Garbhasana(Embryo Pose) - महिलायों के लिए अत्यंत लाभकारी आसन

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Garbhasana(Embryo Pose) - महिलायों के लिए अत्यंत लाभकारी आसन

गर्भासन में गर्भ का अर्थ होता है कोख। इस आसन में शरीर कि आकृति एक भ्रूण के समान हो जाती है इसलिए इसे गर्भासन कहा जाता है। इस आसन को फोएटस पोज़ , एम्ब्र्यो पोज़ , फेटस पोज़ के नाम से भी जाना जाता है।

गर्भासन विशेष रूप से महिलायों के लिए लाभकारी होता है। यह आसन शुरुआत में तो थोडा कठिन लगता है पर इसके निरंतर अभ्यास से यह आसान हो जाता है।

गर्भासन बुढ़ापे को जल्दी नही आने देता है। साथ ही गर्भासन को करते रहने से कब्ज से जुडी समस्याएं भी दूर हो जाती है। इस आसन द्वारा भूख में वृद्धि होती है तथा स्नायु की दुर्बलता दूर हो जाती है। और इस आसन से पीलिया रोग से भी निजात मिलती है।

इस आसन को करने से पहले पद्मासन, कुक्कुटासन और तोलांगुलासन को किया जाता है। जानते है Garbhasana को करने कि विधि, उसके फायदे और ध्यान रखने योग्य बातें।

Garbhasana Yoga - जानिए विधि, लाभ और सावधानी

Garbhasana Yoga

Embryo Pose Steps: गर्भासन को करने कि विधि

  • एक आसन बिछा ले और उस पर पद्मासन कि स्थिति में बैठ जाए।
  • इसके बाद बांहों को प्रत्येक पांव की जांघों एवं पिंडलियों के मध्य
  • ऐसे ले जाएं कि आपकी कोहनियां मुड़ सकें।
  • सांस को बाहर छोड़े और अपने हाथों से अपने पैरों को ऊपर उठाएं।
  • अपनी जांघों को ऊपर कि तरफ उठाये, साथ ही कानों को उंगलियों से पकडे।
  • धीरे-धीरे सांस लें और अपनी क्षमता अनुसार इस स्थिति में रहे।
  • इसके बाद पैरों को धीरे धीरे नीचे लाये और अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाए।
  • इस प्रकार एक चक्र पूरा हुआ।
  • ऐसा आप 3 से 5 बार करे।

Embryo Pose Benefits: गर्भासन के फायदे

  • गर्भासन को करने से प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है।
  • यह आसन क्रोध को कम करने के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। साथ ही इससे मन भी शांत होता है।
  • इसके नियमित अभ्यास से आप खुद पर काबू पा सकते है।
  • स्त्रियों से जुडी बहुत सारी परेशानियों का समाधान इस योगाभ्यास से संभव है।
  • इसके अभ्यास से शिशु जन्म समय में अधिक दर्द का अनुभव नहीं होता है।
  • महिलाओं के मासिक धर्म में यह आसन उपयोगी होता है।
  • गर्भासन को करने से स्त्री-पुरुष दोनों का यौवनकाल ज्यादा समय तक रहता है।

गर्भासन की सावधानिया

  • इस आसन को गर्भवती महिला को नही करना चाहिए। प्रसव के 40 दिन के बाद इस आसन को किया जा सकता है।
  • यदि आपके घुटनों में दर्द है तो भी इस आसन को ना करे।
  • इस आसन को कमर दर्द कि स्थिति में भी नही करना चाहिए।
  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए या फिर भोजन के तीन से चार घंटे के बाद भी कर सकते हैं।
  • यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर कि समस्या है तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।