इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र जैसी हो जाती है इसलिए इसे अर्धचन्द्रासन कहते है। अर्ध का अर्थ होता है आधा और चंद्रासन अर्थात चंद्र के समान किया गया आसन।

इस आसन को खड़े होकर किया जाता है। अर्धचन्द्रासन को अंग्रेजी में Half Moon Pose भी कहते है। इस आसन को करने से आपकी चिंता और तनाव कम हो जाता है।

यह आसन सामान्य स्ट्रेचिंग और बैलेंसिंग पोज़ है। जो खासकर कमर के निचले हिस्से, पेट और सीने के लिए लाभदायक है। यह आसन स्ट्रेचिंग रूटीन के सारे आसनो के समान होता है।

यह आसन सूर्य नमस्कार के अनुक्रम में से एक है| इस आसन को करने से आपका पाचन तंत्र सुधरता है। साथ ही यह माइग्रेन, निम्न रक्तचाप और डायरिया जैसी बीमारियों को भी सही करता है|

लेकिन इसे करने के लिए आपका एनर्जी लेवल ज्यादा होना चाहिए, और फिर जब आप इस आसन को पूरी तरह से करेंगे आप एक  सकारात्मक ऊर्जा से भर जायेंगे और आपके अंदर का तनाव और चिंता कम हो जाएगी| चलिए विस्तार से Ardha Chandrasana के बारे में जानते है|

Ardha Chandrasana: जाने इसके फायदे और इससे जुड़ी सावधानिया

Ardha Chandrasana

अर्धचन्द्रासन कैसे करे

  • इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों की एड़ी-पंजों को मिलाकर खड़े हो जाएँ।
  • दोनों हाँथ कमर से सटे होने चाहिए और अपनी गर्दन सीधी रखे।
  • फिर धीरे धीरे दोनों पैरों को एक दूसरे से करीब एक से डेढ़ फ़ीट की दूरी पर रखे।
  • ध्यान रहे की इस आसन का अभ्यास करते वक्त आपका मेरुदंड सीधा रहे।
  • इसके उपरांत दाएँ हाथ को उपर उठाये और कंधे के समानांतर लाएँ|
  • आपके हथेली का रुख आसमान की ओर होना चाहिए|
  • इसे करते समय ध्यान रहे की आपका बायाँ हाथ आपकी कमर पर ही रहे।
  • अब बाई और झुके, जैसा की चित्र में दिखाया गया है|
  • इस दौरान आपका बायाँ हाथ सयंम ही नीचे खिसकता जायेगा।
  • याद रहे कि बाएँ हाथ की हथेली को बाएँ पैर से अलग न हटने पाए।
  • इसी स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहे, फिर धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आये।
  • अगर इसे पहली बार कर रहे है तो जितना हो सके उतना ही झुके।
  • यही प्रक्रिया दूसरी तरफ भी करे।

अर्धचन्द्रासन करने के क्या फायदे है?

  1. इस आसन को नियमित करने से शरीर में जमी हुई चर्बी कम होती है।
  2. यह आसन छाती का विकास करने में सहायक होता है साथ ही इससे मेरुदंड संबंधी रोग भी दूर होते है|
  3. रोज इसे करने पर पेट, कंधे और पैरो से सम्बंधित रोग दूर होते है|
इस आसन को नियमित रूप से करने पर गाल ब्लेडर, घुटने, किडनी, लीवर, छोटी आँत, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है| जिससे की इन सारे अंगो का व्यायाम होता है और ये सब अंग निरोगी रहते है|

सावधानिया:-

आपने अर्धचन्द्रासन की विधि तो जान ली, लेकिन इसे करने से पहले एक बार इससे जुडी सावधानियों पर भी नजर डाले|
  • यदि किसी को पीठ दर्द या कमर दर्द है तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन को कभी भी भरे पेट नहीं करना चाहिए|
  • अर्धचन्द्रासन को करने के लिए सुबह का समय अच्छा होता है। परन्तु अगर आप सुबह नहीं कर सकते है तो शाम को भी कर सकते है|