परिपूर्ण नवासना को full boat pose भी कहते है। परिपूर्ण नवासना का अभ्यास करने में कठिनाई नहीं आती है इसे सरलता के साथ किया जा सकता है। इस आसन का अभ्यास उन लोगो के लिए भी अच्छा होता है जो योग को अभी अभी शुरू कर रहे है

परिपूर्ण नवासना हमारे जीवन में ताकत और संतुलन को स्थापित करता है, जिस प्रकार एक स्थिर जहाज किसी न किसी समुद्र के माध्यम से शांति से चलता है।

इस आसन में दोनों भुजाओ और पैरों को आगे बढ़ाते हुए नाव की अवस्था में आना होता है । यह शरीर, मन और भावनाओं को शांत करने में मदद करता है।

परिपूर्ण नवासन पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। यह आसन थायराइड, किडनी और प्रोटेस्ट कैंसर से छुटकारा दिलाता है। जानते है Paripurna Navasana को करने का तरीका, उसके लाभ और सावधानियों के बारे में।

Paripurna Navasan: जानिए इसे करने का तरीका, इसके फायदे और सावधानियां

Paripurna Navasan

परिपूर्ण नवासना को करने की विधि

  • इस आसन को शुरू करने के लिए सबसे पहले चटाई को बिछा ले और उस पर बैठ जाए।
  • इसके बाद अपने पैरों को सामने की तरफ फैला ले। फिर अपने हाथों को फर्श पर रखें।
  • ध्यान रखे की आपकी पीठ पूरी तरह से सीधी होनी चाहिए।
  • अब सांसो को अंदर की तरफ ले और अपने पैरों को ऊपर की तरफ उठाये । पैरों को इस तरह उठाना है की ज़मीन से 45 डिग्री का कोण बने।
  • अपनी टैलबोन को बढ़ाये और अपने कूल्हों को अपने नाभि के करीब ले जाएं।
  • याद रखे की आपके घुटने सीधे होने चाहिए मुड़ने नहीं चाहिए और अपने पैरों पर अपना ध्यान केंद्रित करे।
  • सुनिश्चित करें कि आप अपने नितंबों और टेल्बोन पर बैठे है।
  • बाहों को बाहर की तरफ स्ट्रेच करे। ये कुछ इस तरह करे की वे फर्श के समानांतर और एक-दूसरे के समानांतर हो जाएँ ।
  • सामान्य साँस ले। इस मुद्रा को पहले 10 से 20 सेकंड ही करे। अभ्यास होने के बाद आप इसका समय बढ़ा सकते है ।

परिपूर्ण नवासन को करने के फायदे

  • परिपूर्ण नवासन को करने से तनाव दूर हो जाता है साथ ही शरीर का संतुलन भी बेहतर हो जाता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से अपच की समस्या भी दूर हो जाती है।
  • पेट और जांघो की मांसपेशियों में खिचाव आता है जिससे यह मजबूत बनती है और कमर दर्द से निजात मिलता है।
  • हैमस्ट्रिंग में खिचाव लाता है। साथ ही इस आसन द्वारा प्रजनन प्रणाली भी मजबूत बनती है।
  • एकग्रता को बढ़ाने में भी यह आसन बहुत ही लाभकारी होता है। कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत बनाने का कार्य करता है।

परिपूर्ण नवासना को करते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • यदि किसी को दमा, दस्त, सिर दर्द, हृदय की समस्याएं, अनिद्रा, माहवारी, गर्भावस्था, मधुमेह, हाल ही में सर्जरी कंधों में चोट हो तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन को किसी योग प्रशिक्षक की उपस्थिति में ही करना चाहिए।
  • यदि आपके गर्दन में चोट है तो आप इस आसन को किसी दीवार की मदद से कर सकते है। अपने सिर को दीवार के सहारे टिकाये और फिर इसका अभ्यास करे।