Chandra Namaskar - पेट ठीक रखे, शरीर को सुन्दर और सुडौल बनाये

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Chandra Namaskar - पेट ठीक रखे, शरीर को सुन्दर और सुडौल बनाये

सूर्य नमस्कार की भांति ही चंद्र नमस्कार हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है। जिस प्रकार सूर्य नमस्कार हमें ऊर्जा देता है और शरीर को रोगों से दूर रखता है ठीक उसी प्रकार चंद्रमा की शीतलता में किये गए योग से भी बहुत सारे लाभ प्राप्त होते है।

यह आसन शरीर को शीतलता प्रदान करता है और शरीर का मोटापा भी कम करता है। चन्द्र नमस्कार, सूर्य नमस्कार का ही प्रतिबिम्ब होता है।

चंद्र नमस्कार का अभ्यास रात में सबसे अच्छा अभ्यास होता है, विशेषकर जब चंद्रमा दिखाई दे। रात में अभ्यास करते समय, सुनिश्चित करें कि पेट खाली है।

सूर्य नमस्कार के विषय में तो अधिकतर लोग जानते है और उसे करते भी है। परन्तु चंद्र नमस्कार के बारे में बहुत ही कम लोगो ने सुना होगा। इस लेख द्वारा जानते है की Chandra Namaskar कैसे किया जाता है और इसे करने से क्या क्या लाभ होते है?

Chandra Namaskar in Hindi: चंद्र नमस्कार कि विधि, लाभ, सावधानी

Chandra Namaskar

पहली क्रिया

  • इसे करने के लिए चंद्र की तरफ मुख कर के खड़े हो जाएँ ।
  • इसके बाद दोनों हाथों को उपर उठाते हुए कमर के उपर के हिस्से को जितना पीछे झुका सकते हैं, झुकाएं ।
  • अब दोनों हाथ आकाश की ओर खुले रखे ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ चंद्राय नम: ।

दूसरी क्रिया

  • इस क्रिया को करने के लिए अपने हाथों तथा कमर को सामने की ओर झुकाये।
  • अब हाथों को पैरों के समीप ले आइयें ।
  • इसके बाद सिर को घुटने से स्पर्श कराएँ।
  • ध्यान रखें कि घुटने को न मोड़ें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ सोमाय नम: ।
  • स्थान-: स्वाधिष्ठान चक्र ।

तीसरी क्रिया

  • इस आसन को करने के लिए बाएँ पैर को पीछे ले जाकर सीधे रखें।
  • इसके बाद घुटने से दायें पैर को मोड़ते हुए शरीर का भार दायें पैर पर ही रखें ।
  • हाथों को दायें पैर के समीप ही रखें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ इन्द्रेव नम: ।
  • स्थान-: विशुद्ध चक्र ।

चौथी क्रिया

  • इस आसन में जहाँ हैं वहीं स्थिर रहते हुए बाएं पैर का घुटना जमींन को स्पर्श कराये ।
  • फिर दायें पैर को घुटनें से मोड़ते हुयें 90° का कोण बना लें ।
  • फिर हाथों को उपर उठाते हुए कमर के उपरी भाग को पीछे की ओर झुकाएं ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ निशाकराय नम: ।
  • स्थान-: आज्ञा चक्र ।

पाचवीं क्रिया

  • तीसरे आसन के समान दायें पैर के स्थान पर बाएं पैर पर शरीर का भार देना हैं ।
  • फिर इसमें दायें पैर को पीछे ले जाना हैं ।
  • हाथों को बाएं पैर के पंजो के पास रखें ।
  • बीज मंत्र -: ऊँ कलामृताय नम: ।
  • स्थान-: विशुद्धि चक्र ।

छटी क्रिया

  • चौथी क्रिया के समान बाएं पैर पर वजन दें और इस प्रकार खड़े हो कि दायें पैर का घुटना जमींन को स्पर्श करता रहें ।
  • फिर हाथों को उपर की ओर रखें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ सुधाधराय नम: ।
  • स्थान-: विशुद्धि चक्र ।

सातवीं क्रिया

  • इस आसन में दोनों हाथों को ज़मीन पर रखें कमर के उपर के भाग को जितना उपर उठा सकते हैं उपर उठा लें ।
  • इस तरह यह 4-5 बार करें ।
  • बीज मंत्र- ऊँ निशापतेय नम:।
  • स्थान-: स्वाधिष्ठान चक्र।

आठवी क्रिया

  • इस आसन को करने के लिए दोनों घुटनों को ज़मीन पर टिका लें ।
  • अब सिर नीचें करके जमीन पर स्पर्श करें ।
  • इसके बाद दोनों हाथों को जमीन पर रखें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ शिव शेखराय नम:
  • स्थान-: अनाहत चक्र।

नौवीं क्रिया

  • इस आसन में दोनों घुटनें ज़मीन पर रखें ।
  • सिर थोडा पीछे की ओर झुकाकर हाथों को उपर की की तरफ रखें ।
  • शरीर का वजन घुटनों, पंजों व एड़ियों पर रखें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ अमृतदीधितये नम: ।
  • स्थान-: आज्ञा चक्र ।

दसवीं क्रिया

  • इसमें दोनों हाथों को सामनें की तरफ ज़मीन पर डेढ़ फीट के अंतर पर रखें ।
  • इस आसन में पंजो और हाथों के बल बैठते हुये घुटनों को ज़मीन से उपर उठा लें ।
  • बीज मंत्र-: तमोघ्यानाय नम:।
  • स्थान-: मणिपुर चक्र।

ग्यारवीं क्रिया

  • दोनों पैरों पर वैसे ही बैठते हुए दोनों हाथों के बीच कर लें ।
  • फिर पैरों के पंजो पर वजन देकर बेठें ।
  • ध्यान रहे हाथों के पंजें ज़मीन पर स्पर्श करना चाहिये ।
  • शरीर का वजन पैरों के पंजों पर रहेगा ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ राजराजाय नम: ।
  • स्थान-: मूलाधार चक्र ।

बारहवीं क्रिया

  • इस आसन में सीधें खड़े होकर हाथों को प्रणाम की मुद्रा में ले आयें ।
  • बीज मंत्र-: ऊँ शशांक देवाय नम: ।
  • स्थान-: अनाहत चक्र ।

चंद्र नमस्कार के लाभ :-

  1. इस आसन को करने से तनाव दूर हो जाता है।
  2. साथ ही इस आसन द्वारा पाचन तंत्र अच्छा रहता है।
  3. चंद्र नमस्कार शरीर को संतुलित करता है।

चंद्र नमस्कार की सावधानियां

  1. इस आसन को आप जब भी करे तो उसे चंद्रमा की दिशानुसार करना चाहिए।
  2. गर्भवति महिला को इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  3. इस आसन को धीरे धीरे ही करना चाहिए।