आकर्षक और स्वस्थ शरीर पाने के लिए अवश्य करें सुप्त वज्रासन

प्रत्येक व्यक्ति को सुख और शांति की तलाश रहती है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है व्यक्ति का स्वस्थ होना| शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही इस प्रकार के सुख का अनुभव कर सकता है| अगर आप शारीरिक और मानसिक सुख और शांति दोनों का अनुभव लेना चाहते है, तो योगासन का तरीका अपनाए|

योग ही एक ऐसा तरीका है जिसके नियमित अभ्यास से शरीर को स्वस्थ और मन को शांत किया जा सकता है| आज हम आपको ऐसे ही एक योगासन Supta Vajrasana के बारे में बताने वाले है|

सुप्त वज्रासन के नियमित अभ्यास से अमाशय के अंगों की मालिश होती है और पाचन संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है| इसके अलावा दमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के अन्य रोगों में भी इससे फायदा मिलता है| आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए भी इसे सर्वश्रेष्ठ आसान माना जाता है|

योगासनों में सुप्त वज्रासन बेहद लाभप्रद योग माना जाता है| यह रक्तचाप को सामान्य करने में मददगार साबित होता है| यह शारीर में मोटापे को कम करता है और फालतू चर्बी को भी हटाता है| आइये जानते है Supta Vajrasana in Hindi.

Supta Vajrasana in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

supta vajrasana in hindi

सुप्त का अर्थ है सोया हुआ| वज्र एक नाड़ी का नाम है, जिसका संबंध कामशक्ति से है देवताओं के राजा इंद्र के अस्त्र का नाम भी वज्र ही है| यह आसन कामशक्ति को सूक्ष्मतम रूप प्रदान करने में सहायता करता है| इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है।

Supta Vajrasana Steps: जानिए इसे करने की विधि

यह आसन करने में इतना कठिन नहीं है फिर भी इसे किसी योग्य शिक्षक से परामर्ष लेकर ही करना चाहिए| आइये जानते है Supta Vajrasana Steps

  1. सबसे पहले समतल और साफ़ जमीन पर चटाई या योगा मैट बिछाकर बैठ जाएं|
  2. इसके बाद दाएं पैर को मोड़कर पीछे की ओर दाएं कूल्हे के नीचे रखें और बाएं पैर को मोड़कर बाएं कूल्हे के नीचे रखें| अब दोनों पंजो को मिलाते हुए एड़ियों पर वज्रासन की स्तिथि में बैठ जाएं|
  3. इसके बाद अब आप धीरे से अपनी दाई कोहनी, भुजा और उसके पश्चात बायीं कोहनी और भुजा के सहारे धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और पीठ के बल लेट जाएं|
  4. अब सिर को जितना संभव हो अंदर की तरफ अर्थात पीठ की ओर करने की कोशिश करें| इससे पीठ की आकृति कमान या धनुष की तरह बन जाएगी| इस स्थिति में दोनों हाथों को जांघों पर रखें|
  5. इस अवस्था में आपको ध्यान रखना होगा की घुटनों का संपर्क जमीन के साथ रहे| यदि जरुरी लगे तो आप दोनों घुटनो को अलग-अलग भी रख सकते है|
  6. अब पनि दोनों आँखों को बंद करके शरीर को शिथिल करें और साँस की स्थिति को सामान्य रखें|
  7. कुछ समय के लिए इस अवस्था में बने रहें| फिर करवट लेकर पैरो को सीधा करें एवं सामान्य स्थिति में आकर कुछ देर आराम करें तथा पुनः इस आसान को दोहराएं|
  8. इस आसन को आप 3 बार करें|
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Supta Vajrasana Benefits: जाने इसके लाभ

  1. इस आसन के नियमित अभ्यास से पैर, घुटने, जांघे, कमर तथा छाती मजबूत होती है तथा गर्दन और थायरॉयड-ग्रंथि की तंत्रिकाओं पर विशेष प्रभाव पड़ता है|
  2. इससे साँस संबंधी समस्याएं दूर होती है, रक्त शुद्ध होता है, सुष्मना नाड़ी सक्रिय होती है तथा कुंडलिनी जागरण में सहायता मिलती है|
  3. इस आसन का अभ्यास ग्रंथियों को मजबूत तथा मेरुदण्ड (रीढ़ की हड्डी) को लचीला और मजबूत बनाता है| साथ ही यह बड़ी आंत को सक्रिय करता है जिसके फलस्वरूप कब्ज एवं बवासीर से रहत मिलती है|
  4. यह आसन रक्तसंचार को सूक्ष्म तंतुओं की आवश्यकता के अनुसार तेज करता है तथा पसीने की बदबू को दूर करता है।
  5. यह ब्रोंकाइटिस रोग से राहत दिलाता है तथा फेफड़ों को फूलने में मदद करता है, जिससे फेफड़ों में साँस लेने की क्षमता में वृद्धि होती है|
  6. यह गले के रोग, सर्वाइकल, टीबी व दमा आदि रोगों को दूर करने में सहायक होता है| साथhi यह आँखों की रोशनी बढ़ाने और कुबड़ेपन को भी ठीक करता है|

आज आपने जाना Supta Vajrasana in Hindi, अगर आप भी अपने शरीर को आकर्षक, सुन्दर और स्वस्थ्य बनना चाहते है तो आप भी इस योगासन को अपनाएं|

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