मूर्छा प्राणायाम में मूर्छा का अर्थ होता है बेहोशी। इस आसन द्वारा तनाव और चिंता पर नियंत्रण किया जा सकता है, साथ ही यह आसन क्रोध को कम करने के लिए भी लाभकारी होता है।

मूर्छा प्राणायाम करने में कठिन होता है इसलिए सारे आसनो में निपुण होने के बाद ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए और शिक्षक की उपस्थिति में ही इस आसन को करे।

इस प्राणायाम को सिद्ध योगी ही अच्छे से करते है। इस आसन का अभ्यास करते समय सर हल्का अनुभव करता है। साथ ही इसमें स्थिति बेहोशी जैसी हो जाती है।

मूर्छा प्राणायाम मानसिक समस्याओं एवं नपुंसकता से प्रभावित रोगियों के लिए भी फ़ायदेमंद होता है। जो लोग इस अभ्यास को पूरा करने में सफल रहते हैं, वे लंबे समय तक आराम और उल्लास महसूस करते है।जानते है Murcha Pranayama को करने की विधि ,उसके फायदे और ध्यान रखने योग्य सावधानिया के बारे में।

Murcha Pranayama in Hindi: मूर्छा प्राणायाम कैसे करते है व इसके फायदे

-Murcha Pranayama in Hindi

मूर्छा प्राणायाम को करने की विधि

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं।
  • इसके बाद आँखें बंद कर ले ।
  • फिर सिर को पीछे झुकाएं और धीरे धीरे दोनों नासिका छिद्र से सांस लें।
  • अब इसके बाद कुम्भक करें और शाम्भवी मुद्रा करते हुए स्थिर रहे ।
  • फिर धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए सिर को सीधा कर ले ।
  • इस प्रकार एक चक्र पूरा हुआ।
  • इस तरह से 3 से 5 चक्र करें और फिर धीरे धीरे इस के चक्र को बढ़ाते रहें।

मूर्छा प्राणायाम के फायदे

  1. इसे करने से शरीर का वजन कम होता है।
  2. मूर्छा प्राणायाम को करने पर मन में शांति का अनुभव होता है।
  3. धातु रोग के उपचार में यह बहुत ही लाभकारी होता है।
  4. मूर्छा प्राणायाम को रोज करने से प्राण ऊर्जा में वृद्धि होती है।
  5. ध्यान करने के लिए मूर्छा प्राणायाम सबसे उत्तम आसन माना जाता है।
  6. इस प्राणायाम को करने से शारीरिक और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
  7. इस आसन के नियमित अभ्यास से आत्मिक स्तर की ओर पहुंचने में सहायता मिलती है।
  8. मूर्छा प्राणायाम को नियमित करने से सिरदर्द और मांसपेशियों की कमजोरी ठीक हो जाती है।

मूर्छा प्राणायाम की सावधानियां

  • इस आसन का अभ्यास करने से यह बेहोशी की अवस्था में लेकर आता है जिस कारण इसका अभ्यास किसी विशेषज्ञ के देखरेख में ही करना चाहिए।
  • यह प्राणायाम हृदय या फेफड़े के रोगियों को नहीं करना चाहिए।
  • यह आसन उच्च रक्तचाप, चक्कर या मस्तिष्क से पीड़ित रोगियों को भी नहीं करना चाहिए।
  • जो व्यक्ति मस्तिष्क दाब की समस्या से पीड़ित होता है उसे भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • इस प्राणायाम का अभ्यास इतना ज्यादा नहीं करना चाहिए कि बेहोश हो जाएं, इसलिए अभ्यास के दौरान जैसे ही कुछ मूर्छा का अनुभव होने लगे, तो तुरंत अभ्यास बंद कर देना ज्यादा अच्छा होता। नहीं तो इससे कुछ अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।