सुदर्शन क्रिया: मन को शुद्ध करने का सरल उपाय

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सुदर्शन क्रिया: मन को शुद्ध करने का सरल उपाय

सुदर्शन क्रिया मतलब सांसो की गति को इस तरह नियंत्रण करना है जिससे आपके शरीर, दिमाग और फीलिंग्स एक हो जाये| 'सु’का मतलब होता है 'सही’और 'दर्शन’का मतलब है 'विजन या दृष्टि’। इस तरह से इसका मतलब हुआ कि इस क्रिया को करने से आपको सही दृष्टि मिलती है।

यह सांसों से सम्बंधित योगासन है इसमें आपको सांसे कभी धीमे तो कभी तेज गति से अंदर बाहर करनी होती है। जब आप इसका नियमित रूप से अभ्यास करने लगते है तो आप सांसो पर पूरी तरह नियंत्रण पा लेते हैं|

इस क्रिया को करने से आपका इम्यून सिस्टम बेहतर होता है और आप कई तरह की मानसिक बीमारियों से दूर रहते हैं। एक शोध के अनुसार सुदर्शन क्रिया से चिंता और डिप्रेशन को कम किया जाता है। इसे करने से दिमाग और शरीर का संतुलन बना रहता है| इसे करने से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता है। तो चलिए आज हम Sudarshan Kriya के बारे में विस्तार से जानते है|

Sudarshan Kriya कैसे करें और इसके फायदे क्या है

Sudarshan Kriya

सुदर्शन क्रिया 4 चरणों से मिलकर बनी होती है।

  • उज्जयी प्राणायाम
  • भस्त्रिका प्राणायाम
  • ओम का जाप
  • क्रिया योग

उज्जयी प्राणायाम (Victorious Breath)

इसे विक्टोरियस ब्रीथ भी कहते है। क्यूंकि इस प्राणायाम से आप अपनी सांसो पर विजय पा सकते है इसे ओसियन ब्रीथ भी कहते है क्यूंकि इसे करते समय समुद्र के समान आवाजे आती है|

उज्जयी प्राणायाम कैसे करे

  • उज्जयी प्राणायाम करने के लिए आसन ले सकते है|
  • इस प्राणायाम को करते समय ध्यान रहे की आप नाक से ही सांस को अंदर बाहर ले, मुँह से लेने की कोशिश ना करे|
  • सर, गले और पीठ को सीधा रखे, आंखे बंद कर ले|
  • इस प्राणायाम में साँस को अंदर बाहर छोड़ते है तो आपका पूरा ध्यान सांसो पर होना चाहिए।
  • साँस को अंदर लेने और बाहर छोड़ने का समय बराबर होना चाहिए। प्रारम्भ में आप बैठकर नाक से सांस अंदर लें और अपना सारा ध्यान उसी पर लगायें। फिर यही प्रक्रिया को साँस बाहर छोड़ते समय दोहराये|
  • इसे करते समय एक मिनट में कम से कम 2-4 बार सांसे लें।
  • इसे नियमित रूप से करने से आपकी सांसो पर आपका नियंत्रण हो जायेगा और आपका दिमाग भी शांत महसूस करेगा।

भस्त्रिका प्राणायाम

इसका अर्थ होता है " धोकनी" इसे बेलौस ब्रेथ भी कहते है। इसमें सांसो को बहुत तेजी से अंदर बाहर छोड़ना पड़ता है| जिससे सारे अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बहार निकल जाते है। यह योग, प्रदूषित और धूल भरे बातावरण में शरीर की शुद्धि और फेफड़ो की कार्य क्षमता को बढ़ाने में बहुत लाभदायक होता है।

कैसे करे

  • पहले आसन पर बैठ जाये और शरीर को सीधा रखे।
  • प्राणायाम को करते समय काफी तेजी से सांसो को अंदर और बाहर करे।
  • इसे करते समय एक मिनट में लगभग 30 बार सांसे अंदर बाहर करें।
  • इसे करते समय सारा ध्यान सांसो को छोड़ते समय लगाना होता है|
  • सांसो को अंदर लेने में जितना टाइम लें उसे बाहर निकालने में इसका दोगुना समय लें।

ओम का जाप

बहुत पहले ओम का जप ऋषि मुनि लोग करते थे। ये बहुत ही पवित्र मंत्र है। इसे करने से आपको ईश्वर के नजदीक होने की अनुभूति होती है| आप ओम जाप के फायदे यह जान सकते है|

कैसे करे

  • इसे सुबह के समय करना अच्छा होता है|
  • इसे करने के लिए आसन ले ले|
  • शरीर को सीधा कर के बैठ जाये।
  • ऊंचे स्वर में इस मंत्र का जाप करे

क्रिया:

इसे प्यूरीफाइंग ब्रीथ भी कहते है। यह सुदर्शन की क्रिया का लास्ट चरण होता है। इसमें सांसो की गति बार बार चेंज करनी पड़ती है।

कैसे करे

  • आसन पर सीधे बैठ जाये।
  • पहले धीमी गति से सांसे लेना प्रारम्भ करे फिर धीरे धीरे स्पीड बड़ा दे।
  • ध्यान रहे अंत में सांसो की गति सबसे तेज होनी चाहिए।
  • इसे करते समय ध्यान रहें कि सांसो को अंदर लेने का समय बाहर छोड़ने वाले समय से दोगुना होना चाहिए।

Sudarshan Kriya Benefits: सुदर्शन क्रिया के लाभ

  • इससे शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है।
  • शरीर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
  • शरीर का कोलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है।
  • निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
  • मन शांत रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है|
  • तनाव कम होता है, चिंताए दूर होती है|
  • रक्त संचार में सुधार होता है।
ऊपर आपने सुदर्शन क्रिया के बारे में जान लिया है| अगर आप इसे पहले बार कर रहे है तो किसी जानकर की देख रेख में ही करे।