Yoga for Breast Cancer: स्तन कैंसर के रोगियों के लिए फायदेमंद

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हम सभी जानते हैं कि योग में हमारे शरीर को हील करने की ऊर्जा है| पर क्या आप जानते हैं कि योग कैंसर से मुकाबला करने के लिए भी पर्याप्त रूप से शक्तिशाली है?

योग आसनों से कैंसर जैसी बीमारियां ठीक हो सकती है और ब्रेस्ट कैंसर में भी इससे काफी फायदा मिलता है|

अन्य कैंसर की तुलना में स्तन कैंसर के रोगियों को इस बीमारी की पहचान पहले चरण में ही हो जाती है। पहले से पता होने की स्तिथि में रोगी समय रहते ही योग का अभ्यास कर सकता है|

योग की मदद से आप स्तन कैंसर होने की सम्भावना कम कर सकते है| और यदि आपको पहले से यह कैंसर है तो आप अपनी हालत को खराब होने से रोक सकते है। आइये विस्तार से जानते है Yoga for Breast Cancer के बारे में|

Yoga for Breast Cancer: जानिए स्तन कैंसर में फायदेमंद आसन

Yoga for Breast Cancer in Hindi

स्तन कैंसर में योग क्यों जरुरी है?

योग की मदद से स्तन कैंसर के रोगियों को बेहतर महसूस होता है| यह ट्रीटमेंट के दौरान होने वाली थकान, मतली, स्थिरता और कमजोरियों जैसे दुष्प्रभावों को दूर करता है।

योग स्तन कैंसर के रोगी की ताकत और गतिशीलता में सुधार करता है| योग तनाव और चिंता को कम करता है| साथ ही यह हृदय की दर और रक्तचाप को कम करने में भी सहायक है|

स्तन कैंसर से रिकवरी के लिए योग के आसन

विरासना

विरसाना या हीरो पोज़, जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह एक ऐसी मुद्रा है जो आपके अंदर की अशांति को दूर करती है और एक नायक की तरह आपको बेहतर बनने में मदद करती है|

यह भी हठ योग आसन का शुरुआती स्तर है। सुबह के समय में विरसाना का अभ्यास करें। इसे 30 से 60 सेकंड तक करे।

फायदे: विरासना घुटनों और जांघों की स्ट्रेचिंग करते है, थके हुए पैरों को ऊर्जा देते हैं। यह पोज़ आपके पोस्चर को सुधारता है तथा उच्च रक्तचाप कम करने में मदद करता है|

सेतु बन्धासन

इसे ब्रिज पोस भी कहते है क्योंकि यह एक ब्रिज की संरचना के समान दिखता है। इस आसन को रोज सुबह के समय करना चाहिए, इसे 30 से 60 सेकंड तक ही करे।

फायदे: सेतु बन्धासन आपके छाती को बढ़ाता है और आपके नितम्बों को मजबूत करता है। यह मुद्रा तनाव और हल्के अवसाद को कम कर देता है| यह उच्च रक्तचाप और अनिद्रा के लिए भी फायदेमंद है|

अंजनेयासन

इसे क्रिसेंट पोज़ के नाम से जाना जाता है। इस आसन का नाम भगवान हनुमान के नाम पर रखा गया है। यह विन्यास योग का शुरुवाती आसन है| रोज सुबह या शाम, खाली पेट इसका अभ्यास करें| इसकी समय अवधि 15 से 30 सेकंड तक रख सकते है|

फायदे: अंजनेसाना मानसिक फ़ोकस को बढ़ाता है| इससे शरीर का संतुलन सुधरता है| इस आसन का मुख्य कार्य पाचन के अंगो में सुधार लाना है|

शवासन

शवासन एक ऐसी योग क्रिया है जिसे आमतौर सभी योग आसनो के अभ्यास के अंत में किया जाता है| इस आसन में आपके शरीर की स्थिति एक लाश के समान दिखाई देती है| यह अष्टांग योग आसन का शुरुवाती स्तर है| इसका अभ्यास आप दिन में कभी भी 5 से 10 मिनट के लिए कर सकते है|

फायदे: शवासन आपके शरीर को रिलैक्स करता है और आपके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है|

अर्ध मत्स्येन्द्रासन

इसे फिश पोज़ भी कहते है। यह हठ योग आसन का शुरुआती स्तर होता है। रोज सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करें। इसे 30 से 60 सेकंड तक करे।

फायदे: यह आसन थकान से मुक्ति दिलाता है, आपकी रीढ़ मजबूत करता है, दिल को उत्तेजित करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है|

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