Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana: पैरों की सूजन और दर्द को दूर करे

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Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana: पैरों की सूजन और दर्द को दूर करे

Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana को थ्री फेस पोज़ और फॉरवर्ड बेंड पोज़ भी कहते है। त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन का नाम छह शब्दों से मिलकर बना है: जैसे त्रिअंग, मुख, एक, पद, पश्चिम और उत्तान।

जिसमे त्रिअंग यानी तीन अंग, मुख अर्थात मुँह, पद यानी पैर, पश्चिम अर्थात पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा, और उत्तान का अर्थ होता है खिचा हुआ। त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन शरीर को बीमारी, माहवारी और थकान से राहत दिलाता है।

इस आसन द्वारा पाचन तंत्र में सुधार आता है, साथ ही यह रीढ़ कि हड्डी को भी लचीला बनाता है। जानते है त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन को करने कि विधि, उसके होने वाले फायदे और ध्यान रखने योग्य सावधानियो के बारे में ।

त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन को करने से पहले वीरभद्रासन 1, वीरभद्रासन 2, दंडासन, पश्चिमोत्तानासन, पूर्वोत्तानासन और अर्ध बद्ध पद्मा पश्चिमोत्तानासन को कर सकते है व् त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन के बाद जानुशीर्षासन को भी कर सकते है।

Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana: जानिए इसकी विधि, लाभ

Trianga Mukhaikapada Paschimottanasana

त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन को करने कि विधि

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दंडासन कि स्थिति में बैठ जाए।
  • फिर हलके हाथो से जमीन को दबाये और साँस को अंदर कि ओर लेते हुए रीढ़ कि हड्डी को लंबा करने का प्रयास करे।
  • अब साँस अन्दर ले और अपनी दाये पैर को ऊपर उठा कर पीछे कि ओर मोड़े। जितना हो सके उतना पीछे ले कर आये।
  • ऐसा करने से दाये कुल्हे और घुटने में खिचाव आता है। साथ ही दाया कुल्हा जमीन पर टिका होना चाहिए।
  • इसके बाद साँस को बाहर कि तरफ छोड़ते हुए कुल्हे के जोड़ो से झुके।
  • इसमें आपको ध्यान देना है कि आपको कमर के जोड़ों से नही झुकना है। और नीचे कि तरफ झुकते हुए साँस छोड़े ।
  • इसके बाद दोनों हांथो से बाए पैर को पकड़ ले।
  • 5 बार साँस को अंदर ले और बाहर कि ओर छोड़े।
  • इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक ही रुके।
  • इसमें निपुण होने के बाद आप इसे 90 सेकंड तक भी कर सकते है, पर ध्यान रहे कि इससे ज्यादा समय तक ना करे।
  • आप 5 बार साँस लेने के बाद इस मुद्रा से बाहर आ सकते है।
  • मुद्रा से बाहर आते समय साँस को अंदर कि ओर लेते हुए अपने धड़ को ऊपर उठाये। पीठ को सीधा रखे और अपने कुल्हे से वापिस ऊपर आये।
  • अब सीधे बैठ जाए और दाये पैर को आगे कर ले, यह मुद्रा समाप्त हुयी।
  • इस मुद्रा को दूसरी ओर से करे।

त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन के फायदे

  1. यह आसन टखने और घुटने के मोच के लिए एक चिकित्सा के रूप में कार्य करता है।
  2. यह मन को शांत करता है और कूल्हों को खोलता है।
  3. त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन पैर की सूजन को हटा देता है।
  4. यह आसन पेट की मांसपेशियों को निष्क्रिय तरीके से टोन करता है।

त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन कि सावधानियाँ

  • यदि घुटनों में दर्द है तो त्रिअंग मुखेकपद पश्चिमोत्तानासन को नही करना चाहिए।
  • अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा जोर ना लगाये।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने पर भी इस आसन को नही करना चाहिए।