बाह्य प्राणायाम में साँस को बाहर कि ओर छोड़ा जाता है| इसलिए इस आसन को बाहरी साँस का योगा भी कहा जाता हैI इसे अंग्रेजी भाषा में एक्सटर्नल रिटेंशन भी कहा जाता है|

यह प्राणायाम भी साँस से जुड़ा होता है| इस प्राणायाम में तेजी से सांसो को छोड़ा जाता है| यह पेट से सम्बंधित रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी होता हैI इस आसन को कपालभाती प्राणायाम के बाद ही किया जाता है|

इस आसन को नियमित रूप से करने पर पाचन तंत्र बेहतर बनता है| बाह्य प्राणायाम से प्रोस्टेट से जुडी समस्यायों को भी दूर किया जा सकता है|

इस आसन द्वारा मन और मस्तिष्क की एकाग्रता में वृद्धि होती है| साथ ही यह हर्नियाँ जेसे रोगों से मुक्ति दिलाता है| आइये आज के लेख में हम जानते है कि Bahya Pranayama को कैसे किया जाता है और फायदे तथा बरतने योग्य सावधानियां|

Bahya Pranayama: इसे कैसे करे और इसके क्या फायदे है

Bahya Pranayama

बाह्य प्राणायाम को करने कि विधि

  • इसे करने के लिए सबसे पहले मध्यपट को नीचे कि ओर झुकाये और फिर फेफड़ो को फुलाने का प्रयास करे|
  • इसके साथ ही एसा अनुभव करे कि आपकी गले कि हड्डियाँ फूल रही हो|
  • इसके बाद तेजी से सांसो को छोड़े और साथ ही पेट पर भी बल दे|
  • इसके बाद धीरे धीरे अपनी छाती से ठोड़ी लगाने का प्रयत्न करे|
  • अब शरीर के मध्यपट से साँस को ऊपर फेकने का प्रयास करे|
  • अपनी क्षमता के अनुसार कुछ देर इस स्थिति में रहे|
  • इस प्रक्रिया को 4 से 5 बार दोहरा सकते है|

बाह्य प्राणायाम के फायदे

  1. यह प्राणायाम डायबटीज के मरीज के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है|
  2. बाह्य प्राणायाम को नियमित करने से यह मूत्र सम्बन्धी बिमारियों से राहत दिलाता है|
  3. इस प्राणायाम द्वारा प्रजनन अंगो के इलाज में सहायता मिलती है|
  4. बाह्य प्राणायाम को रोज करने से यह कब्ज, पेट सम्बन्धी बिमारियों और एसिडिटी से छुटकारा दिलाता है|
  5. थायरॉयड, गले की समस्या,  बवासीर आदि बिमारियों से आराम पाने के लिए इसके अभ्यास को जरुर करना चाहिए|
  6. इस आसन द्वारा शरीर कि थकान दूर हो जाती है और शरीर में स्फूर्ति आती है|

बाहय प्राणायाम कि सावधानियां

  • यह प्राणायाम साँस से सम्बंधित होता है इसलिए इस आसन को करते समय पेट खाली होना चाहिए|
  • ध्यान रहे कि यह प्राणायाम और खाने के बिच 5 से 6 घंटों का अंतराल करना चाहिए|
  • साथ ही हृदय व् उच्च रक्तचाप के रोगियों को बाह्य प्राणायाम का अभ्यास नही करना चाहिए |
  • गर्भवती महिलाओं को भी बाह्य प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए। और पीरियड के वक्त में महिलाये इस प्राणायाम को ना करे।