दीर्घ प्राणायाम साँस लेने का एक व्यायाम है जिसमें पूरे श्वसन प्रणाली का उपयोग कर फेफड़ो को जितना संभव हो सके भरना होता है। दीर्घ अर्थात लंबा, वह प्राणायाम जो व्यक्ति कि आयु को बढाता है उसे दीर्घ प्राणायाम कहते है।

दीर्घ प्राणायाम को नियमित रूप से करने पर यह शरीर को तनाव से मुक्त कर देता है।जिससे कारण शरीर के हर अंग में फुर्ती आ जाती है।

साथ ही यह फेफड़े, छाती और मांसपेशियों को मजबूत करता है जिससे यह स्वस्थ्य रहती है। इस प्राणायाम को कम्पलीट ब्रीथ, दी यौगिक ब्रीथ और तीन चरण श्वसन भी कहा जाता है।

दीर्घ प्राणायाम को करने से चेतना यानि आत्मा प्रसन्न रहती है।और यह आपको विभिन्न प्रकार के रोगों से भी दूर रखता है।इस प्राणायाम से तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है। जानते है Dirgha Pranayama करने कि विधि, उसके फायदे और उसकी सावधानिया।

Dirgha Pranayama: जानिए इसकी विधि, लाभ और सावधानी

Dirgha Pranayama दीर्घ प्राणायाम कि विधि

  • इस प्राणायाम के पहले चरण में साँस को नियंत्रित करते है, दुसरे चरण में श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करके दीर्घ करना होता है, तीसरे चरण में आतंरिक और चौथे चरण में बाहरी कुम्भक का अभ्यास करना होता है।
  • इस प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले आसन पर पीठ के बल लेट जाए।
  • इसके बाद धीरे से हथेलियों को पेट पर रखे और दोनों हांथो कि मध्यमा अंगुली नाभि पर एक दूसरे को छूती रहे।
  • इसके बाद धीरे धीरे श्वास को छोड़ते हुए पेट को ढीला छोड़ दे।
  • अब श्वास को खीचते हुए पेट को फुला ले।
  • इस क्रिया को 5 मिनट तक जितनी बार हो सके दोहराए।
  • इस क्रिया को करते समय साँस को पहले छाती में, इसके बाद पसलियों में और फिर पेट में अनुभव करना चाहिए।
  • जब आप साँस लेते है तो आपके दोनों कंधे ऊपर कि ओर होते है और साँस को छोड़ते समय यह नीचे कि तरफ होते है।इसलिए कंधो में भी साँस की लय का अनुभव करे।

दीर्घ प्राणायाम के लाभ

  • यह प्राणायाम शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि करता है।
  • दीर्घ प्राणायाम को रोज करने से शरीर में उपस्थित दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते है।
  • यह प्राणायाम मानसिक शांति के लिए बहुत ही लाभकारी होता है।
  • दीर्घ प्राणायाम के द्वारा एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है।
  • यह प्राणायाम अनिद्रा से भी निजात दिलाता है।
  • दीर्घ प्राणायाम करने से प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है।

दीर्घ प्राणायाम की सावधानियां

  • इस प्राणायाम को बहुत आराम से करना चाहिए।
  • प्राणायाम को करते समय पेट का संकुचन, मासपेशियों और छाती पर ध्यान रखना चाहिए।
  • जिन लोगो को साँस से संबंधित समस्या होती है उन्हें यह प्राणायाम चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
  • यदि फेफड़ो से जुडी कुछ समस्या है तो भी आप अपने योग शिक्षक से सलाह ले सकते है।