Parivrtta Parsvakonasana: साँस लेने की क्षमता में सुधार करे और आत्मविश्वास को बढ़ाये

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को अंग्रेजी में Revolved Side Angle Pose के नाम से जाना जाता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन तीन शब्दों से मिलकर बना है। जैसे परिवृत्त, पार्श्व और कोण। जिसमे परिवृत्त अर्थात घुमा हुआ या मुड़ा हुआ, पार्श्व यानि छाती के दाए -बाए का भाग और कोण मतलब कोना।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन की संपूर्ण क्रिया खड़े होकर की जाती है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन को करने से पेट के अंग उत्तेजित होते है। यह आसन जांघों, घुटनों, टखनों, छाती और कंधों को फैलाता है। साथ ही यह पैरो को मजबूत भी बनाता है।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को नियमित करने से यह चयापचय और साँस लेने की क्षमता में सुधार करता है। यह एकाग्रता और आत्मविश्वास में सुधार भी करता है।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को करने से शरीर को कई लाभ होते है। जानते है Parivrtta Parsvakonasana को करने की विधि और उसके फायदे के बारे में।

Parivrtta Parsvakonasana in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Parivrtta Parsvakonasana in Hindi

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाए।
  • इसके बाद साँस को अंदर की ओर ले और पैरो को 4 से 4.5 फ़ीट तक की दूरी में खोल ले।
  • फिर अपने बाए पैर को 45 से 60 डिग्री के अंदर मोड़ ले। साथ ही दाहिने पैर को 90 डिग्री बाहर को ओर मोड़े।
  • अब बायीं एड़ी के साथ दायी एड़ी को संरेखित रखे।
  • फिर अपनी बायीं एड़ी को ज़मीन से टिका कर रखे और दाहिने घुटने को मोड़ ले।
  • जब तक मोड़े की घुटना सीधा टखने के ऊपर ना आ जाये।
  • यदि आप में लचीलापन है तो जांघ को ज़मीन के समानांतर कर ले।
  • अब धीरे से अपने सिर को दाहिनी ओर 90 डिग्री तक मोड़े। इतना होने के बाद सिर को आगे की ओर झुकाये।
  • ध्यान दे की आप कूल्हों के जोड़ों से झुके न की पीठ के जोड़ों से।
  • इसके बाद साँस अंदर लेते हुए बाए हाथ को सामने लाते हुए, दाए पंजे को बाहर की ओर भूमि पर टिका दे।
  • यदि आपको ऐसा करने में कठिनाई हो रही है तो पंजे को एड़ी के पास लगाये।
  • अपने बाए हाथ को छत की तरफ बढ़ाये। आपका बाया हाथ और पैर एक सीध में होने चाहिए।
  • इसके बाद अपने सिर को ऊपर की ओर उठाये ताकि आप अपने बाए हाथ की उंगलियों को देख सके।
  • अब लगभग पांच बार साँस को अंदर ले और बाहर की और छोड़े।
  • अब इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रुके। धीरे धीरे इस आसन के अभ्यास के साथ साथ आप इसका समय बड़ा कर 90 सेकंड तक कर सकते है।
  • अब पांच बार साँस लेने के बाद आप आसन से बाहर आ सकते है।
  • एक चक्र पूरा होने पर आप इस आसन को दाहिनी ओर से भी कर सकते है।

परिवृत्त पार्श्वकोणासन को करने के फायदे

  • परिवृत्त पार्श्वकोणासन पैर, मेरूदंड एवं बगल के लिए फ़ायदेमंद है।
  • इस आसन को नियमित करने से तनाव दूर होता है।
  • परिवृत्त पार्श्वकोणासन को प्रतिदिन करने से यह शरीर के संतुलन में वृद्धि करता है।

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