Urdhva Baddhanguliyasana: हाथों और कलाइयों को मजबूत बनाने में सहायक आसन

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना को अंग्रेजी में Upward Bound Fingers pose कहा जाता है। जो की चार शब्दों से मिलकर बना है। उर्ध्व अर्थात ऊपर, बद्ध यानी बंधा हुआ, अंगुला मतलब ऊँगली और आसन यानी मुद्रा।

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना खड़े होकर किया जाता है साथ ही इस आसन को बैठ कर भी कर सकते है। इस आसन को करना बहुत ही सरल होता है और इसे करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना कंधों, बाजुओं, हाथों और कलाइयों को फैलाने और मजबूत बनाने में मदद करता है साथ ही यह छाती को भी स्ट्रेच करने में भी मदद करता है। यह आसन उन लोगो के लिए भी लाभकारी होता है जिनके बाजुओं और हांथो में सूजन होती है।

अगर आपने अभी योगाभ्यास को करना आरम्भ हीं किया है तो ये आसान आपके लिए अत्यंत आसान और लाभकारी होगा। जानते है Urdhva Baddhanguliyasana को करने की विधि, इसके लाभकारी फायदे और सावधानियों के बारे में।

Urdhva Baddhanguliyasana: जानिए इस आसन को करने की विधि, फायदे और सावधानियां

Urdhva Baddhanguliyasana in Hindi

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना को करने की विधि

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक समतल ज़मीन पर ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाए।
  • ध्यान रहे की आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए।
  • इसके बाद साँस को अंदर लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर की तरफ ले जाए।
  • अब अपनी कलाईयों को मोड़ते हुए दोनों हाथों की उँगलियों को एक दूसरे में इंटर लॉक कर ले और दोनों अँगूठो को एक साथ लाये।
  • सांसों को बाहर की तरफ छोड़ते हुए अपनी हथेलियों को आकाश की तरफ ले जाए।
  • इतना करने के बाद साँस को अंदर लेते हुए बाजुओं को अपने कानों के पास ले जाए और कुछ समय के लिए इसी स्थिति में बने रहे।
  • कुछ समय इस स्थिति में रुकते हुए सामान्य साँस अंदर ले।
  • फिर साँस को बाहर की तरफ छोड़ते हुए अपने बाजुओं को सामने की ओर लाते हुए नीचे कर ले।
  • इस प्रक्रिया को फिर से दोहराये और अपनी उँगलियों के इंटर लॉक में परिवर्तन कर दे ताकि अन्य ऊँगली भी ऊपर की तरफ आ सके। ऐसा करने से तंत्रिका तंत्र को संतुलित होने में मदद मिल जाती है।

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना को करने के फायदे

  • उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना के नियमित अभ्यास से कंधों में होने वाले पेशियों के तनाव से छुटकारा मिल जाता है।
  • इस आसन को करने से लगातार बैठने, ड्राइविंग करने और यात्रा के दौरान कमर के ऊपरी हिस्से में होने वाले दर्द से भी निजात मिलता है।
  • यह आसन उन लोगो के लिए भी लाभकारी होता है जो कैंसर के उपचार के लिए अपनी लिम्फ नोड्स को हटा देते हैं ।

उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना को करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • जिन लोगो को पीठ या फिर कंधे में गंभीर चोट है उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • थोरसिक आउटलेट सिंड्रोम वाले लोगो को भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

नोट– उर्ध्व बद्ध अंगुलियासना के फायदों का लाभ प्राप्त करने के लिए इसका अभ्यास नियमित रूप से करे।

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