पर्श्वोत्तनासन तीन शब्दों से मिलकर बना है। पार्शवा, उत और तन. पार्शवा का अर्थ होता है किनारा, उत का अर्थ होता है अधिक और तन का अर्थ होता है खिंचाव।

इस आसन को अंग्रेजी में इंटेंस साइड स्ट्रेच पोज़ भी कहा जाता है।यह पिरामिड पोज़ नाम से भी लोकप्रिय है क्योंकि यह एक पिरामिड जैसा दिखता है। पर्श्वोत्तनासन करने से रीढ़ की हडडी लचीली होती है तथा शरीर में संतुलन आता है|

साथ ही यह आसन पाचन अंग को उत्तेजित करता है और मन को शांत करता है। पर्श्वोत्तनासन आसन इंटरनल ऑर्गन का मसाज करता है और इससे पैर मजबूत होते है|

यह प्रजनन अंग को भी उत्तेजित करता है और मासिक धर्म तथा रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करता है। तो चलिए जानते है Parsvottanasana Yoga को करने का तरीका और इसके अन्य फायदे।

Parsvottanasana Yoga: जानिए इस आसन की विधि, लाभ तथा सावधानी

पर्श्वोत्तनासन के फायदे

  1. पर्श्वोत्तनासन करने से लिवर और पेट की मालिश होती है।
  2. पर्श्वोत्तनासन को नियमित करने से यह मस्तिष्क को आराम देकर शांत करता है।
  3. पेट और उसके अंगो को उत्तेजित करने में पर्श्वोत्तनासन का योगदान रहता है।
  4. पर्श्वोत्तनासन आसन को नियमित करने से रीढ़ की हड्डी और कंधो में खिचाव आता है।
  5. इसे करने से पैरो में मजबूती आती है तथा शरीर का संतुलन सुधरता है|

पर्श्वोत्तनासन को करने की विधि

इसे करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की स्थिति में खड़े हो जाये।फिर अपने हाथो को कमर के पीछे नमस्कार की अवस्था में जोड़ ले।  इसके बाद सास अंदर ले और आपके कद के मुताबिक पैर को खोल दे।

आपके बाये पैर को 45 से  60 डिग्री अंदर मोड़े और आपके दाये पैर को 90 डिग्री बहार की ओर मोड़े साथ ही अपनी बाई एड़ी को दायी एड़ी के पास ले जाये। धीरे धीरे करके अपना सिर 90 डिग्री दाई ओर मोडे। ऐसा करने के बाद सिर आगे की ओर झुकाये।

ध्यान रहे की आप पीठ के जोड़ो से झुकने के बजाय कूल्हों के जोड़ो से झुके। अपनी क्षमता अनुसार जितना हो सके अपना सिर दाहिने पैर तक लेकर जाये।

5 बार साँस अंदर ले और फिर बाहर छोड़े। ऐसा  करने से आप इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रह सकते है। इसके बाद धीरे धीरे समय बढ़ा सकते है पर ध्यान रहे की यह 90 सेकंड से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

5 बार साँस लेने के बाद आप इस आसन से बाहर आ सकते है| साँस अंदर लेकर अपने सिर और पीठ को एक साथ ऊपर लेकर आ जाये| अपने हाथो को कमर पर ले जाये और पैरो को अंदर ले आये| बाद में आप ताड़ासन ख़त्म कर सकते है। दायी ओर करने के बाद ये आसन बाई ओर भी करे

पर्श्वोत्तनासन के पहले करने वाले आसन

  • अधोमुख श्वान आसन
  • बंध कोणासन
  • गोमुखासन
  • प्रसारित पादोत्तनासन
  • सुप्त बद्ध कोणासन
  • उत्तानासन
  • उत्थित पार्श्वकोणासन
  • उत्थित त्रिकोणासन
  • वृक्षासन

पर्श्वोत्तनासन के बाद करने वाले आसन

  • दण्डासना
  • पिंचा मयूरासन
  • प्रसारित पादोत्तनासन
  • शलभासन
  • सलम्बा सर्वांगासन
  • सलंब सिरसासन
  • उत्कटासन
  • वीरभद्रासन

सावधानिया

  • अपनी क्षमता से ज्यादा अधिक जोर न लगाए।
  • यदि आप गर्भवती हैं, या आपके हाथों में चोट लगी है तो यह आसन करने से बचें।
  • आपको उच्च रक्तचाप या पीठ की चोट है तो आपको अर्ध पर्श्वोत्तनासन करना चाहिए।