मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक त्राटक क्रिया

हमने अपने पिछले लेख में आपको षट्कर्म की नौली क्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी थी| जिसके बारे में शायद आप जानते भी नहीं होंगे| आज हम आपको षट्कर्म की  त्राटक क्रिया से सम्बंधित उपयोगी बाते बताने जा रहे है| जो आपके स्वस्थ्य के लिए तो बेहतर है ही साथ ही यह आपके भविष्य को ओर उज्जवल बनने में भी सहायक होगा| त्राटक शब्द ‘त्रि’ के साथ ‘टकी बांधने’ से बना है| लेकिन इसका सही शब्द त्र्याटक है, जिसकी उत्पत्ति –

 ‘त्रिवारं आसमन्तात् टंकयति इति त्राटकम्‘.

अर्थात जब साधक किसी वास्तु को अपनी दृष्टि और मन से बांधता है यानि एकटक किसी वास्तु को देखता है, तो वह क्रिया त्र्याटक कहलाती है| त्र्याटक शब्द ही बाद त्राटक हो गया है|

Tratak Sadhana यानि किसी वास्तु को एक निगाह से देखते रहना| हठयोग में इसे दिव्य साधना से सम्बोधित किया जाता है| इसके द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व् दृष्टि मात्र से व्यक्ति अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है|

इसके अभ्यास से मानसिक शांति और आनंद प्राप्त किया जा सकता है| इससे आँख के सभी रोग, मन का विचलन अर्थात मन भटकना, स्मृतिदोष दूर होते है और आँखों की दूर दृष्टि बढ़ती है| आइये जानते है Tratak in Hindi.

Tratak in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Tratak in Hindi

किसी वस्तु को जब हम एक बार देखते हैं, तो इस  देखने की क्रिया हो एकटक कहा जाता है। उसी वस्तु को जब हम कुछ देर तक देखते हैं, तो वह द्वाटक कहलाती है। परन्तु जब हम किसी वस्तु को एक  दृष्टि से लगातार अधिक समय तक देखते रहते हैं, तो यह क्रिया त्र्याटक या त्राटक कहलाती है। दृष्टि की शक्ति को जाग्रत करने और बढ़ाने के लिए हठयोग में इस क्रिया का वर्णन किया गया है।

त्राटक क्रिया करने की विधि

त्राटक का सामान्य अर्थ है किसी वास्तु को टकटकी लगाकर देखना, इस क्रिया से मन की चंचलता को शान्त करने के लिये किया जाता है| यह ध्यान की एक विधि है जिसमें किसी वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है|

  1. यदि हम अधिक लंबे तक, नियमित कुछ महीनों तक, एक घंटा दीये की लौ को निरन्तर देखते रहें तो हमारी तीसरी आंख पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाती है। अर्थात आप अधिक सजग अनुभव करते हैं।
  2. त्राटक शब्द का मूल अर्थ है आंसू। इसलिए आपको दीये की लौ को तब तक लगातार देखते रहना है जब तक आंखों से आंसू ना बहने लगें। इसलिए इस क्रिया को बिना पलक झपकाए, एकटक देखते रहें| जिससे  आपकी तीसरी आंख सक्रिय होने लगेगी।
  3. एकटक देखने की विधि असल में किसी विषय से संबंधित नहीं है, इसका संबंध केवल देखने मात्र से है। क्योंकि जब आप बिना पलक झपकाए एकटक या एक निगाह से देखते हैं, तो आप एकाग्र  हो जाते हैं। अर्थात मन एक जगह स्थिर हो जाता है|
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त्राटक की अन्य क्रिया विधि

यह विधि ऊपर बताओ गयी विधि से थोड़ी अलग है| इस क्रिया विधि को हम दो चरण में करेंगे| इस विधि में हमे 1 घंटे का समय देना होगा| जिसका पहला चरण 40 मिनट का तथा दूसरा चरण 20 मिनट का रहेगा| आइये जानते है  Tratak Siddhi की अन्य विषय –

पहला चरण

  1. इस क्रिया को करने के लिए कमरे को चारों ओर से बंद कर लेना है और एक बड़े आकार का दर्पण अपने सामने रखना है।
  2. ध्यान रहे कमरे में बिलकुल अंधेरा हो किसी तरह की रोशनी यहाँ न आने पाए।
  3. अब एक दीपक या मोमबत्ती जलाकर दर्पण के पास इस प्रकार रखें कि उसकी रोशनी सीधी दर्पण पर न पड़े। सिर्फ आपका चेहरा ही दर्पण में दिखाई दे, न कि दीपक या मोमबत्ती की लौ।
  4. इसके बाद दर्पण में अपनी दोनों आंखों में बिना पलक झपकाए देखते रहें और लगातार चालीस मिनट तक ऐसा करते रहें| अगर आंसू निकलते हो तो उन्हें निकलने दें, लेकिन पूरी कोशिश करें कि पलक गिरने न पाए। आंखों की पुतलियों को भी इधर-उधर न घुमाए, ठीक दोनों आंखों में झांकते रहें।

दूसरा चरण

इस चरण में आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है| बस आँखों को बंद करके विश्राम की स्थिति में चले जाएं|

त्राटक क्रिया के लाभ

  1. त्राटक क्रिया आँखों के लिए तो लाभदायक है साथ ही यह आपकी एकाग्रता को बढ़ाने में भी सहायक है।
  2. इसका नियमित अभ्यास कर मानसिक शां‍ति और निर्भिकता का आनंद लिया जा सकता है।
  3. इससे आँख के रोग दूर जाते हैं। साथ ही मानसिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है| यह सभी Tratak Benefits है|

आज आपने जाना Tratak in Hindi, से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी, इस क्रिया के अनेक लाभ है जो हम आपको बता चुके है| लेकिन आपको इसे करते समय कुछ सावधानिया भी बरतनी चाहिए| आँखों में किसी भी प्रकार का दर्द या जलन हो तो इस क्रिया को न करें| इसके अलावा पहले किसी जानकर से इस क्रिया का प्रशिक्षण लें, उसके बाद इसका अभ्यास घर पर करें|

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