Panch Shakti Mudra: फेफड़े संबंधी समस्याएं दूर करने में मदद करे

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Panch Shakti Mudra: फेफड़े संबंधी समस्याएं दूर करने में मदद करे

हम हमारे हांथो का उपयोग बहुत से कार्यो को करने में करते है| क्या कभी आपने सोचा है हाथो से कार्य करने के अतिरिक्त यह आपको कई प्रकार से लाभ भी प्रदान कर सकते है।

आपको बता दे की हांथो के द्वारा आपके शरीर को स्वथ्य रखा जा सकता है और रोगो को दूर किया जा सकता है। हांथो द्वारा शरीर को स्वथ्य बनाने की प्रक्रिया को योग मुद्रा या हस्त योग मुद्रा कहते है।

योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान के तरह ही हस्त मुद्रा का भी महत्त्व है। पंचतत्व हाँथ की उँगलियों में प्रतिष्ठित है। प्राचीन काल से ही हस्त मुद्राओं का उपयोग कर ऋषि मुनि लोग स्वथ्य रहते थे।

हस्त मुद्रा के जरिये हम न केवल हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है बल्कि इन मुद्राओं की सहायता से परमात्मा को या फिर परमसुख को भी प्राप्त किया जा सकता है| हस्त मुद्राओं में से एक मुद्रा होती है Panch Shakti Mudra, आइये जानते है इसके बारे में।

Panch Shakti Mudra: इसे कैसे करते है और इसके फायदे क्या है

Panch Shakti Mudra

पंचशक्ति मुद्रा क्या है?

विद्युत धारा का प्रवाह अंगुलियों के पांचों वर्ग से अलग-अलग होता है। इसी कारण मुद्रा विज्ञान के अनुसार जब अंगुलियों को योगानुसार आपस में स्पर्श किया जाता है तब असंतुलित विद्युत प्रवाहित हो जाती है।

यह शरीर की शक्ति को दोबारा से जाग्रत कर देती है और इससे हमारा शरीर रोग से मुक्त हो जाता है। मुद्राओं का अभ्यास प्रारम्भ करने के थोड़े समय में ही इसका असर दिखाई देना शुरू हो जाता है।

पंच महाभूतों जल, पृथ्वी, अग्नि, वायु और आकाश से यथार्थ का ज्ञान होना ही पंचशक्ति मुद्रा का मुख्य उद्देश्य होता है।

पंचशक्ति मुद्रा का तरीका

  • पंचशक्ति मुद्रा को करने के लिए सबसे पहले नमस्कार ज्योति की तरह मुद्रा बनानी होती है।
  • इस बात का ध्यान रहे कि एक उंगली दूसरी उंगली से दूर ही रहे।
  • क्यूंकि पंचशक्ति में उंगलियों और अंगूठे को दूरी पर रखना होता है।
  • पंचशक्ति मुद्रा का अभ्यास प्रतिदिन कर सकते है|

पंचशक्ति मुद्रा के लाभ

  • पंचशक्ति मुद्रा से फेफड़े संबंधी खराबी और समस्याओं जैसे क्षय रोग आदि में बहुत ही लाभ मिलता है।
  • प्रतिदिन इसका अभ्यास करने से आप रोग मुक्त हो जाते है।
  • पंचशक्ति मुद्रा का नियमित रूप से अभ्यास करने से फेफड़े संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं।
  • इस मुद्रा को करने से नजला-जुकाम, बलगम आना, सांस संबंधी रोग, सर्दी ज्यादा लगना, जोड़ों का दर्द जैसे रेन्यूमेटिक पेन आदि समस्याओं में राहत मिलती है|