व्यवस्थित और नियमित तरीके से अभ्यास करेंगे तो आपके शरीर और मन मस्तिष्क से जुड़े लगभग सभी प्रकार के रोगों को रोका जा सकता है।

इससे मानव शरीर को हमेशा के लिए स्वथ्य और रोगों से दूर रखा जा सकता है। इसलिए यदि आप प्राणायाम करने के इच्छुक है तो आप कुछ आसान और सरल प्राणायाम से इसकी शुरुआत कर सकते है। आइये आज के इस लेख में जानते है कुछ Pranayama for Beginners, जो आपके लिए लाभकारी होने के साथ साथ बहुत हीं सरल भी होते है।

Pranayama for Beginners: जानें बिगनर्स के लिए कुछ बेहद आसान और लाभकारी प्राणायाम

Pranayama for Beginners in Hindi

योग का नाम तो सब जानते हैं पर जब प्रणायाम की बात आती है तो इससे बहुत सारे लोग अभी भी अनभिज्ञ हैं और सोचते हैं की आखिर इसे कैसे किया जाता होगा How to do Pranayama? अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो इसके बारे में फ़िक्र करना छोड़ दें। आज के लेख में हम कुछ ऐसे प्राणायाम बताने जा रहे हैं जिसे बिगनर्स भी बड़ी आसानी के साथ बिना किसी और के मदद के अभ्यास कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे हीं कुछ Types of Pranayama जो हैं बहुत आसान।

भ्रामरी प्राणायाम: Bhramari Pranayama

  • भ्रामरी प्राणायाम एक बहुत सरल प्राणायाम होता है, इसे आप दिन के वक़्त में किसी भी समय और कहीं भी कर सकते हैं।
  • अपने मन को शांत करने तथा क्रोध की अग्नि को दूर करने के लिए यह प्राणायाम एक बहुत ही उत्तम और प्रभावी प्राणायाम माना जाता है।
  • इस प्राणायाम को करते समय व्यक्ति मधुमक्खी की भांति ही गुंजन की ध्वनि निकालता है।
  • भ्रमर का अर्थ होता है मधुमक्खी, इसी कारण से हीं इसे भ्रामरी प्राणायाम के नाम से जाना जाता है।
  • यह प्रणायाम बॉडी के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देने में बहुत सहायक होता है और साथ हीं साँसों की बीमारियों को भी ठीक करता है।
  • इसके अलावा यह बॉडी में ऑक्सिजन का संचार भी बेहतर बनाये रखता है और ब्लड को प्यूरीफाय करता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

  • इस आसन का अभ्यास भी बहुत ही आसानी से किया जा सकता है, इसके लिए आपको किसी किसी प्रशिक्षक की जरुरत नहीं पड़ेगी ।
  • यह साँस संबंधी हर प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए एक बहुत लाभकारी प्राणायाम माना जाता है।
  • इस प्राणायाम को अगर सुबह के वक़्त खाली पेट किया जाए तो यह बहुत ज्यादा लाभकारी होगा और फायदे भी पहुँचाएगा।
  • अगर आप सुबह के वक़्त व्यस्त रहते हैं और अभ्यास के लिए आपको समय नहीं मिल पा रहा है तो आप इसे शाम के समय भी कर सकते है।
  • पर प्राणायाम का अभ्यास करने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखें की अभ्यास से कम से कम 4 घंटे पहले तक आप कुछ ना खाएं।
  • यह प्राणायाम कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जिससे दिल की बीमारीओं के होने का खतरा कम हो जाता है।

कपालभाति प्राणायाम: Kapalbhati Pranayama

  • कपाल का अर्थ है खोपड़ी और भाति का अर्थ होता है चमकना। इसका सम्मलित अर्थ है चमकता हुआ कपाल।
  • इस प्रणायाम का अभ्यास करने से सिर चमकदार बनता है इसलिए इसे कपालभाति कहा जाता है।
  • कपालभाति को रोज करने से वजन घटता है साथ ही अस्थमा के रोगियों के लिए भी यह फ़ायदेमंद होता है।
  • इस प्राणायाम के अभ्यास से लिवर तथा किडनी बेहतर ढंग से काम करने लगता है और साथ हीं शरीर में हमेशा स्फूर्ति भी बनी रहती है।

उज्जायी प्राणायाम: Ujjayi Pranayama

  • उज्जायी शब्द का मतलब होता है विजयी या फिर जीत जाने वाला।
  • इस प्राणायाम के अभ्यास द्वारा हम अपनी साँसों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
  • यह प्राणायाम करते समय समुद्र की आवाज के समान ध्वनि बाहर आती हैं इसलिए इसे अंग्रेजी में ओशियन ब्रेथ के नाम से भी जाना जाता है।
  • उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करने से पाचन क्रिया अच्छी रहती है और यह श्वसन प्रणाली को भी सेहतमंद बनाये रखता है।
  • इस प्राणायाम की प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली ध्वनि मनुष्य के मन को शांति प्रदान करती है।
  • यह रक्त संचार की सामान्य और नियंत्रण में रखने में मदद करती है तथा हार्ट रेट भी कम बनाये रखती है।
  • अनिद्रा तथा माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी यह प्राणायाम बहुत फ़ायदेमंद होती है साथ हीं अस्थमा तथा टीबी को ठीक करने में भी यह मददगार होता है।

भस्त्रिका प्राणायाम: Bhastrika Pranayama

  • इसमें भस्त्र शब्द का अर्थ होता है धौंकनी।
  • यह एक ऐसा प्राणायाम है जिसमें लगातार तेजी से बलपूर्वक श्वास ली और छोड़ी जाती है।
  • यह प्राणायाम पेट की चर्बी को कम करता है, इसे करने से साँस से सम्बंधित समस्या दूर हो जाती है।
  • इसके अलावा इसके अभ्यास से फेफड़े मजबूत होते है और साथ हीं प्राणवायु लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है और रक्त संचार बेहतर हो जाता है।
  • इसकी मदद से ह्रदय रोग, अस्थमा और उच्च रक्तचाप आदि समस्याओं में लाभ मिलता है।

आज के इस लेख में आपने जाने कुछ ऐसे सरल प्राणायाम के बारे में जिन्हे आप आसानी से बिना किसी प्रशिक्षक की मदद लिए कर सकते हैं। अगर आप प्राणायाम के आसनों को शुरू करने जा रहे हैं और आप इस कार्य में नवोदित है तो लेख में बताये गए सारे प्राणायाम आपके लिए बहुत अच्छे और आसान होंगे जिससे आप प्राणायाम की शुरुआत कर सकते हैं।

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