Utthita Parsvakonasana Yoga: शरीर के अंगों में खिंचाव लाकर उन्हें मजबूत बनाये

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उत्थित पार्श्वकोणासन को एक्सटेंडेड साइड एंगल पोज़ भी कहते है। यह आसन तीन शब्दों से मिलकर बना हुआ है। जैसे उत्थित अर्थात उठा हुआ, पार्श्व अर्थात छाती के दाए बाये का भाग और कोण यानी कोना।

यह आसन शरीर के उन हिस्सों को फैलाने में मदद करता है जो आमतौर पर विस्तृत नहीं होते हैं। उत्थित पार्श्वकोणासन को रोज करने पर स्टेमिना में वृद्धि होती है।

यह आसन कब्ज, बांझपन, ऑस्टियोपोरोसिस, कटिस्नायुशूल और मासिक धर्म में परेशानी से चिकित्सीय राहत भी देता है। यह एक तरह का स्टैंडिंग पोज़ है|

आइये आज के लेख में जानते है Utthita Parsvakonasana Yoga को करने का तरीका और उसके अद्भुत फायदे तथा इस आसन करते समय बरतने वाली सावधानियांI

Utthita Parsvakonasana Steps and Benefits: उत्थित पार्श्वकोणासन को करने का तरीका और लाभ

Utthita Parsvakonasana Yoga

उत्थित पार्श्वकोणासन  की विधि

  • सबसे पहले आसन पर ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाए।
  • इसके पश्चात साँस को अंदर ले, और पैरों के बीच कुछ दूरी बना ले।
  • फिर अपने बाये पैर को 10 से 20 डिग्री अंदर की तरफ मोड़े और दाए पैर को 90 डिग्री बाहर की तरफ मोड़े। बायीं एड़ी के साथ दायी एड़ी को संरेखित करे।
  • अब धीरे धीरे अपने हांथो को उठाये, यह तब तक करना है जब तक आपका हाँथ आपके कंधे की सीध में न आ जाये।
  • इसके बाद अपनी बायीं एड़ी को मजबूती के साथ जमीन पर टिकाये रखे, दाहिये घुटने को मोड़े।
  • जब तक मोड़े जब तक की घुटना सीधा टखने के ऊपर न आ जाये।
  • फिर सांस को छोड़ते हुए अपने धड़ को दाहिनी ओर मोड़े।
  • ध्यान रहे की धड़ दाहिनी पैर की सिधाई में नीचे आना चाहिए। याद रखे की अपने कूल्हों को जोड़ो से मोड़े।
  • फिर अपने दाहिने हाँथ को अपनी क्षमता के अनुसार दाहिनी पैर से बाहर की ओर फर्श पर रखे।
  • याद रहे की आपका सर और दाहिना पैर एक सीध में रहे।
  • इसके बाद अपने बायें हाथ को छत की ओर आगे की तरफ बढ़ाये। अंत में आपका बाया हाथ और पैर एक सीध में होने चाहिए।
  • फिर अपने सर को ऊपर की तरफ उठाये जिससे की आप अपने बाए हाँथ की उंगलियों को देख सके।
  • 5 बार साँस अंदर ले और बाहर छोड़े, और इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक बने रहे|
  • धीरे धीरे क्षमता बढ़ने पर आप इसे 90 सेकंड तक भी कर सकते है पर इससे ज्यादा न करे|
  • 5 बार साँस लेने के बाद इस आसन से बाहर आ सकते है। आसन से बाहर आते समय सर को सीधा कर ले।
  • बाए हाँथ को सीधा कर ले,धड़ को भी सीधा कर ले, पैरों को अंदर की तरफ लाये।
  • फिर ताड़ासन की स्थिति को समाप्त कर ले, इस तरह एक चक्र पूरा हुआ।
  • फिर इसे पैर बदल कर भी करे|

उत्थित पार्श्वकोणासन के फायदे

  1. इस आसन को नियमित रूप से करने पर पाचन तंत्र सुधरता है|
  2. उत्थित पार्श्वकोणासन घुटनों, टखनों और पैरों में खीचाव लाता है और उन्हें मजबूत भी करता है।
  3. उत्थित पार्श्वकोणासन को करने छाती, रीढ़, कमर और कंधों में भी अच्छी स्ट्रेचिंग होती है|

Utthita Parsvakonasana Preparatory Poses

उत्थित पार्श्वकोणासन को करने से पहले आप अधो मुख स्वानासन, सुप्त बंध कोणासना, प्रसारित पादोत्तनासन, सिद्धासन ,सुप्त विरासना, सुप्त पादांगुष्ठासन, उपविस्ता कोणासना, उत्थिता त्रिकोणासन ,वीरभद्रासन II, विरासना भी कर सकते है।

Utthita Parsvakonasana Follow-up Poses

उत्थित पार्श्वकोणासन के बाद बंध कोणासन , बकासन, मलासन को भी कर सकते है।

ध्यान दे:-

इस आसन को सुबह करते पर अच्छा लाभ मिलता है लेकिन आप चाहे तो इसे शाम को भी कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखे की आपके आखिरी भोजन और व्यायाम के मध्य कुछ घंटों का अंतराल होना चाहिए।

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