अंतरिक्ष तथा वायुमंडल में सौरमंडल के चारों तरफ, ग्रहों की गति से जो शोर हो रहा है वह ॐ की ध्वनि का चरम बिंदु है| ॐ ब्रह्माण्ड के अंदर नियमित ध्वनि है| सूक्ष्म इंद्रियों द्वारा ध्यान लगाने पर इसकी अनुभूति हो सकती है|

सभी जगह व्याप्त होने के कारण ही इस ध्वनि (ॐ) को ईश्वर की संज्ञा दी गई है| जो ॐ के अर्थ को जानता है, वह अपने आप को जान लेता है और जो अपने आप को जान लेता है वह ईश्वर को जान लेता है| इसलिए ॐ का ज्ञान सर्वोत्कृष्ट है| समस्त वेदो में भी ॐ शब्द का व्याख्यान हैं|

ऋषि-मुनि, तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में सुना तो उन्हें एहसास हुआ की एक ध्वनि ऐसी है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के अंदर भी और बाहर भी| हर कहीं, वह ध्वनि निरंतर जारी रहती है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा को शांती महसूस होती है तो उन्होंने उस ध्वनि को नाम दिया ॐ|

ॐ र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से संबंधित है | र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड का निर्माण हुआ है| इस कारण जब कोई ॐ का जप करता है, तब अत्यधिक शक्ति निर्मित होती है| आइये जानते है Om Chanting in Hindi.

Om Chanting in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

om chanting in hindi

सृष्टि निर्माण के आरंभ में एक ध्वनि गूंजी ओम और पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी गूंज फैल गयी| पुराणों में ऐसी कथा भी मिलती है कि इसी शब्द से भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा प्रकट हुए| इसलिए ओम को सभी मंत्रों का बीज मंत्र और ध्वनियों एवं शब्दों की जननी कहा जाता है| इस मंत्र के विषय में यह भी कहा जाता है कि, ओम शब्द के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है|

विज्ञान और चिकित्सकीय परीक्षणों से भी ओम मंत्र के जप को बड़ा ही लाभप्रद माना गया है| रिसर्च एंड इंस्टीट्‌यूट ऑफ न्यूरो साइंस के प्रमुख प्रोफ़ेसर जे. मार्गन और उनके सहयोगियों ने सात वर्ष तक 'ओम' मंत्र के प्रभावों का अध्ययन किया|

अपने अध्ययन में उन्होंने पाया कि ओम मंत्र के जप से हृदय एवं मस्तिष्क रोग से गंभीर रूप से पीड़ित व्यक्तियों को बहुत ही लाभ मिला| ओम मंत्र का उच्चारण शरीर में मौजूद कई मृत कोशिकाओं को पुनः जीवित कर देता है जिससे गंभीर से गंभीर रोंगों में भी यह बड़ा लाभप्रद होता है|

ॐ उच्चारण की विधि

सुबह के समय जल्दी उठकर नित्यक्रम से निवृत्त होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करना चाहिए| ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं| इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं| इसका उच्चारण आप जोर से या धीरे-धीरे अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं| ॐ जप आप माला से भी कर सकते हैं| यह है Om Chanting Meditation.

ॐ का जाप करने की अन्य विधि

इस विधि में हम तीसरी आंख यानि मस्तक के केंद्र पर ध्यान केंद्रित करने का तरीका है| ओम की ध्वनि ध्यान विधि पर जादुई असर करती है| इसे करते समय आराम से बैठें और अपने मस्तिष्क को विचारों और तनाव से मुक्त रखें| इसके बाद अपनी भौहों के बीच के हिस्से की ओर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करे और मानें कि इस जगह पर रोशनी है| इसके बाद तब तक ओम का उच्चारण करें जब तक आपकी सांसे आपको अनुमति देती हैं|

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ॐ जप के लाभ

  1. आध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि नियमित ओम मंत्र का जप किया जाए तो व्यक्ति का तन और मन शुद्ध रहता है, साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है| ओम मंत्र के जप से मनुष्य ईश्वर के करीब पहुचने की कोशिश करता है|
  2. सभी मंत्रों का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है| इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और होरमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है| इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है|
  1. यह एक ऐसा उच्चारण है जिसके निरंतर प्रयास से हम शरीर और मन को एकाग्र कर सकते है| दिल की धड़कन और रक्तसंचार ठीक होता है| यह मानसिक बीमारियाँ को दूर करता हैं| काम करने की शक्ति बड़ने लगती है| इसका उच्चारण करने वाला और सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं| इसके उच्चारण में पवित्रता का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है|
  2. ओम मंत्र के जप का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे मन में आने वाले अनजाने भय दूर हो जाते हैं और व्यक्ति में साहस और लक्ष्य प्राप्ति का उत्साह बढ़ जाता है|
  3. हारवर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हारबर्ट बेन्सन ने एक शोध में यह बताया कि एड्स की बीमारी में भी ओम का जप फायदेमंद होता है| इतना ही नहीं इसके जप से बांझपन की समस्या भी दूर होती है|
आज आपने जाना Om Chanting in Hindi, यह एक ऐसा शब्द है| जिसकी ध्वनि साधारण मनुष्य सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है| परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ॐ का उच्चारण करते रहना|