Garbha Pindasana: मन को स्थिर कर, एकाग्रता बढ़ाने में सहायक

गर्भ पिंडासन को अंग्रेजी में Womb Embryo Posture के नाम से जाना जाता है। गर्भ पिंडासन 3 शब्दों का समायोजन होता है-गर्भ, पिन्ड, और आसन जिसमे गर्भ अर्थात कोख, पिंड यानी भ्रूण और आसन मतलब योग मुद्रा।

गर्भ पिंडासन के नियमित अभ्यास से शरीर और मन में स्थिरता आती है एवं शरीर का संतुलन भी बनता है। जिसके कारण एकाग्रता में वृद्धि होती है।

गर्भ पिंडासन पेट में जमे अतिरिक्त वसा को दूर करने के लिए अच्छा आसन होता है। गर्भ पिंडासन एक उन्नत योग है जिसके लिए घुटनों, कूल्हों और टखनों में लचीलेपन की आवश्यकता होती है।

यह गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से फ़ायदेमंद होता है और पहली तिमाही से अभ्यास किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि जन्म के समय भ्रूण को सही स्थिति के लिए तैयार करने में यह आसन मदद करता है। जानते है Garbha Pindasana को करने की विधि, उसके फायदे और उसकी सावधानियों के बारे में।

Garbha Pindasana in Hindi: इसे कैसे करते है, लाभ व सावधानियां

Garbha Pindasana

गर्भ पिंडासन को करने की विधि

  • गर्भ पिंडासन को करने के लिए पहले समतल जमीन पर दरी या मेट को बिछा ले ।
  • इसके बाद पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाए।
  • फिर शरीर को थोड़ा-सा पीछे की तरफ झुकाये और घुटनों को शरीर की ओर ऊपर लायें।
  • इसके बाद हाथों को पिंडलियों और जांघों के मध्य से निकालें।
  • अब कोहनियों को मोड़ ले और हथेलियों को एक साथ कर लें।
  • ध्यान रहे इस स्थिति में अंगुलियों के पोर ऊपर की तरफ रहने चाहिए।
  • फिर धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में वापस आ सकते है।
  • इस क्रिया को एक से दो बार दोहरायें।
  • इस आसन को करने से पहले योग के नियम को ज़रूर जानना चाहिए।

गर्भ पिंडासन को करने के फायदे

  • योग आसन साधक के ऊपरी और निचले शरीर दोनों को व्यायाम प्रदान करता है।
  • इस आसन के अभ्यास से पूर्ण रीढ़ को आराम मिलता है, विशेष रूप से निचली रीढ़ की मांसपेशियों को तनावहीन बनाता है।
  • गर्भ पिंडासन को नियमित करने से यह गर्भाशय और मलाशय को मजबूत करता है।
  • इस आसन को करने के लिए यह धारणा है कि यह आसन मन और आत्मा के बीच एक आध्यात्मिक संघ में मदद करता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास के कारण शरीर के पाचन तंत्र में सुधार होता है यह पेट की बीमारियों के सभी प्रकार के उपचार भी करता है।

गर्भ पिंडासन के समय ध्यान रखें योग्य सावधानियाँ

  • घुटनों, कूल्हों और टखनों में यदि कोई चोट हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन का अभ्यास किसी गुरु की उपस्थिति में ही कारण चाहिए।
  • यदि पेट की सर्जरी को कम ही दिन हुए है तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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