शरीर में स्थित कुण्डलिनी चक्र को जाग्रत कर परम आनंद में खो जाएं

कुंडलिनी चक्र का नाम तो आपने सुना ही होगा| बहुत से लोगो ने यह भी कहा होगा की हमने अपनी कुंडली को जागृत किया है, लेकिन क्या यह इतना आसान है| यह सवाल सभी के मन में रहता है|

संयम और सम्यक नियमों का पालन करते हुए लगातार ध्यान करने से धीरे धीरे कुंडलिनी जाग्रत होने लगती है लेकिन जब यह जाग्रत हो जाती है तो व्यक्ति पहले जैसा नहीं रह जाता है| वह दिव्य पुरुष बन जाता है|

कुण्डलिनी एक प्रकार की दिव्य शक्ति है| यह दिव्य शक्ति मनुष्य शरीर के मूलाधार (रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा) में होती है| यह रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में आंटे लगाकर कुंडली मारे सांप की तरह एक जगह पड़ी रहती है| इसीलिए यह कुण्डलिनी कहलाती है|

जब यह चक्र जाग्रत या नीचे पड़े रहते है| तब तक मनुष्य सांसारिक विषयों और अपने भोग-विलास की तरफ भागता रहता है, परन्तु जब यह जाग्रत होने लगती है तो ऐसा प्रतीत होने लगता है कि कोई सर्पिलाकार तरंग है जो घूमती हुई ऊपर उठती है और एक दिव्य अनुभव को महसूस कराती है| आइये विस्तार से जानते है Kundalini Chakra in Hindi.

Kundalini Chakra in Hindi: जानिए कुण्डलिनी चक्र जागृति के प्रभाव

kundalini chakra in Hindi

Chakras in Body: शरीर में मौजूद कुंडलिनी चक्र

मनुष्य शरीर में सात चक्र होते है| कुण्डलिनी मूलाधार और रीड की हड्डी के निचले हिस्से में चारो तरफ लिपटा हुआ, जब यह जाग्रत होता है और ऊपर की और गति करता है तो उसका उद्देश्य सातवें चक्र सहस्रार तक पहुंचना होता है, लेकिन यदि व्यक्ति बीच में संयम और ध्यान छोड़ देता है तब यह गति करता हुआ किसी भी चक्र पर रुक सकता है| आइये जानते है Chakras in Body

मनुष्य शरीर में कुण्डलिनी शक्ति चक्रो की संख्या सात बताई गयी है। यह जानकारी शास्त्रीय रूप से प्रामाणिक है|

मूलाधार चक्र

यह गुदा और लिंग के बीच चार पंखुड़ियों वाला आधार चक्र है। आधार चक्र का ही दूसरा नाम मूलाधार है| इस चक्र को जाग्रत करने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले प्राणायाम करके, अपना ध्यान मूलाधार चक्र पर केंद्रित करके मंत्र का उच्चारण करना चहिए। इसका मूल मंत्र ” लं” है। धीरे-धीरे जब यह चक्र जाग्रत होता है तो व्यक्ति में लालच ख़त्म हो जाता है और व्यक्ति को आत्मीय ज्ञान प्राप्त होने लगता है|

स्वाधिष्ठान चक्र

यह मूलाधार चक्र के ऊपर और नाभि के नीचे स्थित होता है। स्वाधिष्ठान चक्र का सम्बन्ध जल तत्व से होता है। इस चक्र के जाग्रत हो जाने पर शारीरिक समस्या और विकार, क्रूरता, आलस्य, अविश्वास आदि दुर्गुणों का नाश होता है| शरीर में कोई भी विकार जल तत्व के ठीक न होने से होता है। इसका मूल मंत्र “वं ” है|

मणिपूर चक्र

यह तीसरा चक्र है जो नाभि से थोड़ा ऊपर होता है| योगिक क्रियाओं से कुंडलिनी जागरण करने वाले साधक जब अपनी ऊर्जा मणिपूर चक्र में जुटा लेते हैं, तो वो कर्मयोगी बन जाते हैं। यह चक्र प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय आदि मन में लड़ जमाये पड़े रहते है|

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अनाहत चक्र

यह चक्र व्यक्ति के ह्रदय में स्थित रहता है। इस चक्र को जाग्रत करने के लिए व्यक्ति को हृदय पर ध्यान केंद्रित कर मूल मंत्र “यं” का उच्चारण करना चाहिए। अनाहत चक्र जाग्रत होते ही बहुत सारी सिद्धिया प्राप्त होती है| यह सोता रहे तो कपट, चिंता, मोह और अहंकार से मनुष्य भरा रहता है।

विशुद्ध चक्र

यह चक्र कंठ में विद्यमान रहता है। इसे जाग्रत करने के लिए व्यक्ति को कंठ पर ध्यान केंद्रित कर मूल मन्त्र “हं” का उच्चारण करना चहिये। विशुद्ध चक्र बहुत ही महवपूर्ण होता है। इसके जाग्रत होने से व्यक्ति अपनी वाणी को सिद्ध कर सकता है। इस चक्र के जाग्रत होने से संगीत विद्या सिद्ध होती है, शब्द का ज्ञान होता है और व्यक्ति विद्वान बनता है|

आज्ञाचक्र

आज्ञा चक्र भ्रू मध्य अर्थात दोनों आँखों के बीच में केंद्रित होता है। इस चक्र को जाग्रत करने के लिए व्यक्ति को मंत्र “ॐ” करना चाहिए| इसके जाग्रत होने ही मनुष्य को देव शक्ति और दिव्य दृष्टि की सिद्धि प्राप्त होती है। त्रिकाल ज्ञान, आत्म ज्ञान और देव दर्शन होता है|

सहस्रार चक्र

सहस्रार चक्र व्यक्ति के मष्तिष्क के मध्य भाग में स्थित होता है| बहुत काम लोग होते है जो इस चक्र को जाग्रत कर पाये इसे जाग्रत करना बहुत ही मुश्किल काम है। इसके लिए बरसो तपस्या और ध्यान करना होता है। इस चक्र को जाग्रत कर व्यक्ति परम आनंद को प्राप्त करता है और सुख -दुःख का उस पर कोई असर नहीं होता है|

अगर आप भी इन् Kundalini Chakra in Hindi को जाग्रत करना चाहते है तो किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर ले और अपने शरीर और मन को अपने वष में कर लें|

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