Urdhva Padmasana: पाचन सुधारे, माइग्रेन में भी सहायक

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Urdhva Padmasana: पाचन सुधारे, माइग्रेन में भी सहायक

ऊर्ध्व पद्मासन को लोटस इन हेड स्टैंड और अपवर्ड लोटस पोस्चर भी कहा जाता है। ऊर्ध्व पद्मासन दो शब्दों से मिलकर बना है ऊर्ध्व और पद्म। ऊर्ध्व अर्थात ओर गया हुआ व पद्म का अर्थ होता है कमल का फूल।

यह कठिन आसनों में से एक है और एक योग्य योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही सीखा जाना चाहिए। ऊर्ध्व पद्मासन शरीर के प्रति जागरूकता, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और संतुलन में सुधार लाता है।

यह आसन थायरॉयड ग्रंथि और गुर्दे को उत्तेजित करता है साथ ही इस आसन से हृदय मजबूत होता है। शरीर की दुर्बलता को सही करने के लिए यह आसन बहुत अच्छा होता है। बैठने के कारण होने वाली थकान को दूर करने के लिए ऊर्ध्व पद्मासन लाभकारी माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन समय में तपस्या करने के लिए कई योगी इस आसन का उपयोग करते थे। जानते है Urdhva Padmasana को करने की विधि और उसके फायदे व सावधानियों के बारे में।

Urdhva Padmasana in Hindi: इस आसन को कैसे किया जाता है व उसके फायदे

Urdhva Padmasana in Hindi ऊर्ध्व पद्मासन को करने की विधि

  • ध्यान रहे इस आसन को करने से पहले हलासन का अभ्यास होना जरूरी है।
  • ऊर्ध्व पद्मासन को करने के लिए पहले एक मेट पर पीठ के बल लेट जाए और अपने हांथो को पीठ के साइड में जमीन पर टिका कर रखे।
  • इसके बाद सांस अंदर लेते हुए दोनों पैरो को ऊपर की और उठाकर हलासन की स्थिति लाये।
  • ऐसा करते समय कोहनियों को जमीन पर टिकते हुए दोनों हांथो से पीठ को सहारा देना है।
  • इस स्थिति में एक से दो बार साँस को अंदर और बाहर की ओर छोड़े। साथ ही यह सुनिश्चित कर ले आपका संतुलन सही रहे।
  • अब पैरों को पद्मासन की स्थिति में लाये।
  • फिर हांथो को आगे की तरफ लाकर हांथो से घुटने को सहारा दे।
  • यदि संतुलन बनाये रखने में कठिनाई हो रही है तो पीठ को सहारा देती हुयी मुद्रा में ही रहे।
  • अपनी दृष्टि को नाक पर केंद्रित करे। यदि इसमें परेशानी आर ही है तो अपनी दृष्टि को नाभि पर भी केंद्रित कर सकते है।
  • क्षमता अनुसार इस मुद्रा में 60 से 90 सेकंड तक रहे, इसके बाद धीरे धीरे करके पैरों को वापिस ले आये।
  • इस मुद्रा का अभ्यास शुरुआत में 30 सेकंड से शुरू करे और धीरे धीरे इसका समय बढ़ाये।

ऊर्ध्व पद्मासन के फायदे:-

  1. इस आसन को करने से पाचन तंत्र में सुधार होता है।
  2. ऊर्ध्व पद्मासन पेट के सभी अंगों के लिए फ़ायदेमंद होता है।
  3. माइग्रेन की समस्या से निजात दिलाने के लिए यह आसन लाभकारी होता है।
  4. ऊर्ध्व पद्मासन को नियमित करने से मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति होती है।
  5. इस आसन से कंधो, गर्दन, बाजुओं और धड़ की मासपेशियां मजबूत होती है।

ऊर्ध्व पद्मासन समय ध्यान रखने वाली सावधानियां

  • अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
  • यह आसन करने में कठिन होता है इसलिए इसे किसी योग गुरु के देखरेख में ही करना चाहिए।
  • गर्दन या कूल्हों में कोई चोट हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।