Khechari Mudra - कुंडलिनी शक्ति जाग्रत करने में सहायक, जानिए इसकी विधि

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Khechari Mudra - कुंडलिनी शक्ति जाग्रत करने में सहायक, जानिए इसकी विधि

खेचरी मुद्रा को हठयोग में अमृतपान भी कहा जाता है। खेचरी मुद्रा को मुद्राओं में राजा माना जाता है। खेचरी मुद्रा एक उन्नत अभ्यास होता है जो योगी को चेतना के उच्च स्तर तक पहुंचाने में सहायक होता है।

इस मुद्रा को जीभ के द्वारा किया जाता है। जिसमे जीभ को लंबा करने का अभ्यास किया जाता है। और जिन लोगो की जीभ पहले से भी लंबी होती है वह इस मुद्रा को आसानी से कर पाते है।

इस मुद्रा को करने से मानसिक और शारीरिक रोगों से मुक्ति मिल जाती है। जो साधु साधनारत होते है उनके लिए यह मुद्रा बहुत ही लाभकारी होती है। इस मुद्रा को मन से ट्राई करने की कोशिश ना करे।

खेचरी मुद्रा के नियमित अभ्यास से शरीर के भीतर की कुंडलिनी शक्ति जाग्रत हो जाती है। इस मुद्रा के जरिये प्राणायाम को सिद्ध करने और समाधि लगाने में मदद मिलती है। जानते है Khechari Mudra के बारे में विस्तार से।

Khechari Mudra in Hindi: जानिए इसकी विधि, लाभ और सावधानिया

Khechari Mudra

खेचरी मुद्रा को करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले उत्कटासन की मुद्रा में बैठ जाये।
  • अब अपनी जीभ को फोल्ड करके ऊपर की और करने की कोशिश करे।
  • शुरुवात में आप हार्ड सरफेस को टच कर पाएंगे, और बाद में सॉफ्ट। कुछ लोग पहली बारी में ही सॉफ्ट सरफेस को छू लेते है।
  • इसे करते वक्त जब भी आपको दर्द हो, इसे वापिस निचे ले आये।
  • सुबह शाम दोनों वक्त जीभ को गले के अंदर ले जाने का अभ्यास करे।
  • अभ्यास करते जायेंगे तो आपकी जीभ uvula को टच करेगी और फिर सर से कनेक्टेड नर्व को छूने लगेगी।
  • इस क्रिया के पूरी होने पर जब जीभ इतनी लंबी हो जाए कि सिर तक पहुंचने लगे तो आपका आसन सिद्ध हो जायेगा।
  • जीभ को घुसाने से इड़ा-पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी के खुले हुए द्वार बंद हो जाते हैं। जिसके चलते ब्रह्म रंध्र से टपकने वाला रस जीभ पर टपकता है और इसे ही हठयोग में अमृतपान कहा जाता है।
  • इस काम मे जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसके अभ्यास में आपको कम से कम 6 महीने से ज्यादा तक का समय लग जाता है।
  • इस मुद्रा का अभ्यास करना बहुत ही कठिन होता है इसलिए इसे मन से बिलकुल भी ट्राई ना करे किसी योग्य गुरु की देखरेख में ही करना चाहिए।

खेचरी मुद्रा को करने के फायदे

  1. खेचरी मुद्रा के अभ्यास से योगी बेहोशी, आलस्य, प्यास और भूख पर काबू पाता है।
  2. इसके अभ्यास से साधक रोग, क्षय और मृत्यु से ग्रस्त नहीं होता है।
  3. इससे व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत मजबूत हो जाती है शरीर दिव्य हो जाता है।
  4. बवासीर का रोग भी इस मुद्रा को करने से दूर हो जाता है।
  5. इस मुद्रा के माध्यम से साधक अपनी इच्छा के अनुसार सांस को जब तक चाहे तब तक रोक सकते हैं।

खेचरी मुद्रा को करते समय ध्यान रखने वाली सावधानियां

  • इस मुद्रा का अभ्यास करना बहुत ही कठिन होता है इसलिए इसे किसी कुशल प्रशिक्षक की उपस्थिति में ही करे।
  • यदि इस आसन को करते समय नाक के ऊपरी भाग से कोई कड़वा सा रस गिरने लगे तो इसे तुरंत ही बंद कर देना चाहिए।