जाने स्वप्नदोष को दूर करने के असरदारी और फायदेमंद योग

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स्वपन दोष जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है।तो हाँ यह सच है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है।यह रोग अधिकतर युवाओं में पाया जाता है।अंग्रेंजी में यह  रोग स्पर्माटोरिया के नाम से जाना जाता है।सामान्य अवस्था में  स्त्री व पुरुष के सम्मिलन की चरमावस्था पर पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। या यह कहा जा सकता है कि वीर्य़ का स्खलन संभोग  की चरम सीमा है जिसमें पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। इसमें पुरुष व स्त्री शारीरिक व मानसिक तल पर एक साथ सम्मिलित होते हैं।और दोनो का एक ही लक्ष्य होता है सम्भोग की चरम अवस्था पर पहुँच कर  परमानन्द की अनुभूति  प्राप्त करना।

मनुष्य ने स्वयं की गलतियों से शरीर को रोगी और अपूर्ण बना दिया | योग अपने आप में पूर्ण वैज्ञानिक विद्या है | हमारे ऋषियों ने योग का प्रयोग भोग के वजाय आध्यात्मिक प्रगति करने के लिए जोर दिया है जो नैतिक दृष्टि से सही भी है |

परन्तु ईश्वर की सृष्टि को बनाये रखने के लिए संसारिकता भी आवश्यक है, वीर्यवान व्यक्ति ही अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है,संतानोत्पत्ति के लिए वीर्यवान होना आवश्यक है पौरूषवान (वीर्यवान) व्यक्ति ही सम्पूर्ण पुरुष कहलाने का अधिकारी होता है | वीर्य का अभाव नपुंसकता है इसलिए मौज-मस्ती के लिए वीर्य का क्षरण निश्चित रूप से दुखदायी होता है | ऐसे व्यक्ति स्वप्नदोष,शीघ्रपतन और नपुंसकता जैसे कष्ट सहने को विवश होते हैं| इससे निजाद पाने के लिए आइये जानते है Yoga for Nightfall in Hindi.

Yoga for Nightfall in Hindi: स्वप्नदोष को दूर करने के लिए करे योगासन

Yoga for Nightfall in Hindi

वज्रोली क्रिया की विधि और लाभ

जब भी मूत्र त्याग करे तब एकदम से मूत्र को रोक ले .कुछ सेकेण्ड रोकें ..फिर नाड़ियों को ढीला छोड़ें और मूत्र निकलने दे| पुनः रोके इस तरह मूत्र त्याग के दौरान कई बार इस क्रिया को करें| इस क्रिया के द्वारा नाड़ियों में शक्ति आएगी .फिर वीर्य के स्खलन को भी आप कंट्रोल कर सकेंगे| हमारा मस्तिष्क मूत्र त्याग व वीर्य स्खलन में भेद नही कर सकतायही कारण है कि इस क्रिया द्वारा स्खलन के समय में उसी अनुपात में बढ़ोत्तरी होती है जिस अनुपात में आप मूत्र त्याग के समय कंट्रोल कर लेते है|

बाह्य कुम्भक की योगविधि और लाभ

लाभ:

  • इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होकर वृत्ति निरोध होता है|
  • इससे बुद्धि सूक्ष्म एवं तीव्र होता है|
  • वीर्य स्थिर होकर स्वप्नदोष और शीघ्रपतन छुटकारा मिलता है|

विधि:

  1. किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर पूरी शक्ति से श्वास को एक बार में ही बाहर निकल दें |
  2. श्वास को बाहर निकालकर मूलबंध (गुदा द्वार को संकुचित करें) और उड्डीयान बंध (पेट को यथाशक्ति अंदर सिकोड़ें) लगाकर आराम से जितनी देर रोक सकें,श्वास को बाहर ही रोककर रखें |
  3. जब श्वास अधिक समय तक बाहर न रुक सके तब बंधों को खोलकर धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरें | यह एक चक्र पूरा हुआ |
  4. श्वास भीतर लेने के बाद बिना रोके पुनः बाहर निकालकर पहले की तरह बाहर ही रोककर रखें | इस प्रकार 3 से 21 चक्र किये जा सकते हैं|

सावधानी:

  • यह प्राणायाम प्रातः खाली पेट करें |
  • श्वास बाहर इतना नही रोकना चाहिए कि लेते समय झटके से श्वास अंदर जाए और उखड़े हुए श्वास को 5-6 सामान्य श्वास लेकर ठीक करना पड़े|
  • प्राणायाम के 30 मिनट बाद ही कुछ खाएं – पियें|

अश्विनी मुद्रा की योगविधि और लाभ

 लाभ :

  • इस मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
  • शरीर में ताकत बढ़ती है तथा इस मुद्रा को करने से उम्र लंबी होती है।
  • माना जाता है कि इस मुद्रा से कुण्डलिनी का जागरण भी होता है।
  • यह मुद्रा शीघ्रपतन रोकने का अचूक इलाज है|
  • अश्वनी मुद्रा से नपुंसकता दूर होती है|

विधि :

कगासन में बैठकर (टॉयलैट में बैठने जैसी अवस्था) गुदाद्वार को अंदर ‍खिंचकर मूलबंध की स्थिति में कुछ देर तक रहें और फिर ढीला कर दें। पुन: अंदर खिंचकर पुन: छोड़ दें। यह प्रक्रिया यथा संभव अनुसार करते रहें और फिर कुछ देर आरामपूर्वक बैठ जाएं।

स्वप्नदोष के परिणाम

स्वप्नदोष से पीड़ित व्यक्ति का शरीर दुबला पतला तथा शारीरिक और मानसिक कमजोरी से ग्रसित हो जाता है| अत्यधिक ग्रसित हो जाने पर पेरो की शिथिलता व् स्मरण शक्ति कमजोर होना, मन में खिन्नता या चिड़चिड़ापन तथा अंडकोषों का लटक जाना भी इसके परिणाम स्वरुप हो सकता है|

इस वजह से रोगी का काम में मन नहीं लगता है और सम्भोग करते समय अचानक लिंग मई शिथिलता या ढीलापन पैदा करती है, और इस कारण इसका रोगी व्यक्ति शर्म महसूस करता है तथा अपने आप को अकेला सा पाता है

इससे पीड़ित व्यक्ति मन में हमेशा काम क्रिया की बात ही सोचता रहता है| जिस वजह से रात के समय अत्यधित उत्तेजना या सेक्स करने की इच्छा जागृत होती है और सुबह जागने पर भी लिंग की उत्तेजना होती है| कभी-कभी शौच के समय पतला वीर्य गिरता है, साँस फूलने लगती है तथा हर समय लिंग में कड़ापन सा महसूस होता है, और भी अत्यधित खतरनाक स्थिति तब हो जाती है जब जननेन्द्रिय हमेशा कड़क बानी रहती है या स्वप्नदोष के बाद अत्यधिक कमजोरी सी लगती है तथा तरह तरह की आवाजे सुनाई देती है

 

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