अभय मुद्रा को भयरहित मुद्रा भी कह सकते है। क्योंकि अभय मुद्रा को यदि नियमित रूप से किया जाए तो मन से डर अर्थात भय निकल जाता है। अभय मुद्रा संस्कृत शब्द से लिया गया है जिसमे अभय का अर्थ होता है निडर अर्थात जिसे डर या भय नहीं होता है।

अभय मुद्रा एक योग मुद्रा होती है जो की जागरूकता का भाव उत्पन्न करती है। अभय मुद्रा का अभ्यास करने से भय से मुक्ति मिल जाती है। इस मुद्रा को आप किसी भी समय कर सकते है।

इस मुद्रा को आशीर्वाद मुद्रा भी कहा जाता है क्योंकि इस मुद्रा में शरीर आशीर्वाद देते हुए दिखाई देता है।

ऐसा बताया जाता है की भगवान बुद्ध के द्वारा अभय मुद्रा का प्रयोग तब किया गया था जब एक हाथी के द्वारा हमला हुआ था और इस मुद्रा के जरिये उसे शांत किया गया था। जानते है Abhaya Mudra को करने के तरीके और उसके फायदे के बारे में।

Abhaya Mudra: जानिए इस मुद्रा को करने की विधि और फायदे

Abhaya Mudra

अभय मुद्रा को करने की विधि

  • इस मुद्रा को करने के लिए सबसे पहले सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएँ।
  • इसके बाद अपने दोनों हांथो को घुटनो पर रखें।
  • अपने बाएं हाथ को कंधे की ऊंचाई तक लाएं।
  • फिर अपनी भुजाओं को मोड लें।
  • इसके बाद दाएं हाथ को शरीर के बगल में रखें।
  • ध्यान रहे की हथेली ऊपर की ओर हो और उंगुलियां सीधी होनी चाहिए।
  • इस मुद्रा में साँस सामान्य रखें।
  • इस स्थिति में 10-15 सेकेंड तक रहें।
  • इसके बाद अपने हांथो को नीचे की तरफ ला सकते हैं।

अभय मुद्रा को करने के फायदे

  • अभय मुद्रा को करने से मन में शांति की भावना का विकास होता है साथ ही परोपकार करने की इक्षा जागृत होती है।
  • इंसान स्वयं के भीतर ही शांति और शक्ति का अनुभव करने लगता है।
  • अभय मुद्रा को करने से सुरक्षा देने वाली ऊर्जा और गहरी आध्यात्मिक सुरक्षा का अहसास होता है।
  • साथ ही इस मुद्रा द्वारा आप अपने चक्र और ऊर्जा द्वार को भी खोल सकते हैं।