Shunya Mudra: श्रवण क्षमता का विकास करने में सहायक शुन्य मुद्रा

Go to the profile of  Yogkala Hindi
Yogkala Hindi
1 min read
Shunya Mudra: श्रवण क्षमता का विकास करने में सहायक शुन्य मुद्रा

शून्य मुद्रा को अंग्रेजी भाषा में Heaven Mudra के नाम से जाना जाता है। शून्य मुद्रा में शून्य का अभिप्राय अनंत आकाश से होता है। हमारे शरीर के भीतर के आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व शून्य मुद्रा के द्वारा होता है।

हमारे शरीर की मध्यमा अंगुली का सम्बन्ध आकाश से माना जाता है। शून्य मुद्रा का अभ्यास मुख्य रूप से श्रवण क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस मुद्रा को करने से एकाग्रता में वृद्धि होती है और इच्छा शक्ति मजबूत होती है।

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए यह एक अच्छी मुद्रा होती है। साथ ही इसे नियमित रूप से करने पर आलस्य दूर हो जाता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर की मंदता दूर हो जाती है, और रक्त संचार में भी वृद्धि होती है।

ह्रदय रोगियों के लिए भी यह मुद्रा लाभकारी होती है। जानते है Shunya Mudra को करने का तरीका, इसके फायदे और सावधानियों के बारे में।

Shunya Mudra: जानिए इसे करने की विधि, इसके फायदे और सावधानियां

शून्य मुद्रा को करने के विधि

  • इस आसन के लिए सबसे पहले किसी समतल ज़मीन पर चटाई या फिर मैट बिछा लें।
  • फिर पद्मासन या सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएँ।
  • ध्यान रहे की इस मुद्रा में पीठ और रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनो पर रख लें और हाथ की हथेलियां आकाश की ओर रखें।
  • अब अपनी मध्यमा अंगुली अर्थात बीच की अंगुली को हथेलियों की तरफ मोड़े और अँगूठे के जरिये अंगुली के प्रथम पोर को दबाये, इस क्रिया के दौरान बाकी अँगुलियों को सीधा रखे।
  • अपने ध्यान को सांसों पर लगाएं और इस मुद्रा का अभ्यास करें।
  • ध्यान रहे यह मुद्रा करते समय साँस सामान्य रहे।
  • कम से कम 45 मिनट तक इस मुद्रा में रहें ।
  • शून्य मुद्रा का अभ्यास सुबह और शाम के समय करना बहुत अच्छा होता है।
  • सुबह और शाम के समय इस मुद्रा का अभ्यास 22-22 मिनट के लिए कर सकते है।

शून्य मुद्रा को करने के फायदे

  • शून्य मुद्रा को करने से मुख्य रूप से कान की समस्या दूर हो जाती है। जैसे कान में होने वाला दर्द, कान का बहरापन आदि।
  • गले और थायरॉयड जैसे विकार के लिए शून्य मुद्रा बहुत ही उपयोगी होती है।
  • यदि शरीर के किसी भी अंग में अचेतन अवस्था आती है तो शून्य मुद्रा के नियमित अभ्यास से उसे दूर किया जा सकता है।
  • मसूड़ों में होने वाले रोग पायरिया से मुक्ति मिलती है और मसूड़े मजबूत बनते है।
  • जो बच्चे अत्यधिक जिद्दी होते हैं और एक स्थान पर बिलकुल भी नहीं टिकते, ऐसे बच्चों में आकाश तत्व बढ़ा हुआ होता है, जिसके कारण उनमें एकाग्रता की कमी होती है। ऐसे बच्चों को शून्य मुद्रा का अभ्यास करवाना चाहिए इससे उन्हें लाभ मिलेगा।

शून्य मुद्रा को करते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां

  • शून्य मुद्रा को खाली पेट करना चाहिए।
  • यदि पीठ में किसी प्रकार की गंभीर चोट हो तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • इस मुद्रा का अभ्यास भोजन के तुरंत पहले या फिर बाद में नहीं करना चाहिए।