भस्त्रिका एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है " धौंकनी" और भस्त्रिक को संस्कृत में धमनी कहा जाता है| इस प्राणायाम को यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इस योग में साँस लेने व् छोड़ने की गति अधिक तेज करनी होती है| जिस प्रकार एक लौहार धौकनी की मदद से तेज हवा छोड़कर उष्णता निर्माण कर लोहे को गर्म कर उसकी अशुद्धता को दूर करता है|

उसी प्रकार Bhastrika Pranayama हमारे शरीर और मन से धौंकनी की तरह आवाज करते हुए वेगपूर्वक अशुद्ध वायु को बहार निकाल देता है और शुद्ध प्राणवायु को शरीर के अंदर प्रवेश कराता है| इसलिए अंग्रेजी में इसे Bellow’s Breath कहा जाता है|

प्राणायाम मनुष्य जीवन का रहस्य है| साँस के आवागमन पर ही हमारा जीवन निर्भर करता है और ऑक्सीजन की असंतुलित मात्रा से रोगो की उत्पत्ति होती है| आज के प्रदुषण और धूल भरे वातावरण से हमारी श्वासों की गति अपना स्वाभाविक रूप खो देती है, ऐसे माहौल में शरीर की शुद्धि और फेफड़ो की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए यह बहुत ही उपयोगी प्राणायाम है| आइये जानते है Bhastrika Pranayama in Hindi.

Bhastrika Pranayama in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Bhastrika Pranayama in Hindi

क्यों जरुरी है भस्त्रिका प्राणायाम

मनुष्य की आयु जैसे जैसे बड़ी होती जाती है वह पेट तक साँस लेने की प्रकिया को छोड़ता जाता है| यही नहीं अत्यधिक तनाव और चिंता के कारण वह पूरी तरह से श्वास लेना भी छोड़ देता है| जैसे तैसे साँस फेफड़ों तक पहुँच पाती है, इसी कारन शरीर को ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती है| शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण जल और भोजन के लाभकारी गुण और तत्वों का हमें लाभ नहीं मिल पाता है|

भस्त्रिका प्राणायाम की विधि

आइये जानते Bhastrika Pranayama in Hindi की विधि-

  1. सबसे पहले पद्मासन और सुखासन की अवस्था मई समतल जमीन पर बैठ जाएं|
  2. अब सर, गर्दन, कमर, और रीड्ड की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर और मन को स्थिर बनाये रखें, आँखों को बंद करें|
  3. फिर नासिका छिद्रों से तेज आवाज करते हुए साँस अंदर ले और आवाज करते हुए साँस बाहर छोड़ना है| साँस लेने और छोड़ने की गति तीव्र होना चाहिए|
  4. इस प्राणायाम को करते समय साँस की गति पहले धीरे, फिर माध्यम और फिर तेज गति से साँस लेना और छोड़ना चाहिए|
  5. ऐसे में साँस लेते समय पेट फूलना चाहिए और साँस छोड़ते समय पेट पिचकना चाहिए| ऐसा करने से नाभि पर दबाव पड़ता है|
  6. इस प्रक्रिया को करते समय केवल पेट हिलना चाहिए और छाती स्थिर रखना चाहिए|
  7. पुनः सामान्य स्थिति में आने के लिए श्वास की गति को धीरे-धीरे कम करते जाएं| अंत में गहरी साँस लेते हुए फिर साँस को बाहर निकलते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें|
  8. इस प्राणायाम को कम से कम 20 बार करना चाहिए| श्वास लेने और छोड़ने का समय सामान होना चाहिए|
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भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ

  1. इस प्राणायाम को करने से फेफड़ो में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है और श्वसन प्रणाली के विकारों को हटाता है|
  2. शरीर के सभी अंगों में रक्त का संचार ठीक तरह से होता है| फेफड़ो की कार्यक्षमता को बढ़ाता है
  3. पेट का उपयोग अधिक होने से पेट के अंग मजबूत होते है और पाचन शक्ति में वृद्धि होती है|
  4. अस्थमा, टीबी और कर्करोग के रोगियों के लिए लाभप्रद है|
  5. आँख, कान और नाक को स्वस्थ बनाये रखने में यह सहायक है| साथ ही यह वजन और पेट की चर्बी भी कम करने में फायदेमंद साबित होता है|
  6. सर्दियों के मौसम में इस आसान को जरूर करना चाहिए यह शरीर में गर्मी पैदा करता है, भूक को बढ़ाता है और बलगम को नष्ट करता है|
  7. वात, पित्त और कफ को दूर करता है पाचन शक्ति बढ़ाता है कब्ज से रहत दिलाता है|

सावधानियां

  1. इस प्राणायाम की को शुरू करने से पहले किसी योग शिक्षक से इसके अभ्यास को अच्छी तरह समझे उसके बाद ही करें, क्योंकि इसमें साँस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया अन्य आसनों से अलग है|
  2. उच्च रक्तचाप, हर्निया, ह्रदय, अल्सर, मिर्गी, पथरी के रोगियों को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए| गर्भवती महिलाओं को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  3. भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले नाक को अच्छे से साफ़ कर लें|

ऊपर आपने जाना भस्त्रिका प्राणायाम एक बहु उपयोगी प्राणायाम है| इसे करते समय चक्कर आना, जी मचलना, घबराहट या बेचैनी जैसे लक्षण नजर आने पर तुरत इसे बंद कर देना चाहिए|