ज्येष्टिकासन को अंग्रेजी भाषा में सुपीरियर पोज कहा जाता है। यह आसन शरीर को मजबूत करने के लिए और इसे आराम देने के लिए किया जाता है।

ज्येष्टिकासन करने में आसान होता है और इसे हर उम्र के लोग कर सकते है। ज्येष्टिकासन में ज्येष्ठ यानी बड़ा या फिर बेहतर होता है और आसन यानि योग मुद्रा।

योग में कई विश्राम वाले आसन उपस्थित होते हैं जो शरीर को गहरा आराम दे सकते हैं साथ ही सांसों को स्थिर बना सकते हैं और दिमाग को शांत भी कर सकते हैं। साथ ही साथ यह शरीर को स्वस्थ्य करते है व् रोगों को भी दूर रखने में मदद करते है। ज्येष्टिकासन इनमें से एक है।

ज्येष्टिकासन को करने से यह तनाव कम कर देता है और इसके द्वारा सतर्कता बढ़ जाती है। साथ ही यह कठिन परिस्थितियों को हैंडल करने के लिए आपकी इमोशनल फ्लेक्सिबिलिटी को बढाती है। जानते है इस Jyestikasana को करने कि विधि, इसके फायदे और सावधानियां।

Jyestikasana Steps and Benefits: जानिए इसे करने की विधि, लाभ और सावधानी

Superior Pose Steps: ज्येष्टिकासन करने की विधि

  • इस आसन को करने के लिए पैरों को सीधे रखते हुए पेट के बल लेट जाए।
  • हाथों की अंगुलियों को एक-दूसरे में फंसाकर सिर के पिछले भाग पर सटा ले।
  • शवासन के समान पूरे शरीर को ढीला छोड़ते हुए श्वास-प्रश्वास का ध्यान करे।
  • ध्यान रहे इस अवस्था में श्वास सामान्य रखनी चाहिए।
  • याद रखे श्वास लेते और छोड़ते समय खुद को एकाग्र कीजिए।

Superior Pose Benefits: ज्येष्टिकासन के फायदे

  1. यह आसन महिलाओं के लिए बहुत ही ज्यादा फ़ायदेमंद होता है।
  2. गर्भावस्था में यह आसन महिलाओं के लिए लाभकारी होता है, यह गर्भाशय में मांसपेशियों को शिथिल करता है।
  3. यह रीढ़ की हड्डी की सभी शिकायतों, विशेषकर ग्रीवा स्पॉन्डिलाइटिस और कठोर गर्दन या ऊपरी पीठ के लिए यह एक अच्छा आसन होता है।

Superior Pose Precautions: ज्येष्टिकासन कि सावधानिया

  • हाल ही में यदि पेट में चोट लगी हो तो इस आसन को नही करना चाहिए।
  • ध्यान रहे जिन्हें पैरों या जांघों में कोई गंभीर बीमारी हो, तो वह योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही इस आसन को करें।
  • इसके अतिरिक्त हर्निया होने पर इस आसन को नही करना चाहिए।