प्राणायाम शरीर और मन दोनों के लिए है फायदेमंद

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प्राणायाम का नियमित अभ्यास हमें अनेक प्रकार की बीमारियों और रोगों से दूर रखता है। जो भी व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय इसे करता है| उसका शरीर हमेशा स्वस्थ और मन शांत रहता है, वह हर कार्य अच्छे से करता है। प्राणायाम मन को नियंत्रित करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है।

कई बार ऐसा देखा गया है की लोग प्राणायाम जैसी फायदेमंद चीज को लोग कोसते फिरते है या बुरा भला कहने लगते है कि उन्होंने प्राणायाम करने के बाद कोई फर्क नहीं पड़ा या प्राणायाम करने से उनकी बीमारी और बाद गई, जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है|

इस तरह की परेशानियां तब आती है जब आप अपनी मर्जी से या अपने तरीके से प्राणायाम का अभ्यास करते रहे| अगर उसमे थोड़ी भी गलती होती है तो उसका गलत प्रभाव तो पड़ेगा ही, क्योंकि प्राणायाम हमेशा योग्य शिक्षक की उपस्थिति में तथा उनसे सलाह लेकर ही करना चाहिए|

प्राणायाम के लिए किसी शांत और अच्छे वातावरण वाले स्थान का चयन करना चाहिए। सांस लेने और छोडऩे की क्रिया को प्राणायाम कहा जाता है। आज हम आपको Types of Pranayam in Hindi, से सम्बंधित कुछ खास जानकारियाँ दे रहे है|

Types of Pranayam in Hindi: जानिए प्राणायाम के प्रकार

Types of Pranayam

योग के आठ अंग होते है जिनमे से प्राणायाम चौथा अंग है| आयुर्वेद में मन, मष्तिष्क और शरीर की औषधि प्राणायाम को माना गया है| प्राणायाम करते समय तीन तरह की क्रियाएं पूरक, कुम्भक और रेचक करते है| इसे हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं। अर्थात साँस लेना, रोकना और छोड़ना। आइये जानते है Pranayama Techniques

पूरक

नियंत्रित गति से साँस अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से खिंचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

कुम्भक

अंदर ली गयी साँस को अपनी क्षमतानुसार रोकर रखने की क्रिया को कुम्भक कहा जाता है| साँस अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुम्भक तथा साँस बहार छोड़कर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुम्भक कहते है|

रेचक

अंदर ली हुई साँस को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। साँस को धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना बहुत ही आवश्यक है।

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प्राणायाम के प्रमुख प्रकार

नाड़ीशोधन, भ्रस्त्रिका, उज्जाई, भ्रामरी, कपालभाती, केवली, कुंभक, दीर्घ, शीतकारी, शीतली, मूर्छा, सूर्यभेदन, चंद्रभेदन, प्रणव, अग्निसार, उद्गीथ, नासाग्र, प्लावनी, शितायु आदि, यह सभी मुख्य प्राणायाम है|

प्राणायाम करने के नियम

  1. प्राणायाम करने की जगह साफ़, शांत और वायु युक्त होना चाहिए| इसे पद्मासन, सिद्धासन अथवा सुखासन में बैठकर करना चाहिए|
  2. प्राणायाम करने से तुरंत पहले कुछ खाना नहीं चाहिए तथा भोजन के तुरंत बाद इसे नहीं करना चाहिए| खाने के बाद कम से कम 3 से 4 घंटे का अंतर रखना चाहिए| हो सके तो इसे सुबह के समय नित्यक्रम करने के बाद करें, यह आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा|
  3. प्राणायाम के दौरान सिर्फ नाक से साँस लें और मुंह से बाहर निकल दें| अगर आप प्राणायाम नहीं भी करते है तब भी आप नाक से साँस लें और मुंह से बाहर छोड़ें|
  4. प्राणायाम का अर्थ सिर्फ पूरक,कुम्बक व् रेचक ही नहीं वरन,श्वास और प्राणो  की गति को नियंत्रित और संतुलित करते हुए मन को भी स्थिर व् एकाग्र करने का अभ्यास करना है।
  5. प्रत्येक प्राणायाम अपनी क्षमतानुसार करें,किसी प्रकार के कष्ट का अनुभव होने पर या घबराहट होने पर इसे तुरंत रोक देना चाहिए।
  6. किसी रोग से पीड़ित होने पर तथा गर्भवती महिलाओं को प्राणायाम नहीं करने चाहिए।

Pranayama Benefits: जाने इसके लाभ

अगर आप सही ढंग से प्राणायाम करते हैं तो यह आपको अनेक बिमारियों से जरूर राहत दिलाता है| आइये जानते है Pranayama Benefits –

मोटापा, डायबेटीज, कॉलेस्ट्रॉल, कब्ज, एसिडिटी, एलर्जी, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्याएं, सेक्सुअल डिसऑर्डर इसके आलावा आपको बाल गिरने, बाल सफेद होने, चेहरे पर झुर्रियां, आंख की रोशनी में कमी, भूलने की बिमारी जैसी समस्याओं से भी निजात मिल जाएगी।

नियमित रूप से प्राणायाम करने से आपके चेहरे पर एक चमक और तेज आ जाता है। इससे आपको बहुत हल्का महसूस होता है। नींद भी अच्छी आती है। ब्लड सर्कुलेशन अच्छा हो जाता है और शरीर में ताकत आती है।

आज आपने जाना Types of Pranayam in Hindi, जिनके सही तरह से नियमित करने से अनेक शारीरिक और मानसिक लाभ प्राप्त कर सकते है|

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