सेल्फ इन्क्वायरी अर्थात आत्म विचार। इसका मतलब होता है कि “में कौन हु “इसे पाने के लिए हमारी प्रकृति से इसके बारे में खोज करना। स्वयं को जानने के लिए हमारे ऋषि मुनियों ने काफी प्रयत्न किये है और 20 वीं सदी के भारतीय ऋषि रमन महर्षी ने इसका विस्तार किया।

आई एम योग, प्राणायाम और ध्यान का एक सरल संयोजन है जिसके लिए आपको दिन के केवल 20 मिनट ही देने होंगे । यह आधुनिक दिनों के लिए ध्यान की एक तकनीक है। यह तकनीक पारंपरिक संश्लेषण और समय परीक्षाक्षित है जो वर्तमान मानसिक परिस्थितियों के लिए अनुकूल है। यह समय की पाबंदी होने वाले आधुनिक व्यक्ति की जरुरत है।

ध्यान मन की विशेष कला है। जिस तरह से हम अपने चारों ओर की दुनिया को पूरी तरह समझते हैं, वह हमारे दिमाग पर निर्भर करता है।यदि हम हमारी खुशी की खोज करना चाहते है तो हमारे पास दो विकल्प हैं - पूरे विश्व को बदल दे जिससे कि सब कुछ ठीक वैसे ही हो जाए जिस तरह हम चाहते हैं या फिर हमारे मन को बदल दे जिससे कि हम खुश और शांतिपूर्ण तरीके से रह सकें।

अब यह बात तो तय है की हमारा दुनिया पर कोई कंट्रोल नहीं है, इसलिए हमें खुद को बदलना होगा। इस प्रक्रिया में ध्यान हमारी मदद कर सकता है। आइये जानते है Self Enquiry Meditation के बारे में।

Self Enquiry Meditation: आंतरिक स्वतंत्रता और शांति प्रदान करे

Self Enquiry Meditation आत्म मनन ध्यान करने की विधि

  • सबसे पहले एक आसन पर आराम पूर्वक बैठ जाए, साथ ही पुरे ध्यान के दौरान तनावहीन और निश्छल होकर बैठे रहे।
  • इसके बाद अपने कंधो के चारो ओर एक ऊनि वस्त्र डाल सकते है।
  • हाँथ चिन मुद्रा (ज्ञान मुद्रा) में घुटनों और जांघो पर रहे।
  • अब आंखे बंद कर ले।
  • साथ ही चेहरे कि मांसपेशियों, विशेषकर आँख ,पलकों और मस्तक को तनावहीन रखे।
  • जैसे ही आप सचेत रहते हुए कोहनियों, पेट, निचले जबड़े और मस्तक को तनाव मुक्त करते हैं, शरीर को गहनता प्राप्त होती है।
  • जब ये "मुख्य बिंदु" तनावमुक्त हो जाते हैं, तब बैठने की पूरी स्थिति तनावहीन हो जाती है।
  • इस स्थिति में करीब 5 मिनट तक रहें| इस दौरान अपने विचारों और भावनाओं को शान्त रखे।
  • ॐ का उच्चारण करें और संबद्ध व्यायाम स्तर के मुताबिक ध्यान व्यायाम का अभ्यास करें।

ध्यान-व्यायाम समाप्त करने हेतु

  • ॐ उच्चारण करते हुए हथेलियों को जोर से रगड़ें और उनको चेहरे पर रखें और चेहरे की मांसपेशियों को गर्म करें।
  • तब तक धड़ को आगे झुकाएं जब तक कि मस्तक फर्श को स्पर्श न कर ले। आराम के साथ हाथों को सिर के समीप फर्श पर रखें ।
  • अब चेहरे की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को महसूस करें।
  • थोड़ी देर के लिए इसी स्थिति में बने रहें।
  • इस प्रकार लगातार बैठे रहने से आपका प्रयास सफल होता है और सिर में अच्छी तरह से रक्त की पूर्ति होती है।
  • अब धीरे से बिल्कुल सीधे हो जाएं और आँखे खोल लें।
  • ध्यान पूरा हुआ। इसे प्रारम्भ में 10 से 20 मिनट, बाद में 30-60 मिनट करे, साथ ही ध्यान में आपकी सांसे सामान्य ही रहनी चाहिए।