Supta Matsyendrasana: आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करे

सुप्त मत्स्येन्द्रासन को लेट कर किया जाता है। यह आसन करने में तो बहुत आसन है। परन्तु इसके फायदे बहुत ही अद्भुत होते है। इसे कोई भी कर सकता है। सुप्त मत्स्येन्द्रासन को करने से रीढ़ कि हड्डी लचीली और मजबूत होती है।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन 3 शब्दों से मिलकर बना है; सुप्त, मत्स्येन्द्र, आसन जिसमे सुप्त यानी लेटना , मत्स्येन्द्र यानी मछलियों के भगवान् और आसन यानी मुद्रा है।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन को सुपाइन ट्विस्ट, द रिसाइक्लिंग ट्विस्ट, द रिसाइक्लिंग लार्ड ऑफ़ द फिश पोज़ और द जथारा परिवर्तनासना भी कहा जाता है। आज के लेख में हम आपको Supta Matsyendrasana को करने कि विधि ,उसके फायदे और इसे करते वक्त बरतने योग्य सावधानियों की जानकारी देंगे।

यह आसन शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में सहायता करता है और पीठ में खीचव लाता है। इस आसन में सारा शरीर शांत और रिलेक्स हो जाता है। यह आसन का नाम मछली के भगवान, मत्स्येंद्र के नाम पर है, जो योगी थे और भगवान शिव के छात्र थे।

Supta Matsyendrasana:जानिए इसकी विधि, लाभ और सावधानी

Supta Matsyendrasana

सुप्त मत्स्येन्द्रासन को करने कि विधि

  • इस आसन को शुरू करने के लिए सबसे पहले आसन बिछाकर उस पर लेट जाए।
  • इसके बाद अपने दोनों हाँथों को कंधे की सीध में दोनों तरफ फेला ले।
  • फिर दाई टांग को घुटने के पास से मोड़ ले और ऊपर कि ओर उठाये।
  • दाये पैर को बाए घुटने पर टिका ले।
  • इसके बाद साँस को छोड़ते हुए ,दाये कुल्हे को उठाये और पीठ को बायीं तरफ मोड ले व् दाये घुटने को नीचे कि तरफ जाने दे और ऐसा करते वक्त दोनों हाथ जमीन पर ही रखे।
  • प्रयास करे कि दाया घुटना पूरी तरह से शरीर के बायीं तरफ टिक सके।
  • अब सर को दाई तरफ घुमाये।
  • इस मुद्रा में आप 30 से 60 सेकंड तक ही रुके। फिर सामान्य स्थिति में आ जाये।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन के लाभ

  • सुप्त मत्स्येन्द्रासन आपके आंतरिक अंग को उत्तेजित करता है और टोन करता है।
  • यह आसन आपके आंतरिक अंगों के लिए एक पूर्ण डिटॉक्स प्रदान करता है।
  • सुप्त मत्स्येन्द्रासन पाचन के लिए अच्छा होता है। और पेट की समस्याओ से निजात दिलाता है।
  • यह आपके कंधे, छाती, मध्य रीढ़, कूल्हों, पीठ के निचले हिस्से और ऊपरी हिस्से को एक अच्छा खिंचाव देता है।
  • यह तनाव और चिंता को दूर करता है| और आपको मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • यदि आपकी रीढ़, कूल्हों या पीठ में दर्द हो, तो यह आसन इस समस्या से छुटकारा दिलाता है।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन में बरते जाने वाली सावधानियां

  • अगर आपके कुल्हो या फिर घुटनों में चोट है तो इस आसन को न करे।
  • अगर आप पीठ की चोट या पीठ के दर्द से परेशान है तो अनुभवी मार्गदर्शक में ही इस आसन को करना चाहिए।

सुप्त मत्स्येन्द्रासन के पहले करने वाले आसन

  1. पवनमुक्तासन
  2. उत्थित हस्त पादंगुष्ठासन

सुप्त मत्स्येन्द्रासन के बाद करने बाले आसन

  1. बद्ध कोणासन
  2. अर्धमत्स्येन्द्रासन

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